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संवेदना के सुर बजे जब वेदना के तार पर
सही दिशा मिल जाए तो
नहीँ बताई
भगवान परशुराम पर कविता
परशुराम जयंती पर रचना
पालन अपना कर्म करो
हे सुरूज देंवता अतका झन ततिया
मुहब्बत में ज़माने का यही दस्तूर होता है
गर्दिश में सितारे हों
प्यार का पहला खत पढ़ने को
नज़र आता है
हर पल मेरा दिल अब नग़मा तेरे ही क्यूं गाता है
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