कविता बहार

"कविता बहार" हिंदी कविता का लिखित संग्रह [ Collection of Hindi poems] है। जिसे भावी पीढ़ियों के लिए अमूल्य निधि के रूप में संजोया जा रहा है। कवियों के नाम, प्रतिष्ठा बनाये रखने के लिए कविता बहार प्रतिबद्ध है।

मुक्त समय का मिथक

समय और जीवन दर्शन

मुक्त समय का मिथक जीवन कोखालीपन नहीं चाहिए,उद्देश्य चाहिए,आग चाहिए। समय को बरबाद करने कासबसे आसान तरीका है—छोटी-छोटी बातों मेंमन को उलझाए रखना,सोचना,घिसटना,और वहीं फँसे रहना। जीवन ही समय है।हर क्षणअमूल्य है। हम जन्म लेते हैंशारीरिक प्रवृत्तियों की बेड़ियों में,और बड़े होते-होतेसमाज सेऔर भी जंजीरें जमा कर लेते हैं। जीवन का अर्थ है—सीख को भी

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न ट्रॉफी, बस खेल

मन और भावनाएँ

न ट्रॉफी, बस खेल (No Trophies, Just Play) जब भीतर पूर्ण हो,तो दुनिया सेसाथ माँगने नहीं जाते। जब भीतर पूर्ण हो,तो दुनिया सेकोई शिकायत भी नहीं रहती। तब कर्म होता है—तेज़, जीवंत,पर फल की भीख के बिना। कहते हैं जीवन कोकोई प्रेरक चाहिए।पर क्या वह प्रेरणाहीनता और कमी की भावना होनी चाहिए? हम जमा करते

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विचलन नहीं जीतते, कमजोर लक्ष्य हारते हैं

समाज और यथार्थ

विचलन नहीं जीतते, कमजोर लक्ष्य हारते हैं यदि लक्ष्यतुम्हें पकड़ नहीं पाता,तो दुनियातुम्हें खींच लेती है। विचलन दोषी नहीं हैं।वे बस यह बता रहे हैंकि लक्ष्यनिर्जीव है। अगर बार-बारध्यान की याद दिलानी पड़े,तो समझ लो—हृदय वहाँ नहीं है। कमजोर लक्ष्यमन को भटकने कानिमंत्रण देता है।यह समस्या नहीं,लक्षण है। ऐसा लक्ष्य चुनोजो तुम्हारी ढाल बन जाए।तुम

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तुमने ही चोर को बुलाया

हिंदी कविता

तुमने ही चोर को बुलाया पहले इच्छा ने दरवाज़ा खोला,फिर चोर भीतर आया। जब चाह आग बन जाती है,तो दुनियाव्यापारी बनकर पहुँचती है—मदद के लिए नहीं,मुनाफ़े के लिए। ज़रूरतमंद ग्राहकसबसे आसान शिकार होता है।अधीर हो तुम,तो वादा कुछ भी चलेगा,और मिलेगा—कुछ नहीं। तुमने सुकून माँगा,तुम्हें शोर मिला।तुमने अर्थ चाहा,तुम्हें नक़ली जवाब मिले। फिर तुम बोले—“उन्होंने

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जाओ, ज़िंदगी जियो”

हिंदी कविता

“एह! जाओ, ज़िंदगी जियो” दुनियाडरावने चेहरे पहनकर आती है,मास्क लगाकर,फुफकारते साँप दिखाकर,ड्रैगन की तरह गुर्राकर—बस तुम्हारी शांति हिलाने के लिए। और तुम?एक आँख खोलते हो,उसे देखते हो—और कहते हो,“एह?” फिर करवट बदलकरसो जाते हो। यही है असली मालिकाना हक़।यही है दुनिया पर राज। जो हर जगहखेल का मैदान ढूँढ लेता है,हर जगहनाचने की जगह बना

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मनोरंजन नाम की सज़ा

हिंदी कविता

मनोरंजन नाम की सज़ा(The Punishment Called Entertainment) तुम मनोरंजन ढूँढते होक्योंकि भीतरगहरी ऊब है। जो जीवन से भाग रहा है,वही सबसे ज़्यादाहँसता दिखता है।और जो साहस करता है,वह अक्सरचुप और गंभीर। जिसे तुम आनंद कहते हो,वह केवल उत्तेजना है—थोड़ी देर की गुदगुदी।इसे कोई भी दयनीय पा सकता है,और यहीउसकी सज़ा है। यदि तुम्हें लगातार मज़ा

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अगला कदम ही पर्याप्त है

हिंदी कविता

अगला कदम ही पर्याप्त है(The Next Step Is Enough) सच्चा कर्ममहत्त्वाकांक्षा से नहीं,स्पष्टता से जन्म लेता है।उसे नक्शों की ज़रूरत नहीं—बसएक सही अगला कदम। हम खुद से धोखा करते हैं।सुविधा पर फिसलते हैं,बहानों में टिक जाते हैं,और मान लेते हैंकि हम बहुत कोशिश कर रहे हैं। सच यह है—हम खुद को पर्याप्त नहीं खींचते।सीमा तक

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भय कभी भय बनकर नहीं आता

हिंदी कविता

भय कभी भय बनकर नहीं आता तुम सोचते होदुनिया बाँध रही है तुम्हें।पर सच यह है—डोरियाँ तुम्हारे भीतर हैं। भय कभीभय बनकर नहीं आता।वह प्रेम का मुखौटा पहनता है,कर्तव्य कहलाता है,ज़िम्मेदारी बन जाता है,पर भीतर सेकाँपता रहता है। भय है जब कहा जाता है—शादी कर लो,बुढ़ापे में अकेले रह जाओगे।तुम साथ नहीं खोजते,तुम बीमा खरीदते

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सब ठीक है… जब तक टूट नहीं जाता

हिंदी कविता

सब ठीक है… जब तक टूट नहीं जाता सब ठीक है—यह वाक्यअक्सर मुस्कान की आड़ मेंछुपा हुआ डर होता है। जो सुखकिसी सहारे पर टिका हो,वह सुख नहीं—असुरक्षा है। कुछ लोगहमेशा उदास दिखते हैं,और कुछहमेशा हँसते रहते हैं।आवाज़ मुलायम,चेहरा उजला—पूछो कैसे हो?तुरंत जवाब मिलता है—सब ठीक है। पर यह ठीक होनाबहुत पतला होता है।जरा सा

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जलवायु पतन का भावनात्मक इंजन

मन और भावनाएँ

“जलवायु पतन का भावनात्मक इंजन” हम जंगल से उठे,और जंगल को हीखाने लगे। क्योंकिहम बुद्धि से नहीं,भावना सेचलने लगे। एक इच्छा उठती है—विदेश यात्रा।दिल रोमांच से भरता है।आकाश मेंएक और उड़ान,धरती परएक और बोझ। भावनाकार्बन बन जाती है। एक सपना पलता है—अपना सुरक्षित घोंसला।सीमेंट,स्टील,पेड़ कटते हैं। डर कहता है—और बड़ा,और पक्का। डर भीकार्बन है। एक

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“प्रेम आत्मा का प्रतिबिंब है”

समय और जीवन दर्शन, हिंदी कविता

“प्रेम आत्मा का प्रतिबिंब है” तुम कहते हो—मैं यह हूँ,मैं वह हूँ। पर हर वाक्य से पहलेएक शब्दखड़ा रहता है—मैं। नाम बदलते रहते हैं,पद बदलते रहते हैं,पर यह मैंवहीं रहता है। यहीस्वयं है। जीवन की गुणवत्ताघरों, रिश्तों,सुविधाओं से नहीं—इस मैं कीस्वच्छता से तय होती है। अगर स्वयं साफ़ है,तोसंबंध सहज होते हैं। अगर स्वयं उलझा

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“वे प्रेम करते हैं—या सीमित?”

प्रेम और रिश्ते, हिंदी कविता

“वे प्रेम करते हैं—या सीमित?” अगर तुम्हारा उठनाकिसी को चुभता है,तो पूछो—यह प्रेम हैयाडर? जब तुमऊँचाई की ओर बढ़ते हो,और आसपास के लोगआहत हो जाते हैं—तो सच यह नहींकि तुम गलत हो,सच यह हैकि वे रुकना चाहते हैं। प्रेमकभीजंजीर नहीं डालता। प्रेम कहता है—जाओ,और भी ऊपर जाओ,चाहेमैं पीछे रह जाऊँ। जो तुम्हारे सपनों सेअसुरक्षित हो

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