कविता बहार

"कविता बहार" हिंदी कविता का लिखित संग्रह [ Collection of Hindi poems] है। जिसे भावी पीढ़ियों के लिए अमूल्य निधि के रूप में संजोया जा रहा है। कवियों के नाम, प्रतिष्ठा बनाये रखने के लिए कविता बहार प्रतिबद्ध है।

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अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस पर रचना/सुशी सक्सेना

महत्वपूर्ण दिन आधारित कविता

अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस पर रचना/सुशी सक्सेना नारी की गौरव गाथा/सुशी सक्सेना प्रसिद्ध बड़ी है जग में, नारी की गौरव गाथा है। हर रूप में प्यार हमें देती है, ये हमारी माता है। अपनी भारत माता पर, मुझे है अभिमान बहुत शहीदों ने दिए हैं, इसकी रक्षा में बलिदान बहुत माता के पावन चरणों में शीश

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जलती धरती/डॉ0 रामबली मिश्र

जलती धरती/पूनम त्रिपाठी

हिंदी कविता

जलती धरती/पूनम त्रिपाठी धरती करे पुकार मानव सेमुझे न छेड़ो तुम इंसानबढ़ता जाता ताप हमाराक्यों काटते पेड़ हमारापेड़ काट रहा तू इंसानजलती धरती सूखे नलकूपसूरज भी आग बरसाएबादल भी न पानी लायेमत उजाड़ो मेरा संसारधरती का बस यही पुकारमै रूठी तो जग रूठेंगामेरे सब्र का बांध टूटेगाभूकंप बाढ़ क़ो सहना पड़ेगासुंदर बाग बगीचे मेरेहे मानव

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अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस पर रचना / डॉ0 रामबली मिश्र वाराणसी।

महत्वपूर्ण दिन आधारित कविता

अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस पर रचना / डॉ0 रामबली मिश्र वाराणसी नारी को जो शक्ति समझता।उसको सबसे ऊपर रखता।।इक नारी में सकल नारियां।भले विवाहित या कुमारियां।। प्रबल दिव्य भाव का सूचक।सारी जगती का संपोषक।।नारी श्रद्धा भव्य स्रोत है।मूल्यवान गतिमान पोत है।। नारी में प्रिय मधुर भावना।अनुपम श्रेष्ठा सभ्य कामना।।सदा काम्य रस शीतल छाया।परम विराट देव सम

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JALATI DHARATI

जलती धरती/श्रीमती शशि मित्तल “अमर”

हिंदी कविता

जलती धरती/श्रीमती शशि मित्तल “अमर” आओ कुछ कर लें प्रयासधरती माँ को बचाना है,दूसरों से नहीं रखें आसस्वयं कदम बढ़ाना है,देख नेक कार्य सब आएं पाससबमें चेतना जगाना है। ईंट कंक्रीट का बिछा कर जालवनों को कर दिया हलालअपनी धरा को बहुत रुलाया है,हजारों पंछियों का था जो बसेराकाट नीड़ उनका उजाड़ा है। कहां से

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जलती धरती/डॉ0 रामबली मिश्र

जलती धरती/डॉ0 रामबली मिश्र

प्रकृति और पर्यावरण

जलती धरती /डॉ0 रामबली मिश्र सूर्य उगलता है अंगारा।जलता सारा जग नित न्यारा।।तपिश बहुत बढ़ गयी आज है।प्रकृति दुखी अतिशय नराज है।। मानव हुआ आज अन्यायी।नहीं रहा अब वह है न्यायी।।जंगल का हत्यारा मानव।शोषणकारी अब है दानव।। नदियों के प्रवाह को रोका।पर्वत की गरिमा को टोका।।विकृत किया प्रकृति की रचना।नित असंतुलित अधिसंरचना।। ओजोन परत फटा

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वेतन पर कविता / स्वपन बोस “बेगाना”

हिंदी कविता

वेतन पर कविता कर्म करों फल मिलेगा मेहनत तो महिना भर हों गया, फिर वेतन कब मिलेगा ।सूनों सहाब डालोगे वेतन,समय पर तभी तो फिर कर्म का सुंदर फूल खिलेगा। सूनों सहाब हम कर्मचारियों की कहानी, हमें बस एक तारीख अच्छा लगता है। क्यों की लगभग इसी दिन तक वेतन डलता है, फिर दो पांच

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पतझड़ और बहार/ राजकुमार 'मसखरे'

पतझड़ और बहार/ राजकुमार ‘मसखरे’

हिंदी कविता

पतझड़ और बहार/ राजकुमार ‘मसखरे’ ये  घुप अंधेरी  रातों मेंधरा को  जगमग करने दीवाली आती जो जगमगाती ! सूखते,झरते पतझड़ मेंशुष्क  जीवन  को रंगनेवो होली में राग बसंती गाती  ! झंझावत, सैलाब लिएजब  पावस दे दस्तक,तब फुहारें मंद-मंद मुस्काती ! कुदरत हमें सिखाता हैबिना कसक व टीस केवो ख़ुशी समझ नही आता है ! जो

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Hindi Poem Collection on Kavita Bahar

जलती धरती /रितु झा वत्स

प्रकृति और पर्यावरण

“जलती धरती” नामक कविता, जिसे रितु झा वत्स द्वारा रचा गया है, एक व्यक्तिगत अनुभव को अभिव्यक्ति देती है। इस कविता में, रचनाकार ने जलती धरती के माध्यम से मानव जीवन के अनेक पहलुओं को व्यक्त किया है। धरती की गर्मी, उसकी आत्मा को दहला देती है, जो हमें अपने कर्तव्यों के प्रति जागरूक करती

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पर्यावरण की रक्षा

जलती धरती/ आशा बैजल

प्रकृति और पर्यावरण

आशा बैजल की जलती धरती नामक हिंदी कविता में विभिन्न भावनाओं और संवेदनाओं को समाहित है। “जलती धरती” एक कविता है जो धरती की संताप और विपदाओं को बयान करती है। “जलती धरती” में, कविताकार धरती के विभिन्न प्राकृतिक विपदाओं की चर्चा करते हैं, जैसे कि वन जलन, भूकंप, बाढ़, और वायु प्रदूषण। यह कविता

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पशु-पक्षियों की करुण पुकार

हिंदी कविता

पशु-पक्षी हमारे मित्र होते है। उन्हें प्यार,दुलार देना एवं उनकी सुरक्षा हमारी जिम्मेदारी है । लेकिन हम मनुष्य अपने स्वार्थ के लिए उन्हें मार देते है।हमे ये नही भूलना चाहिए कि पर्यावरण का संतुलन बनाने में उनका अहम योगदान होता है।यदि उनकी क्षति होती है ,तो हम भी नही बच पाएंगे। इस कविता के माध्यम से मूक प्राणियों की करुण पुकार है।

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छत्तीसगढ़ शासकीय भवनों के नाम

हिंदी कविता

छत्तीसगढ़ शासकीय भवनों के नाम ये नाम छत्तीसगढ़ी हरे हैं ।है स्वाद मीठे रस से भरे हैं ।।जानो सभा आज विधान के हैं ।देवी ” मिनीमातु ” सियान से हैं ।। अध्यक्ष के धाम बने सियासी ।” संवेदना ” है गृह के निवासी ।।ये गेह मंत्रालय हैं सुहाते ।आमोद ” कल्याण निवास ” भाते ।।

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1मार्च शून्य भेदभाव दिवस पर कविता

1मार्च शून्य भेदभाव दिवस पर कविता / मनीभाई नवरत्न

महत्वपूर्ण दिन आधारित कविता, हिंदी कविता,

1मार्च शून्य भेदभाव दिवस पर कविता / मनीभाई नवरत्न शून्य भेदभाव दिवस पर, हम एक हो जाएँ ,पूरा विश्व एकजुट, सुबह के सूरज के नीचे।करते हैं आवाज़ बुलंद और स्पष्ट ,नफ़रत को और न कहने के लिए, भय को दूर करने के लिए। हम सब एक जैसे हैं, त्वचा के नीचे खून से कोई जाति

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