आया बसंत
हिंदी कविता“आया बसंत” नव पल्लव नव रंग लिए,नव नवल पुष्प का गंध लिए।सरसों की पीली चुनरी ओढ़े, टेशू के सुन्दर रंग लिए। खेतों और खलिहानों में, बागों और कछारों में। जंगल और पहाड़ों में, रंग बसंती संग लिए। उलट-पुलट चल रही बयारें, दिशा दिशा सब झूम रहे।नव चेतन का गुँजार लिए, चहुंओर निराली सी लगती।नभ में उज्जवल

