कविता बहार

"कविता बहार" हिंदी कविता का लिखित संग्रह [ Collection of Hindi poems] है। जिसे भावी पीढ़ियों के लिए अमूल्य निधि के रूप में संजोया जा रहा है। कवियों के नाम, प्रतिष्ठा बनाये रखने के लिए कविता बहार प्रतिबद्ध है।

आज भी बिखरे पड़े हैं – गंगाधर मनबोध गांगुली

समाज और यथार्थ

आज भी बिखरे पड़े हैं – गंगाधर मनबोध गांगुली         गंगाधर मनबोध गांगुली ” सुलेख “           समाज सुधारक ” युवा कवि “ कल तक बिखरे पड़े थे ,           आज भी बिखरे पड़े हैं ।अपने आप को देखो ,             हम कहाँ पर खड़े हैं ।।01।। बट गये हैं लोग ,              जाति और धर्म पर ।गर्व करते रहो ,              मूर्खतापूर्ण […]

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लालसा पर कविता – पूनम दुबे

हिंदी कविता

लालसा पर कविता जो कभी खत्म ना हो,रोज एक के बाद एक,नई इच्छाओं का जन्म होना,पाने की धुन बनी रहती है, लालसा सबको खुश रखने तक,सपनों को पूरा करने तक,कब चैन की सांस लेंगे,अंधेरों से उजालों तक,कभी तो चैन मिलेगा ,पर ये लालसा बढ़ती रहती है, तुमसे कुछ कहूं कब सुनोगे मेरी बात,कुछ तुम्हें बताना

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महानदी पर कविता – केवरा यदु

हिंदी कविता

मोर महानदी के पानी मा – केवरा यदु चाँदी कस चमके चम चम जिंहा चंदा नाचे छम छम ।सोंढू पैरी के संगम भोले के ड़मरु  ड़म ड़म ।मोर महानदी के पानी  मा। महानदी के बीच में बइठे शिव भोला भगवान ।सरग ले देवता धामी आके करथें प्रभू गुणगान ।माता सीता बनाइस शिव भोले ला मनाइस

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संतोषी महंत की नवगीत – संतोषी महंत

हिंदी कविता

संतोषी महंत की नवगीत हंसकर जीवन​-अथ लिख दें या रोकर अंजाम लिखें।जीवन  की  पीड़ाओं  के औ कितने आयाम लिखें।। धाराओं ने सदा संभालातटबंधों ने रार किया।बचकर कांटों से निकले तोफूलों ने ही वार किया।।बंटवारा लिख दें किस्मत काया खुद का इल्जाम लिखें।।जीवन की पीड़ाओं के……. चौसर की छाती पर खुशियोंके जब-जब भी पांव परे।कृष्णा कहलाने

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हाइकु

एकांत/हाइकु/निमाई प्रधान’क्षितिज’

हिंदी कविता

एकांत/हाइकु/निमाई प्रधान’क्षितिज’ [१]मेरा एकांत सहचर-सर्जक उर्वर प्रांत! [२]दूर दिनांततरु-तल-पसरा मृदु एकांत! [३]वो एकांतघ्न वातायन-भ्रमर न रहे शांत ! [४]दिव्य-उजासशतदल कमल एकांतवास ! [५]एकांत सखाजागृत कुंडलिनी प्रसृत विभा ! *-@निमाई प्रधान’क्षितिज’*      रायगढ़,छत्तीसगढ़   मो.नं.7804048925

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छत्तीसगढ़ी गीत – तेरस कैवर्त्य

हिंदी कविता

छत्तीसगढ़ी गीत – झिन रोबे दाई मोर झिन रोबे दाई मोर झिन रोबे बाई मोर।रात दिन गुनत तंय ह झिन रोबे न ss अकेला ही जाहूँ , कोनो नइ जावय संग म। झुलत रही मुहरन , तोर नजरे नजर म।भुइंया म आके , झिन जीयव घमंड म।काँटा खूँटी झिन गड़व , जिन्गी डहर म।राख हो

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प्यार तुम ही से करता हूँ – कृष्ण सैनी

हिंदी कविता

प्यार तुम ही से करता हूँ – कृष्ण सैनी विरह को पीकर में,आज इक इंसाफ करता हु।प्यार तुम ही से करता था,प्यार तुम ही से करता हु। सोचा इत्तला कर दूं,अब भी तुझपे  ही मरता हु।प्यार तुम ही से करता था,प्यार तुम ही से करता हूँ। मेरी कोशिश थी बस इतनी,कभी बदनाम ना हो तु।की

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धूप पर कविता – पुष्पा शर्मा

नारी जीवन और संवेदना

धूप पर कविता – पुष्पा शर्मा कोहरे की गाढी ओढनीहिमांकित रजत किनारी लगी।ठिठुरन का संग साथ लिया सोई  रजनी अंधकार पगी। ऊषा के अनुपम रंगों नेसजाई अनुपम रंगोली,अवगुण्ठन हटा होले सेधूप आई ,ले किरण टोली। इठलाती बलखाती सी वोसब ओर छा रही है, धूप।नर्म सी सबको सहलातीभाया इसका रूप अनूप । नव जीवन  संचार करतीसृष्टि

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पुष्पा शर्मा की गीतिका – पुष्पा शर्मा

हिंदी कविता

पुष्पा शर्मा की गीतिका – पुष्पा शर्मा नज़र अंदाज़ करते हैं गरीबी को सभी अब तो।भुलाकर के दया ममता सधा स्वारथ रहे अब तो। अहं में फूल कर चलता कभी नीचे नहीं देखा,मिले जब सीख दुनियाँ में लगे ठोकर कभी अब तो। बदल देता नज़ारा है सुई जब वक्त की घूमे,भले कितना करें अफ़सोस समय

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छत्तीसगढ़ पर कविता – पंकज

नारी जीवन और संवेदना

छत्तीसगढ़ महिमा – पंकज छत्तीसगढ़  महतारी मोर छत्तीसगढ़  महतारी।तोर  कोरा म  रहिथे दाई  दाता अउ भिखारी।उत्तर म  सरगुजा  हावे स्वर्ग  समान  कहाथे।दक्षिण म केशकाल के घाटी सबके मन ल मोहाथे।पश्चिम  म  मैकल  पर्वत  हे बैगा  मन के डेरा।अउ पूरब  म अब्बड़ ऊँचा  जशपुर क्षेत्र पठारी।छत्तीसगढ़  महतारी महानदी ल गंगा कहिथे सबके प्यास बुझाथे।डोंगरगढ़ बमलाई म

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प्रेमिका के लिए कविता – नेहा चाचरा बहल

हिंदी कविता

प्रेमिका के लिए कविता – न जाने क्यों आज तुम्हे देखने का बड़ा मन हैलिख कर जज़्बात खत में तुम्हे भेजने का बड़ा मन है हाथों में हाथ डाले हम तुम भी घूमते थे फ़ुरसत के उन पलों को ढूंढने का बड़ा मन है कागज़ में नाम लिख कर कभी उसको फाड़ते थेतेरे नाम के

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परिवर्तन पर कविता – पुष्पा शर्मा

समाज और यथार्थ

परिवर्तन पर कविता – पुष्पा शर्मा परिवर्तन अवश्यंभावी है,  क्योंकि यह सृष्टि  का नियम है।नित नये अनुसंधान का क्रम है।सतत श्रम शील मानव का श्रम है। परिवर्तन   ज्ञान, विज्ञान मेंपरिवर्तन मौसम के बदलाव मेंसंसाधनों  की उपलब्धियों की होड़ में।परिवर्तन परिवार मेंसमाज राज्य देश में। हर रीति और रिवाज   में खान पान पहनावे मेंनित नया उत्साह  देता,जीवन 

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