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परिचारिका पर कविता -मदन सिंह शेखावत

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परिचारिका पर कविता -मदन सिंह शेखावत

अथक परिश्रम करने वाली।
नित्य करे तीमारदारी।
रहे बीमारों के बीच में।
मुस्कराकर करे खातिरदारी।
सुन्दर सुखद शब्दो को
चुनकर।
करती परेशानी दूर।
रोज लगी है यह परिचारिका।
रोग भगाये नित्य दूर।
श्वेत लिबास में रहती प्रतिदिन।
दिनभर करती भागादौङ।
सबकी बाते सहज भाव सुन।
आगे पीछे करती दौङ।
बिन बच्चो की परवाह किये,
करती है मेहनत अकूत।
यह देवी का रूप मनोहर।
करती सबकी पीड़ा दूर।।



मदन सिंह शेखावत ढोढसर

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