KAVITA BAHAR
SHABDON KA SHRIGAR

पीर दिल की छुपाने की जरूरत क्या है – कविता – मौलिक रचना – अनिल कुमार गुप्ता ” अंजुम “

इस कविता के माध्यम से कवि जिन्दगी को बेहतर तरीके से जीने को प्रेरित कर रहा है |
पीर दिल की छुपाने की जरूरत क्या है – कविता – मौलिक रचना – अनिल कुमार गुप्ता ” अंजुम ”

0 43

पीर दिल की छुपाने की जरूरत क्या है – कविता – मौलिक रचना – अनिल कुमार गुप्ता ” अंजुम ”

पीर दिल की छुपाने की , जरूरत क्या है

गम को फना करने के , बहाने हैं बहुत

क्यूं कर दूर जाने की , बात करते हो

करीब आने, दिल लगाने के , बहाने हैं बहुत

क्यूं कर रिश्तों में ये , कड़वाहट कैसी

रिश्तों को निभाने के , बहाने हैं बहुत

क्यूं कर ग़मों को सीने से , लगाए बैठे हैं वो

ग़मों को भुलाने, जिन्दगी को मुस्कुराने के , बहाने हैं बहुत

क्यूं कर दिल की पीर को , अपनी धरोहर कर लें

खुशियाँ जताने और मुस्कुराने के , बहाने हैं बहुत

क्यूं कर किसी की चाहत को , ठुकराए कोई

मुहब्बत जताने और निभाने के , बहाने है बहुत

क्यूं कर किसी से दूरियां , बनाते हैं लोग

किसी के करीब आने , सीने से लगाने के , बहाने हैं बहुत

क्यूं कर जिन्दगी को नासूर , बना लेते हैं लोग

पीर दिल की मिटाने और मुस्कराने के , बहाने हैं बहुत

You might also like
Leave A Reply

Your email address will not be published.