विश्व मानवतावादी दिवस मानवता के प्रति समर्पित उन व्यक्तियों और संगठनों का सम्मान करने का दिन है जो दूसरों की सेवा में निस्वार्थ भाव से लगे रहते हैं। इस दिवस पर एक लंबी कविता प्रस्तुत है, जो मानवता, दया, और सेवा के मूल्यों को उजागर करती है:

मानवता की मिसाल
जब मानवता का दीप जले,
अंधकार का हर कोना खिले,
हर हृदय में प्रेम बहे,
हर जीवन को सहारा मिले।
न कोई भूखा सोने पाए,
हर हाथ को सम्मानित काम मिले,
दुख की राह में साथ निभाएँ,
हर पीड़ा कुछ हल्की हो चले।
न जाति रहे, न धर्म की दीवार,
न भाषा बने दूरी का आधार,
समानता, सहिष्णुता का हो विस्तार,
मिलकर रचें एक सुंदर संसार।
दूर कहीं कोई बच्चा रोता,
उसकी हँसी हमारी जिम्मेदारी,
बीमार को मिले हर द्वार दवा,
हर आँसू पाए सहानुभूति हमारी।
संवेदना बने हमारी पहचान,
हर दिल में बसें दया-सम्मान,
आज मानवतावादी दिवस पर,
मानव मूल्यों का हो गुणगान।
सपनों में ही न खो जाएँ हम,
यथार्थ से भी नाता जोड़ें,
अपने कर्मों से परिवर्तन लाएँ,
आशा की लौ हर मन में छोड़ें।
दुख की छाया को दूर भगाएँ,
सेवा और प्रेम का दीप जलाएँ,
हर व्यक्ति बन सकता है नायक,
यदि मानवता को हृदय बसाएँ।
युद्ध और हिंसा से दूरी रखें,
शांति-पथ को अपना धर्म कहें,
सहानुभूति से बदले दुनिया,
हर मन में ममता का वास रहे।
आज का दिन हमें यह सिखाए,
हमारा धर्म सिर्फ मानवता हो,
कदम-कदम पर प्रेम की रोशनी,
पूरा विश्व एक परिवार हो।
नफरत नहीं, हो प्रेम का राज,
हर कोई बने एक-दूजे का हमराज,
विश्व मानवतावादी दिवस पर आज,
मानवता को करें शत-शत प्रणाम।
यह कविता मानवता की शक्ति और महत्व को रेखांकित करती है, और हमें याद दिलाती है कि दया, प्रेम, और सेवा के माध्यम से हम दुनिया को एक बेहतर स्थान बना सकते हैं। विश्व मानवतावादी दिवस के अवसर पर, यह संदेश फैलाना आवश्यक है कि हम सभी के भीतर निहित मानवता की भावना को जागृत करें और अपने समाज में सकारात्मक बदलाव लाएं।





