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प्रेम समर्पण

कविता बहार लेखन प्रतियोगिता २०२१ में मेरी कविता प्रेम जीवन का आधार शीर्षक के लिए है – प्रेम समर्पण

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प्रेम समर्पण

मन मयूरा थिरकता है
संग तेरे प्रियतम
ढूंढता है हर गली
हर मोड़ पर प्रियतम

फूल संग इतराएं कलियां
भौंरे की गुनगुन
मन की वीणा पर बजे बस
तेरी धुन प्रियतम

सज के आया चांद नभ में
तारों की रुनझुन
मै निहारूं चांद में बस
तेरी छवि प्रियतम

क्षितिज में वो लाल सूरज
किरने हैं मद्धम
दूर है कितना वो
कितने पास तुम प्रियतम

बरसे सावन की घटा जब
छा के अम्बर पर
छलकती हैं मेरी अंखियां
तेरे बिन प्रियतम

ताप भीषण हो गया तम
उमड़े काले घन
दाह लगाए बिरहा तेरी
मुझको ओ प्रियतम

उमड़ पहाड़ों से ये नदिया
चली झूम कलकल
तुमसे मिलने के जुनून में
जैसे मैं प्रियतम

पल्लवों पर शबनम, किरने
थिरके झिलमिल कर
मेरे अश्कों में छलकते
तुम मेरे प्रियतम

लीन तपस्या में कोई मुनि
अर्पित करता है तनमन
करूं समर्पण तप सारा
तुम पर मेरे प्रियतम।।

शची श्रीवास्तव