KAVITA BAHAR
SHABDON KA SHRIGAR

सबसे प्यारा मेरा देश

हमारे देश की विशेषता का वर्णन करती ये कविता

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सबसे प्यारा मेरा देश

 

सबसे प्यारा, ‘मेरा देश’

भिन्न-भिन्न, इसके परिवेश |

हमें गर्व, हम भारतवासी,

मथुरा यहीं, यहीं पर काशी |

जन्में कान्हा, राम यहाँ पर,

अद्भुत् चारों धाम यहाँ पर |

सिद्धार्थ यहीं पर, बुद्ध बने,

अनगिनत आचरण, शुद्ध बने |

ऋषियों से, धन्य-धन्य भूमि,

ऋतुओं से, हरित धरा झूमी |

वेद, उपनिषद्, गीता, ध्यान,

यहीं योग का, सम्यक ज्ञान |

भाषाओं से, भंडार भरा,

स्तुति में, मंत्रोच्चार भरा |

नदियों की, निश्छल जलधारा,

है प्रदीप्त, नभ में ध्रुव तारा |

शिव की सदा, साधना होती,

पाथर पूज, प्रार्थना होती |

वीरों की, धीरों की धरती,

पुन्य आत्मा, यहीं उतरती |

थोड़ा कहा, बहुत है शेष,

सबसे प्यारा, ‘मेरा देश’
उमा विश्वकर्मा, कानपुर, उत्तरप्रदेश