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भारतीय स्त्रियों पर कविता

कविता बहार लेखन प्रतियोगिता 2021 में महिला दिवस पर कविता

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भारतीय स्त्रियों पर कविता

स्त्री

कोई व्रत है नहीं औरत के लिए
उपवास नहीं कन्या के लिए,
पत्नी का व्रत है पति के लिए
माँ का उपवास है सुत के लिए।
फिर भी जाने किस मिट्टी से
औरत को बनाया ईश्वर ने,
नए जीव को जन्म भी देती है
लंबी सी उम्र जी लेती है।

सीता

पति की अनुगामिनी बनती है
हर सुख दुख में संग चलती है,
महल हो या वनवास ही हो
हर पथ सहभागिनी बनती है।
पर अग्निपरीक्षा देकर भी
जब परित्यकता बन जाती है,
निज स्वाभिमान की रक्षा में
धरती में समा भी जाती है।

द्रौपदी


मत्स्य चक्षु भेदा जिसने
निज हृदय में उसे बिठाती है,
पर मातृ आज्ञा की खातिर
वह पांच कंत अपनाती है।
ऐसी कुलवधू द्यूत में जब
दांव पर लगाई जाती है,
निज सखा को विनय सुनाकर तब
वो मानिनी लाज बचाती है।

राधा

वो परम प्रेयसी बनती हैं
बंसी बट में यमुना तट पर,
प्रियतम से दूर विरह सहकर
जीवन न्योछावर करती है।

मीरा

भक्ति में जोगन बनती है
प्रेम अनन्य वो करती है,
हंसकर विष भी पी जाती है
मूरत में समाहित होती है।

शबरी

बृहद प्रतीक्षा करती है
अपने गृह प्रभु के आने की,
वो प्रेम से जूठे बेर खिलाकर
परमधाम को पाती है।

उर्मिला

चौदह वर्ष दूर प्रियतम से
महल में वन सी रहती है,
भाई संग भेज प्राणप्रिय को
वह विरह वेदना सहती है।

पन्ना धाय

निज सुत उत्सर्ग वो करती है
राजपुत्र की रक्षा में,
ऐसी बलिदानी थी नारी
यूं राजभक्ति वो निभाती है।

रानी लक्ष्मी बाई

घोड़े पर चढ़ दत्तक सुत बांध
रणचंडी बन जाती है,
राज्य की रक्षा करने को
बलिदानी जान लुटाती है।

सावित्री

पतिव्रत धर्म निभाती है
नित सत्यकर्म अपनाती है,
मृत पति के प्राण को दृढ़ होकर
यमराज से छीन भी लाती है।

सशक्त नारी

नारी की शक्ति न कम आंको
जो ठान ले वो कर जाती है,
भावना के बस कमज़ोर हो वो
बिन मोल के ही बिक जाती है।

चाह

कितने किरदार निभाती है
बदले में किंचित चाह लिए,
कुछ प्यार मिले, सम्मान मिले
थोड़ी परवाह चाहती है।
कोई उसके लिए भी व्रत रखे
यह लेशमात्र भी चाह नहीं,
बस उसके किए की कद्र करे
इतना सा मान चाहती है।।

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1 Comment
  1. प्रियंका श्रीवास्तव says

    बहुत ही शानदार रचनाएँ नारियों पर। उत्तम काव्य सृजन हेतु शची जी को हार्दिक बधाई।