3 जून विश्व साइकिल दिवस पर कविता

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चालान- धनेश्वर पटेल

हिंदी कविता

चालान एक दिन निकले हम सैर परतो हेलमेट लगाना भूल गएहुआ हादसा कुछ ऐसा किफटफटिया चलाना भूल गए!स्पीड बढ़ी कांटा लटका दूसरी छोरहम समझ थे अपने बाप की रोड़बुलेट घुमाई और मुड़े घर की ओरट्रैफिक पुलिस खड़ी थी दूसरी ओरउनकी नजरों ने हमें देखाइन सहमी नजरों ने उन्हें देखादेख भागते जोर की सीटी बजाईपकड़े तो […]

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03 जून विश्व साइकिल दिवस पर दोहे

नारी जीवन और संवेदना

03 जून विश्व साइकिल दिवस पर दोहे पाँवगाड़ी साइकिल साधन एक है,सस्ता और आसान।जिसकी मर्जी वो चले, चल दे सीना तान।। बचपन साथी संग चढ़, बैठे मौज उड़ाय।धक्का दें साथी गिरे त, उसको खूब चिड़ाय।। आगे पीछे बीच में, तीन पीढ़ी बिठाय।हँसते गाते बढ़े चलें, देख लोग हरसाय।। खुद ढोती व बोझ संग, खर्चे भी

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सायकिल दिवस कविता (Poem on World Cycle Day)

हिंदी कविता,

सायकिल दिवस कविता (Poem on World Cycle Day) मनीभाई की कविता अपने बचपन में , की थी जिससे यारी। वो मेरी सायकिल,जिसमें करूँ सवारी । आज बदहाल पड़ा, कहीं किसी कोने में सेवा कर गुजारी, जिसने जिंदगी सारी। ना वो ईंधन लेता, ना फैलायें प्रदूषण । ना दुर्घटना का भय,सुरक्षित हो जीवन। ना कोई झंझट

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