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@श्रावण सोमवार शिव आराधना पर हिंदी कविता

श्रावण सोमवार शिव आराधना

शिव – मनहरण घनाक्षरी

शिव - मनहरण घनाक्षरी उमा कंत शिव भोले, डमरू की तान डोले, भंग संग भस्म धारी, नाग कंठ हार है। शीश जटा चंद्रछवि, लेख रचे ब्रह्म कवि, गंग का विहार शीश, पुण्य प्राण धार है। नील कंठ महादेव, शिव शिवा एकमेव, शुभ्र वेष मृग छाल, शैल ही विहार है। किए काम नाश देह, सृष्टि सार शम्भु नेह, …
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शिव महाकाल पर कविता – बाबू लाल शर्मा

हे नीलकंठ शिव महाकाल भक्ति गीत- हे नीलकंठ शिव महाकाल (१६,१४मात्रिक) हे नीलकंठ शिव महाकाल,भूतनाथ हे अविनाशी!हिमराजा के जामाता शिव,गौरा के मन हिय वासी!देवों के सरदार सदाशिव,राम सिया के हो प्यारे!करो जगत कल्याण महा प्रभु,संकट हरलो जग सारे!सागर मंथन से विष पीकर,बने देव हित विश्वासी!हे नीलकंठ शिव महाकाल,भूतनाथ हे अविनासी!भस्म रमाए शीश चंद्र…
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सावन में भक्ति

सावन की रिमझिम फुहार के बीच संख व डमरू की आवाज मन की जड़ता को हिला देती है। एक नवीन प्रेरणा अन्तर्मन को ऊर्जान्वित करने लगती है। प्रकृति प्रेम सबसे बड़ी ईश्वर सेवा है।
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हे दीन दयालु हे दीनानाथ- मनीभाई नवरत्न

हे दीन दयालु हे दीनानाथहे दीन दयालु, हे दीनानाथ !दीन की रक्षा करलें मांगे वरदान। हे कृपालु ,हे भोलेनाथ! हे कृपालु , हे भोलेनाथ!हीन की रक्षा कर ले मांगे वरदान । ऊंची चोटी पर तेरा वास है ।हर तरफ शांति, उल्लास है। छायी रहे ऐसे सदा, अमन से ये जहान। मांगे वरदान। हे दीन दयालु.... बड़े भरोसे हैं तुझ पे प्रभु। तू ही तन मन में तेरा…
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शिव स्तुति – केंवरा यदु मीरा

शिव स्तुति - केंवरा यदु मीरा चौपाई छंद जय जय जय भोले त्रिपुरारी ।तुमहो भक्तों के दुख हारी।।माथे चंदा सिर पर गंगा ।गल पे सोहे हार भुजंगा।।सँग में सोहे गौरी माता ।तुमहो सबके भाग्य धाता।।कहलाते भोले भंडारी ।तुमहो प्रभु त्रिपदा भय हारी।।भूत प्रेत के तुम हो स्वामी।जगत नियंता अंतर्यामी ।।करते हो तुम बैल सवारी।तीन नेत्र की महिमा भारी।।डमरू धर…
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द्वादश ज्योतिर्लिंग

द्वादश ज्योतिर्लिंग सोमनाथ सौराष्ट्र में ,ज्योतिर्लिंग विराज।सावन पावन मास में, महिमा गाउँ आज।।१।।श्रीशैल पर्वत करें , मल्लिक अर्जुन राज।दर्शन अर्चन से सभी, बनते बिगड़े काज।।२।।महाकाल उज्जैन में,महिमा बड़ी अपार।भक्त सुसज्जित मिल करें,नित नूतन श्रृंगार।।३।।ॐकार ईश्वर अमल ,अमलेश्वर है नाम।शिव पूजन कर लीजिए, शंकर हैं सुखधाम।।४।।वैद्यनाथ…
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शिव स्तुति-रमेश शर्मा

शिव स्तुति- रमेश शर्मा महेश नीलकंठ भूतनाथ आज रीझिए ।त्रिनेत्र चंद्रमौलि विश्व भार धार लीजिए ।नमामि वामदेव रोग दोष दूर कीजिए।कहीं न चूक हो हमें पनाह आप दीजिए।। उमेश हो कृपालु नाव पार तो लगाइये।गिरीश आशुतोष नाथ हार ना दिलाइये।।अनंत सोमनाथ व्याधि भूमि की भगाइये।दयालु विश्वनाथ वंदना न ये भुलाइये।। यजंत वीरभद्र व्योमकेश स्वर्ग द्वार…
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