तू यूं ना थम

तू यूं ना थम
ये तेरी जगह नहीं ,कोई ऊंचा मुकाम तेरे लिए ।।
तू यूं ना थम , ढूंढ ले अपने निशान रे।।

छोटी-छोटी बातों में ,उलझा ना कर ,
नजरे हमेशा मंजिल पर रखा कर ,
बुरी कामना घेर लें तुझे, डाल खुद पे लगाम रे ।।

माना तुझे शोहरत मिले हैं ,
मनचाहा तुझे दौलत मिले हैं ,
यही नहीं सब कुछ, मत बन अनजान रे ।।

दुनिया पर डाले हैं जो हुकूमत,
कर रहे वो इसे खून से लथपथ
दुनिया को जरूरत तेरी , अपनी हिम्मत जान रे।
तू यूं ना थम……

मनीभाई नवरत्न
मनीभाई नवरत्न

📝 कवि परिचय

यह काव्य रचना छत्तीसगढ़ के महासमुंद जिले के बसना ब्लाक क्षेत्र के मनीभाई नवरत्न द्वारा रचित है। अभी आप कई ब्लॉग पर लेखन कर रहे हैं। आप कविता बहार के संस्थापक और संचालक भी है । अभी आप कविता बहार पब्लिकेशन में संपादन और पृष्ठीय साजसज्जा का दायित्व भी निभा रहे हैं । हाइकु मञ्जूषा, हाइकु की सुगंध ,छत्तीसगढ़ सम्पूर्ण दर्शन , चारू चिन्मय चोका आदि पुस्तकों में रचना प्रकाशित हो चुकी हैं।

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