विश्व कैंसर दिवस कविता | संघर्ष और संकल्प | हिंदी अतुकान्त कविता

️ विश्व कैंसर दिवस पर — संघर्ष और संकल्प
(अतुकान्त कविता)
यह सिर्फ़ बीमारी नहीं,
यह धैर्य की परीक्षा है।
यह देह पर हमला नहीं,
यह मन की सीमाओं से
टकराने का नाम है।
कभी रिपोर्ट की पंक्तियाँ
डर बनकर उतरती हैं,
कभी कीमो की थकान
नींद से पहले
हिम्मत को आज़माती है।
पर हर गिरते शरीर के भीतर
एक खड़ा हुआ मन है,
जो कहता है—
“मैं अभी बाकी हूँ।”
माँ की मुस्कान में
दवा से ज़्यादा असर है,
बच्चे की उँगली पकड़कर
दर्द भी
थोड़ा डर जाता है।
आज संघर्ष को
सम्मान देने का दिन है,
और संकल्प को
आवाज़ देने का।
कि कैंसर
अंत नहीं है—
यह लड़ाई है,
और हर लड़ाई
जीती जा सकती है
जब उम्मीद ज़िंदा हो।

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