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वहाँ दीया जलाओ – कविता – मौलिक रचना – अनिल कुमार गुप्ता “अंजुम”

इस कविता में वीरों के बलिदान को प्रमुखता दी गयी है साथ ही जीवन में ऐसे बहुत से स्थान हैं जिन्हें हमें अपने जीवन में विशेष स्थान देना चाहिए |
वहाँ दीया जलाओ – कविता – मौलिक रचना – अनिल कुमार गुप्ता “अंजुम”

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वहाँ दीया जलाओ – कविता – मौलिक रचना – अनिल कुमार गुप्ता “अंजुम”

वहाँ दीया जलाओ
जहां वीरों की समाधि हो

वहाँ पुष्प चढ़ाओ
जहां वीरों की समाधि हो

वहाँ दीया जलाओ
जहां सरस्वती का निवास हो

वहाँ पुष्प चढ़ाओ
जहां सरस्वती का वास हो

वहाँ दीया जलाओ
जहां ज्ञान का प्रसार हो

वहाँ पुष्प चढ़ाओ
जहां शिक्षा की आस हो

वहाँ दीया जलाओ
जहां पीरों का निवास हो

वहाँ पुष्प चढ़ाओ
जहां पीरों का वास हो

वहाँ दीया जलाओ
जहां देवों का निवास हो

वहाँ पुष्प चढ़ाओ
जहां देवताओं का वास हो

वहाँ दीया जलाओ
जहां पुण्य आत्माओं का निवास हो

वहाँ पुष्प चढ़ाओ
जहां पुण्य आत्माओं का वास हो

दीया जला पुष्प चढ़ा
अपने अन्तर्मन को सजा

सुसंस्कारों की माला बन
इस पुण्य धरा को वर

जीवन सुसंस्कृत कर
सत्य मार्ग को तू वर

इस धरा पर पुष्प बन
जीवन संवार ले

खुशबू बन कुछ इस तरह
चारों ओर बहार आ जाए

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