KAVITA BAHAR
SHABDON KA SHRIGAR

यूं तो हर किसी का होता है एक परिवार

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यूं तो हर किसी का होता है एक परिवार

यूं तो हर किसी का होता है एक परिवार ।
पर मेरा परिवार बना है यह सारा संसार ।

कभी उलझी हुई, कभी सुलझी हुई ।
चारों ओर बिछी हुई, लोगों के प्यार ने हमको पाला।


यह जीवन मकड़ी का जाला,
सिरा जिसका हमें ना मिला ।।

कभी खिलती हुई कभी सिमटती  हुई,
खुशबू से महकती हुई, धरती मां ने मुझमे जान डाला।
यह जीवन फूलों की माला,
सिरा जिसका हमें ना मिला ।।

कभी सुलगती हुई, कभी बुझती हुई,
खुशियों से चहकती हुई, दोस्तों का बोलबाला।
यह जीवन ग़मों का निवाला ,
सिरा जिसका हमें ना मिला ।।

यह जीवन मुझे लावारिस का ,
यह जीवन मेरे आंखों की बारिश का।
यह जीवन मेरी गुजारिश का ,
सिरा जिसका हमें ना मिला।।

-मनीभाई नवरत्न

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