October 2019

छत्तीसगढ़ का वैभव -शशिकला कठोलिया

हिंदी कविता

छत्तीसगढ़ का वैभव  कहलाता धान का कटोरा ,है प्रान्त वनाच्छादित ,महानदी ,इंद्रावती, हसदो, शिवनाथ करती सिंचित, छत्तीसगढ़ की गौरवशाली, समृद्ध सांस्कृतिक विरासत, जनजीवन पर दिखता, सामाजिकता व इंसानियत,हुए हैं छत्तीसगढ़ में,बड़े बड़े साहित्यकार,लोचन ,मुकुटधर ,माधव ,गजानन नारायण ,परमार ,प्राचीन काल से है यहां ,धार्मिक गतिविधियों का केंद्र सिरपुर ,डोंगरगढ़ शिवरीनारायण ,है आस्था का केंद्र रतनपुर ,बस्तर में है दर्शनीय स्थल […]

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जब भी सुनता हूँ नाम तेरा- निमाई प्रधान’क्षितिज

हिंदी कविता

जब भी सुनता हूँ नाम तेरा तेरे आने की आहटें… बढ़ा देती हैं धड़कनें मेरी !मैं ठिठक-सा जाता हूँ-जब भी सुनता हूँ नाम तेरा!! तेरे इश्क़ के जादूओं का असर..यूँ रहामेरी रूह बाहर रही,मैं ही तो अंदर रहा ख़ुद से मिलने को अक्सर…मैं बहक-सा जाता हूँ-जब भी सुनता हूँ नाम तेरा!! मरु-थल में भी गुलों की बारिश तेरे

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हाइकु

निर्मल नीर के हाइकु

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निर्मल नीर के हाइकु नूतन वर्ष~चारों तरफ़ छायाहर्ष ही हर्ष काम न दूजा~सबसे पहले होगायों की पूजा है अन्नकूट~कोई न रहे भूखाजाये न छूट भाई की दूज~पवित्र है ये रिश्ताइसको पूज दिवाली आई~घर-घर में देखोखुशियाँ छाई निर्मल ‘नीर’

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नई राह पर कविता- बांकेबिहारी बरबीगहीया

हिंदी कविता

नई राह पर कविता धन को धर्म से अर्जित करनातुम परम आनंद को पाओगे।सुख, समृद्धि ,ऐश्वर्य मिलेगी तुम धर्म ध्वजा फहराओगे।जीवन खुशियों से भरा रहेगायश के भागी बन जाओगे ।अपने धन के शेष भाग कोदान- पुण्य कर देना तुम ।दीन दुखियों की सेवा करकेनिज जीवन धन्य कर लेना तुम। सत्य,धर्म,तप,त्याग तुम करनाहर सुख जीवन भर पाओगे

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मातर तिहार पर कविता-गोकुल राम साहू

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            मातर तिहार पर कविता चलना दीदी चलना भईया,मातर तिहार ला मनाबोन।बड़े फजर ले सुत उठ के,देवी देवता ला जगाबोन।। हुँगूर धूप अगर जलाके,देवी देवता ला मनाबोन।रिक्छिन दाई कंदइल मड़ई संग,मातर भाँठा मा जुरियाबोन।। मोहरी बाजा अउ रऊत संग,नाचत गावत सब जाबोन।मखना कोचई अउ दार चउँर,घरो-घर मा जोहारबोन।। कारी लक्ष्मी

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dipawali-shayari_

कैसी दीवाली / विनोद सिल्ला

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कैसी दीवाली / विनोद सिल्ला कैसी दीवाली किसकी दीवालीजेब भी खाली बैंक भी खाली हर तरफ हुआ है धूंआ-धूंआपर्यावरण भी दूषित है हुआ जीव-जन्तु और पशु-पखेरआतिशी दहशत में हुए ढेर कितनों के ही घर बार जलेनिकला दीवाला हाथ मले अस्थमा रोगी तड़प रहे हैंउन्मादी अमन हड़प रहे हैं नकली मावा, नकली पनीरखाई मिठाई हो कर

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मिल कर दिवाली को मनाएँ हम- प्रवीण त्रिपाठी

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मिल कर दिवाली को मनाएँ हम चलो इस बार फिर मिल कर, दिवाली को मनाएँ हम।* *हमारा देश हो रोशन, दिये घर-घर जलाएँ हम।* *मिटायें सर्व तम जो भी, दिलों में है भरा कब से।* *करें उज्ज्वल विचारों को, खुरच कर कालिमा मन से।* *भरें नव तेल नव बाती, जगे उत्साह तन मन में।* *जतन

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कवयित्री वर्षा जैन “प्रखर” आस का दीपक जलाये रखने की शिक्षा

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आस का दीपक जलाये रखने की शिक्षा दीपावली की पावन बेलामहकी जूही, खिल गई बेलाधनवंतरि की रहे छायानिरोगी रहे हमारी कायारूप चतुर्दशी में निखरे ऐसेतन हो सुंदर मन भी सुधरे महालक्ष्मी की कृपा परस्परहम सब पर हरदम ही बरसेमाँ लक्ष्मी के वरद हस्त नेइतना सक्षम हमें किया हैदिल में सबके प्यार जगाएंअपनी खुशियाँ चलो बाँट

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मन पर कविता -शशिकला कठोलिया

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मन पर कविता रे मेरे मन ,ये तू क्या कर रहा है ,जो तेरा नहीं उसके लिए तू क्यों रो रहा है? दफन कर दे अपने सीने में, अरमानों को ,जो सागर की लहरों की तरह, हिलोरे ले रहा है ,यादों को आंखों में संजोकर रख, जो नदी की धारा की तरह ,बहे जा रहा है ,रे मेरे मन,मत पाल अरमान दिल

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मैं नन्हा दीपक हूँ -डाँ. आदेश कुमार

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मैं नन्हा दीपक हूँ मैं जग का नन्हा दीपक हूँ ।। मैं निर्भय होकर जलता हूँ ।। निपट अकेला कोई होता ।चिंताओ में जब है खोता ।।रक्षक बन जाता हूँ उसका ,मैं अपलक जगता रहता हूँ ।।मैं जग का नन्हा दीपक हूँ ।।मैं निर्भय होकर जलता हूँ ।। होता दो दिल का बंधन जब ।जुड़ना

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स्नेह का दीप पर कविता -डॉ एन के सेठी

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स्नेह का दीप पर कविता जगमग हो जाए हर कोनाहरेक चीज लगे अब सोनाहर दुख का हो जाय शमनभर जाए खुशियों से दामनअंधियारा जग से मिट जाएएक स्नेह का दीप जलाए।।          ???विश्व में शांति का प्रसार होप्रेम और सद्भाव अपार होघर घर दीप करे उजियाराबढ जायआपसी भाईचाराचहुँ और चेतना फैल जाएएक

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त्यौहार पर कविता-तेरस कैवर्त्य ‘आंसू’

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त्यौहार पर कविता आया कार्तिक मास अब, साफ करें घर द्वार।रंग बिरंगे लग रहे, आया है त्यौहार।।१।। गली गली में धूम है , जलती दीप कतार।सभी मनाये साथ में, दीवाली त्यौहार।।२।। श्रद्धा सुमन चढ़ा करें, पूजे लक्ष्मी मान।मेवा घर घर बांटते , नया पहन परिधान।।३।। सुमत सहज ही बांध के, आये जब त्यौहार।महक दहक बहती

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