October 2019

इस दिवाली कुछ ऐसा कर देना -शैलेन्द्र चेलक

हिंदी कविता

इस दिवाली कुछ ऐसा कर देना हे ऐश्वर्य की देवी ! कल्याणकारिणी तुझे प्रणाम !एक निवेदन मेरी सुन लो ,लाया हूं विकट पैगाम , तुझसे कोई अछूता नहीं ,फिर गरीबो को क्यूं छूता नही ,तेरी महिमा अपरंपार ,तेरी चरणों मे समृद्धि भंडार , अमीरों के घरों में बिन बुलाए आती ,गरीबो को भूल जाती ? ध्यान धरा […]

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दीपक हो उदास-माधवी गणवीर

हिंदी कविता

दीपक हो उदास गर दीपक हो उदास तो दीप कैसे जलाऊ……उन्यासी बरस की आजादी काक्या हाल हुआ उनकी बर्बादी का,सत्ता के लुटेरे देखे,बेरोजगारी की बार झेलेभष्ट्राचारी, लाचारी,भुखमरी का,क्या अब राग सुनाऊ…..दीप कैसे जलाऊ।अपने ही करते आएअपनो पर आहत,लाख करू जतन मिलती नही राहतकैसे बचेगा देश विभीषणों की चाल से,बच जायेंगे दुश्मनों से,पर क्या बचेंगे जयचंदो की चाल से।कपटी, बेईमानो,धोखेबाजो

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jai laxmi maata

माँ लक्ष्मी वंदना- डॉ.सुचिता अग्रवाल “सुचिसंदीप”

हिंदी कविता

माँ लक्ष्मी वंदना चाँदी जैसी चमके काया, रूप निराला सोने सा।धन की देवी माँ लक्ष्मी का, ताज चमकता हीरे सा। जिस प्राणी पर कृपा बरसती, वैभव जीवन में पाये।तर जाते जो भजते माँ को, सुख समृद्धि घर पर आये। पावन यह उत्सव दीपों का,करते ध्यान सदा तेरा।धनतेरस से पूजा करके, सब चाहे तेरा डेरा। जगमग

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धनतेरस पर कविता-सुकमोती चौहान रुची

हिंदी कविता

धनतेरस पर कविता सजा धजा बाजार, चहल पहल मची भारीधनतेरस का वार,करें सब खरीद दारी।जगमग होती शाम,दीप दर दर है जलते।लिए पटाखे हाथ,सभी बच्चे खुश लगते।खुशियाँ भर लें जिंदगी,सबको है शुभकामना।रुचि अंतस का तम मिटे,जगे हृदय सद्भावना। ✍ सुकमोती चौहान “रुचि”

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धनतेरस -रामनाथ साहू ” ननकी “

हिंदी कविता

                * धनतेरस * धनतेरस पर कीजिए ,                   धन लक्ष्मी का मान ।पूजित हैं इस दिवस पर ,                     धन्वंतरि भगवान ।।धन्वंतरि भगवान ,         शल्य के जनक चिकित्सक ।महा

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धनतेरस त्यौहार पर कविता-संतोष नेमा “संतोष”

हिंदी कविता

धनतेरस त्यौहार पर कविता धन की वर्षा हो सदा,हो मन में उल्लास तन स्वथ्य हो आपका,खुशियों का हो वास जीवन में लाये सदा,नित नव खुशी अपारधनतेरस के पर्व पर,धन की हो बौछार सुख समृद्धि शांति मिले,फैले कारोबाररोशनी से रहे भरा,धनतेरस त्यौहार झालर दीप प्रज्ज्वलित,रोशन हैं घर द्वारपरिवार में सबके लिए,आये नए उपहार माटी के दीपक

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दीप से दीप जले-श्याम कुँवर भारती

समाज और यथार्थ

दीप से दीप जले  दिल से दिल मिले ,दीप से दीप जले |दिवाली मे हर मुख मुस्कान खिले |हर घर हो रोशनी से जगमग |घर गरीबो हो खुशिया दीप से दीप जले |मिट्टी घर ही नहीं झोपड़ी उजाला रहे |बच्चे जवान रहे मगन दीप से दीप जले |दुश्मनी दुर्दिन दुर्भिक्ष जल खाक हो |सुख शांति

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मिट्टी के दीया पर कविता -कुमार जितेन्द्र

हिंदी कविता

मिट्टी के दीया पर कविता एक दीया मिट्टी का जलाएँ l                                                               दूसरा दीया मन का जलाएँ ll अन्धकार से प्रकाशित करे l       

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रोशनी पर कविता -रूपेश कुमार

विज्ञान, तकनीक और भविष्य

रोशनी पर कविता प्यार का दीपक ज़लाओ इस अंधेरे मे ,रुप का जलवा दिखाओ इस अंधेरे मे ,दिलो का मिलना दिवाली का ये पैगाम ,दुरिया दिल का मीटाओ इस अंधेरे मे ! अजननी है भटक न ज़ाए कही मंजिल ,रास्ता उसको सुझाओ इस अंधेरे मे ,ज़िन्दगी का सफर है मुश्किल इसलिए ,कोई हमसफर हमदम बनाओ

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प्रकाश पर कविता-वर्षा जैन “प्रखर”

हिंदी कविता

प्रकाश पर कविता मन के अंध तिमिर में क्याप्रकाश को उद्दीपन की आवश्यकता है? नहीं!! क्योंकि आत्म ज्योति काप्रकाश ही सारे अंधकार को हर लेगाआवश्यकता है, तो बस अंधकार को जन्म देने वाले कारक को हटाने कीउस मानसिक विकृत कालेपन को हटाने कीजो अंधकार का जनक हैयदि अंधकार ही नहीं होगा तो मन स्वतः ही प्रकाशित रहेगामन प्रकाशित होगा तो वातावरण

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doha sangrah

धनतेरस के दोहे (Dhanteras Dohe)

हिंदी कविता

धनतेरस के दोहे (Dhanteras Dohe) धनतेरस का पुण्य दिन, जग में बड़ा अनूप।रत्न चतुर्दश थे मिले, वैभव के प्रतिरूप।। आज दिवस धनवंतरी, लाए अमृत साथ।रोग विपद को टालते, सर पे जिसके हाथ।। देव दनुज सागर मथे, बना वासुकी डोर।मँदराचल थामे प्रभू, कच्छप बन अति घोर।। प्रगटी माता लक्षमी, सागर मन्थन बाद।धन दौलत की दायनी, करे

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खुशियों के दीप-एल आर सेजु थोब ‘प्रिंस’

हिंदी कविता

खुशियों के दीप असंभावनाओ में संभावना की तलाश करआओ एक नया आयाम स्थापित करें।मिलाकर एक दूसरे के कदम से कदमआओ हम मिलकर खुशियों के दीप जलाये।। निराशाओं के भवंर में डूबी कश्ती में फिर से उमंग व आशा की रोशनी करे ।हताश होकर बैठ गये जो घोर तम मेंउनकी उम्मीदों के दीप प्रज्वलित करें । रूठ

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