कविता का बाजार- आर आर साहू
हिंदी कविताकविता का बाजार अब लगता है लग रहा,कविता का बाजार।और कदाचित हो रहा,इसका भी व्यापार।। मानव में गुण-दोष का,स्वाभाविक है धर्म।लिखने-पढ़ने से अधिक,खुलता है यह मर्म।। हमको करना चाहिए,सच का नित सम्मान।दोष बताकर हित करें,परिमार्जित हो ज्ञान।। कोई भी ऐसा नहीं,नहीं करे जो भूल।किन्तु सुधारे भूल जो,उसका पथ अनुकूल ।। परिभाषित करना कठिन,कविता का संसार।कथ्य,शिल्प […]
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