October 2019

शांति पर कविता -नरेन्द्र कुमार कुलमित्र

हास्य और व्यंग्य, हिंदी कविता

शांति पर कविता  हम कैसे लोग हैंकहते हैं—हमें ये नहीं करना चाहिएऔर वही करते हैंवही करने के लिए सोचते हैंआने वाली हमारी पीढियां भीवही करने के लिए ख़्वाहिशमंद रहती हैजैसे नशाजैसे झूठजैसे अश्लील विचार और सेक्सजैसे ईर्ष्या-द्वेषजैसे युद्ध और हत्याएंऐसे ही और कई-कई वर्जनाओं की चाह हम नकार की संस्कृति में पैदा हुए हैंहमें नकार सीखाया […]

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संयुक्त राष्ट्र पर कविता- दूजराम साहू

विज्ञान, तकनीक और भविष्य

संयुक्त राष्ट्र पर कविता आसमान छूने की है तमन्ना, अंधाधुंध हो रहे अविष्कार! चूक गए तो विनाशकारीसफलता में जीवन उजियार! !  विज्ञान वरदान ही नहीं, अभिशाप भी है, कहीं नेकी करता तो कहीं पाप भी है! उन्नति में लग जाए तोकर दे भव से पार ! चूक गए तो विनाशकारीसफलता में जीवन उजियार ! !  निर्माण के इस पावन युग

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घर वापसी- राजेश पाण्डेय वत्स

हिंदी कविता

घर वापसी नित नित शाम को, सूरज पश्चिम जाता है। श्रम पथ का जातक फिर अपने घर आता है।  भूल जाते हैं बातें थकान और तनाव की ,अपने को जब जबपरिवार के बीच पाता है।  पंछियों की तरह चहकतेघर का हर सदस्य,घर का छत भी तब अम्बर नजर आता है।  कल्प-वृक्ष की ठंडकता भी फीकी सी लगने लगे शीतल पानी का गिलासजब

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वक़्त से मैंने पूछा-नरेन्द्र कुमार कुलमित्र

हिंदी कविता

वक़्त से मैंने पूछा      वक़्त से मैंने पूछाक्या थोड़ी देर तुम रुकोगे ?वक़्त ने मुस्करायाऔरप्रतिप्रश्न करते हुएक्या तुम मेरे साथ चलोगे?आगे बढ़ गया…। वक़्त रुकने के लिए विवश नहीं थाचलना उसकी आदत में रहा है सो वह चला गयातमाम विवशताओं से घिरा मैं चुपचाप बैठा रहावक्त के साथ नहीं चलापरवक्त के जाने के बादउसे हर पल

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दिखा दे अपनी मानवता- शशिकला कठोलिया

हिंदी कविता

दिखा दे अपनी मानवता लेकर कोई नहीं आया ,जीवन की अमरता ,क्षणभंगुर संसार में ,दिखा दे अपनी मानवता । देशकाल जाति पाति की ,दीवारों को तोड़कर ,छुआछूत ऊंच नीच की ,सबी विविधता को हर ,हर इंसान के मन से ,मिता दे विविधता, क्षणभंगुर संसार में ,दिखा दे अपने मानवता । हंसना है तो ऐसे हंसो,हंसे तुम्हारे

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मैं हूं एक लेखनी-शशिकला कठोलिया

विज्ञान, तकनीक और भविष्य

मैं हूं एक लेखनी मैं हूं एक लेखनी ,क्यों मुझे नहीं जानता ,निरादर किया जिसने ,जग में नहीं महानता।जिसने मुझे अपनाया ,हुआ वह बड़ा विद्वान ,जिसने किया आदर ,मिला यश और सम्मान ,मेरे ही द्वारा हुआ ,रचना महाभारत रामायण ,साहित्यो का हुआ विमोचन ,ज्ञान विज्ञान का लेखन ,देश में हुए वृहद कार्य, मेरे ही भरोसे बल

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वर्षा ऋतु पर कविता -हरीश पटेल

प्रकृति और पर्यावरण

वर्षा ऋतु पर कविता आज धरा भी तप्त हुई है।हृदय से शोले निकल पड़े हैं।।कण-कण अब करे पुकार ।आ जाओ वर्षा एक बार।। प्यास अब उमड़ चुकी है ।जिंदगी को बेतरतीब कर विक्षिप्त पड़ा है।।तुम पहली बूंद बन कर आ जाना ।तुम वर्षा हो आकर बरस जाना ।।निर्जीव सदृश यह काया है, रूह बनकर समा

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मन करता है कुछ लिखने को-अमित कुमार दवे

हिंदी कविता

मन करता है कुछ लिखने को जब भी सत्य के समीप होता हूँ, असत्य को व्याप्त देखता हूँ ,शब्द जिह्वा पर ही रुक जाते हैं, मन करता है…..कुछ लिखने को ।। वाणी से गरिमा गिरने लगती है, लज्जा पलकों से हटने लगती है ,विकारी दृष्टि लगने लगती है, तब..मन करता है…..कुछ लिखने को ।। अंधानुकरण को स्वतःअपनाती,नई पीढ़ी

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Jai Sri Ram kavitabahar

चित चोर राम पर कविता / रश्मि

नारी जीवन और संवेदना

चित चोर राम पर कविता / रश्मि चित चोर कहो , न कुछ और कहो। मर्यादा पूरूषोत्तम है । हे सखी !सभी जो मन भायेवो मनभावन अवध किशोर कहो। चित चोर…….. है हाथ धनुष मुखचंद्र छटा, लेने आये सिय हाथ यहां। तारा अहिल्या  को जिसने हे सखि उन चरणों कोमुक्ति का अंतिम छोर कहो। चित चोर…… बाधें न बधें वो बंधन है। देखो वो

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आत्महंता का अधिकार -आर आर साहू

हिंदी कविता

आत्महंता का अधिकार जहाँ सत्य भाषण से पड़ जाता संकट में जीवन।वहाँ कठिन है कह पाना कवि की कविता का दर्शन।। गुरु सत्ता पे शासन की सत्ता जब होती हावी।वहाँ जीत जाता अधर्म,धर्म की हानि अवश्यंभावी।। जो दरिद्र है,वही द्रोण की समझ सकेगा पीड़ा।मजबूरी पर क्रूर नियति की व्यंग्यबाण की क्रीड़ा।। राजा हो धृतराष्ट्र,चेतना गांधारी

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आर आर साहू-भावभरे दोहे

नारी जीवन और संवेदना

भावभरे दोहे प्रकृति प्रदत्त शरीर में,नर-नारी का द्वैत।प्रेमावस्था में सदा,है अस्तित्व अद्वैत।। पावन व्रत करते नहीं,कभी किसी को बाध्य।व्रत में आराधक वही, और वही आराध्य ।। परम्पराएँ भी वहाँ,हो जाती निष्प्राण।जहाँ कैद बाजार में,हैं रिश्तों के प्राण।। एक हृदय से साँस ले, प्रियतम-प्रिया पवित्र।श्रद्धा से विश्वास का,दिव्य सुगंधित इत्र।। भाव सोच अवधारणा,होते शब्द प्रतीक।देश काल

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मानवता पर कविता -भुवन बिष्ट

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      मानवता पर कविता पावन मानवता का संगम,           हो नव आशाओं का संचार। नई सोच व नई उमंग से,             मानवता की हो जयकार।।  प्रभु नित नित वंदन करूँ जयकार।।……   प्रेम भाव का दीप जले,              हो हर मन में उजियारा। सारे जग

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