KAVITA BAHAR
SHABDON KA SHRIGAR
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अक्टूबर 2019

चलो फिर आज खुश होकर, दिवाली को मनाएँ हम-प्रवीण त्रिपाठी जी की…

दीपावली विशेष कविताचलो इस बार फिर मिल कर, दिवाली को मनाएँ हम।हमारा देश हो रोशन, दिये घर-घर जलाएँ हम।मिटायें सर्व तम जो भी, दिलों में है भरा कब से।करें…

छत्तीसगढ़ का वैभव का गुणगान करती हुई कवयित्री शशिकला कठोलिया…

छत्तीसगढ़ का वैभव कहलाता धान का कटोरा ,है प्रान्त वनाच्छादित ,महानदी ,इंद्रावती, हसदो, शिवनाथ करती सिंचित, छत्तीसगढ़ की गौरवशाली, समृद्ध सांस्कृतिक…

जब भी सुनता हूँ नाम तेरा- निमाई प्रधान’क्षितिज’ का…

कविता/निमाई प्रधान'क्षितिज'*"जब भी सुनता हूँ नाम तेरा!"*------------------- तेरे आने की आहटें... बढ़ा देती हैं धड़कनें मेरी !मैं ठिठक-सा जाता…

हरिश्चंद्र त्रिपाठी ‘हरीश ‘ के द्वारा रचित पैसों…

पढ़ लिख कर हम योग्य बन, करें कमाई नेक,अपनों से ऊपर उठ सोचें,परहित धर्म अनेक। 1।जितनी होती दक्षता, उतना मिलता लाभ, नहीं मिले अतिरिक्त कुछ, मीत…

निर्मल नीर के हाइकु(Nirmal Nir ke Haiku)

हाइकु ******************नूतन वर्ष~चारों तरफ़ छायाहर्ष ही हर्षकाम न दूजा~सबसे पहले होगायों की पूजाहै अन्नकूट~कोई न रहे भूखाजाये न छूटभाई की…

बाबूलालशर्मा द्वारा रचित भाई दूज पर विशेष कविता ( कुण्डलिया…

           ??‍♀ *भाई दूज* ??‍♀              ( कुण्डलिया छंद ).                      चलती रीति सनातनी, पलती प्रीत विशेष!भाई बहिना दोज पर, रीत …

धर्म से धन को अर्जित करने की शिक्षा देती बांकेबिहारी बरबीगहीया…

धन को धर्म से अर्जित करनातुम परम आनंद को पाओगे।सुख, समृद्धि ,ऐश्वर्य मिलेगी तुम धर्म ध्वजा फहराओगे।जीवन खुशियों से भरा रहेगायश के भागी बन जाओगे…

विश्व बचत दिवस: मितव्ययता का महत्व बताती वर्षा जैन…

*विश्व बचत दिवस* **********************खुशियाँ मोहताज नहीं पैसों कीयह तो सत्य है मेरे भाई। फिर भी मुस्कान नहीं होठों परजब तक हाथ में ना हो पाई। …

भाईदूज विशेष: एक सैनिक की भाई दूज जब वह बहन के पास नहीं आ पाता…

 *भाई दूज*  मैं डटा हूँ सीमा परबनकर पहरेदार कैसे आऊँ प्यारी बहनामनाने त्यौहार याद आ रहा है बचपनपरिवार का अपनापनदीपों का वो उत्सव मनाते थे शानदार …

कवयित्री विजिया गुप्ता समिधा अपने ख्वाहिशों को कविता के माध्यम…

बस यही ख्वाहिश है मेरी इक कली की उम्र पाऊँ,फिर चमन में खिलखिलाऊँ,किसी भ्रमर का प्यार पाऊँ,तितलियों को भी लुभाऊँ,माली का भी हित निभाऊं,मुरझा कर…