October 2019

mahatma gandhi

नायक श्री गांधी की जय

हिंदी कविता

नायक श्री गांधी की जय स्वतंत्रता  के   वीर   सिपाही,नायक  श्री  गांधी  की  जय।अनुकरणीय  कृत्य उन्नायक,जय-जय गांधी,भव्य विजय। पूज्य   प्रेरणास्रोत  महात्मा,तुम्हें  याद   हम    करते  हैं।दिव्य-मार्ग  दे दिया निराला,चलकर   पार    उतरते   हैं।सुदृढ़ जिन्दगी जीकर तुमने,स्वर्णिम   राह    दिखाई   है,‘रघुपति राघव’ गाते  है  हम,उच्च-शिखर  पर  चढ़ते  हैं। नय के पालक मोहन-गांधी,आप  कर  गये   दूर अनय। वर्ष  अठारह  सौ  उनहत्तर,दो   […]

नायक श्री गांधी की जय Read More »

मोहन सबका प्यारा है

हिंदी कविता

मोहन सबका प्यारा है               (1)पुतलीबाई ने जन्म दिया ,करमचंद ने पाला था ।सीधा-साधा,भोला-भाला,मोहन सबका प्यारा था।            (2)बिन हथियार लड़े थे ओ,सत्य अहिंसा के पुजारी ।सरल स्वाभाव के धनी ओ,जिसे  दुनिया माने सारी।।            (3)सच्चाई को जिसने चुना,प्रेम को जो

मोहन सबका प्यारा है Read More »

मेरे आंगन में – दिनेश चंद्र प्रसाद “दीनेश”

हिंदी कविता

“मेरे आंगन में “ होठ तेरे जैसे,  दो कुसुम खिले;यौवन के कानन में ।आंखें तेरी जैसी, दो झील हैं गहरी;रूप के मधुबन में ।गाल हैं तेरे चिकने जैसे,दो नव किसलय;       निकले उपवन में।बिंदिया की चमक है जैसे, इंदु हँसे;नील गगन में।केश तेरे लहराए जैसे, घनघोर घटाएं;झूम के आये सावन में।दुल्हन बनकर बोलो,   कब आयेगी तू  मेरे

मेरे आंगन में – दिनेश चंद्र प्रसाद “दीनेश” Read More »

बाल कविता – स्लेट बत्ती

हिंदी कविता

बाल कविता – स्लेट बत्ती स्लेट बत्ती का  जानो मोललकीर बना लो या फिर गोल क ख ग घ लिखना हो या गिनतीपढ़ने को सब करते विनती बत्ती को घिस घिस कर देखेंटूटे जब जब उसको फेंके पानी को हाथों में लेतेगलत लिखते ही मिटा देते स्लेट बत्ती से हो शुरुवातलिखते पढ़ते रहें दिन रात

बाल कविता – स्लेट बत्ती Read More »

दोहे – जगदम्बा महिमा

हिंदी कविता

दुर्गा या आदिशक्ति हिन्दुओं की प्रमुख देवी मानी जाती हैं जिन्हें माता, देवी, शक्ति, आध्या शक्ति, भगवती, माता रानी, जगत जननी जग्दम्बा, परमेश्वरी, परम सनातनी देवी आदि नामों से भी जाना जाता हैं।]शाक्त सम्प्रदाय की वह मुख्य देवी हैं। दुर्गा को आदि शक्ति, परम भगवती परब्रह्म बताया गया है। दोहे “जगदम्बा महिमा” नवराते हैं चल रहे, करें मात का ध्यान।सबका बेड़ा पार हो,

दोहे – जगदम्बा महिमा Read More »

मेला पर दोहे -नवीन कुमार तिवारी

नारी जीवन और संवेदना

मेला पर दोहे मेला देखो घूमके,कितना रहता भीड़ । मानस रहते झूमते ,किसका कैसा नीड़ ।।1 खुले हाट बाजार में , बेच रहे सामान । साज बजे भोंपू सुने , बैठ  कहे श्रीमान ।।2 जमघट देखे  भागते ,उड़ने लगे गुबार । मीठा खारा खा रहे , मिलता खोया प्यार  ।।3 मेला ठेला घूमते , कटता

मेला पर दोहे -नवीन कुमार तिवारी Read More »

तेरा आशिर्वाद रहे सदा माँ हमारी कलम पर-डा.नीलम

हिंदी कविता

तेरा आशिर्वाद रहे सदा माँ हमारी कलम पर लेकर बैठी कलम हाथ मेंलिखने मैया के गुणगानअद्भुत लीला तेरी मैयाकलम है मेरी नादान अपरुपा,अनुपम ,अलौकिकदिव्य स्वरुपा,दिव्यज्योत्सनाज्योतिर्मयी ,अक्षमाल्य,कमण्डलम धारिणी ब्रह्मचारिणी,तपश्चारिणीसाक्षात ब्रह्म स्वरुपातप की साक्षात मूर्तिमयीजगत् जननी,जग पालिका त्याग,वैराग्य,संयम,सदाचारदायिनीसर्व सिद्धि दात्रि,विजयम ददातिसर्वमंगलम्,सुमंगलम दायिनी निर्जला,निराहार तपकारणेशाक- पात  आहर्य कारणेअपर्णा नाम धारिणीकठोर तप के कारणे कांतिऔर तेज का संगम से

तेरा आशिर्वाद रहे सदा माँ हमारी कलम पर-डा.नीलम Read More »

jai durga maa

विंध्यवासिनी विनाश दुःख का करो -दुर्गा शंकर इजारदार

हिंदी कविता

विंध्यवासिनी विनाश दुःख का करो अजेय विंध्यवासिनी विनाश दुःख का करो ,त्रिशूल धारिणी सहाय प्राण शत्रु का हरो ।। सभी सुखी रहें यहाँ जवान हो कि वृद्ध हो ,सदैव काम क्रोध लोभ से विचार शुद्ध हो ।। विदेश देश हो सदा गुँजायमान भारती ,सभी जमात एक हो करें सुजान आरती ।। मरें नहीं अकाल मौत

विंध्यवासिनी विनाश दुःख का करो -दुर्गा शंकर इजारदार Read More »

ज्योति पर्व नवरात पर दोहे -आर आर साहू

हिंदी कविता

ज्योति पर्व नवरात पर दोहे जगमग-जगमग जोत से,ज्योतित है दरबार।धरती से अंबर तलक,मां की जय-जयकार।। मनोकामना साथ ले,खाली झोली हाथ।माँ के दर पे टेकते,कितने याचक माथ।। धन-दौलत संतान सुख,पद-प्रभुता की चाह।माता जी से मांगकर,लौटें अपनी राह।। छप्पन भोगों का चढ़ा माँ को महाप्रसाद।इच्छाओं के बोझ को मन में राखा लाद।। घी का दीपक मैं जला,करने

ज्योति पर्व नवरात पर दोहे -आर आर साहू Read More »

Scroll to Top