October 2019

रावण दहन करो

नारी जीवन और संवेदना

रावण दहन करो भीतर के रावण का दमन करो,फिर तुम रावण का दहन करो।पहले राम राज्य का गठन करोफिर तुम रावण का दहन करो। चला लेना तुम बाण को बेशक़,जला देना निष्प्राण को बेशक़।बचा लेना तू विधान को बेशक़,पहले राम का अनुशरण करो।फिर तुम….. पहले राम बनकर दिखलाओ,सबको तुम इंसाफ़ दिलवाओ।पुरुषों में तुम उत्तम कहलाओ,राम […]

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दर्द के जज़्बात

विरह और दर्द, हिंदी कविता

दर्द के जज़्बात अवाम दिखाती दर्द के जज़्बात, पर हुकूमत क्या समझे ? कही अनकही बात, लोगों का पैसा तो नहीं खैरात! आखिर इन गै़रकानूनी से कब मिलेगी निजात? ग़ुरूर करवा देगीएक दिन इंकलाब से मुलाक़ात, जब करे हुकूमत ही जारी करेगीमनचाहे मनचले फरमान। आम आदमी काना हो नुकसान। ग़लत फैसलों से ना करे परेशान,हुक्मरान न लें सब्र का इम्तिहान ।। -राजशेखरकविता बहार से जुड़ने

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ग़ज़ल – रात भर बैठ कर

हिंदी कविता

ग़ज़ल – रात भर बैठ कर घात काटी गई रात भर बैठ कर ।याद काटी गई रात भर बैठ कर ।। इश्क पर बंदिशें साल दर साल की। म्यांद काटी गई रात भर बैठ कर ।। हिज्र की रात में, आपकी याद में। रात काटी गई रात भर बैठ कर ।। बोलना था हमें बोलना था तुम्हें। बात

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तुम नहीं होती तब – नरेन्द्र कुमार कुलमित्र

हिंदी कविता

तुम नहीं होती तब चादर के सलवटों मेंबेतरतीब बिखरे कपड़ों मेंउलटे पड़े जूतों मेंकेले और मूंगफली के छिलकों मेंलिखे,अधलिखे और अलिखे मुड़े-तुड़े कागज़ के टुकडों में खुद बिखरा-बिखरा-सा पड़ा होता हूँ मेरे सिरहाने के इर्द-गिर्दएक के बाद एक डायरी,दैनिक अख़बारों,पत्रिकाओं,कविताओं, गजलोंऔर कहानियों की कई पुस्तकेंइकट्ठी हो होकरढेर बन जाती हैं अनगिनत भाव और विचारएक साथ उपजते रहते हैंचिंतन की

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दशहरा पर कविता-शैलेन्द्र कुमार चेलक

हिंदी कविता

किसी भी राष्ट्र के सर्वतोमुखी विकास के लिए विद्या और शक्ति दोनों देवियों की आराधना और उपासना आवश्यक है। जिस प्रकार विद्या की देवी सरस्वती है, उसी प्रकार शक्ति की देवी दुर्गा है। विजया दशमी दुर्गा देवी की आराधना का पर्व है, जो शक्ति और साहस प्रदान करती है। यह पर्व आश्विन मास के शुक्ल

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Jai Sri Ram kavitabahar

रावण दहन पर कविता

हिंदी कविता

दशहरा (विजयादशमी व आयुध-पूजा) हिन्दुओं का एक प्रमुख त्योहार है। अश्विन (क्वार) मास के शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि को इसका आयोजन होता है। भगवान राम ने इसी दिन रावण का वध किया था तथा देवी दुर्गा ने नौ रात्रि एवं दस दिन के युद्ध के उपरान्त महिषासुर पर विजय प्राप्त की थी। इसे असत्य पर सत्य की विजय के रूप में मनाया जाता है। इसीलिये इस दशमी को ‘विजयादशमी’ के नाम से जाना जाता है  रावण दहन पर कविता हम रावण को आज जलाने

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doha sangrah

आर आर साहू के दोहे

हिंदी कविता

आर आर साहू के दोहे कहाँ ढूँढता बावरे,तू ईश्वर को रोज।करनी पहले चाहिए,तुमको अपनी   खोज।। शब्द मात्र संकेत हैं,समझ,सत्य की ओर।सूर्य- चित्र से कब कहाँ,देखा होता भोर।। बस प्रतीक को मानकर,हुई साधना बंद।माया से मिलता रहा,सपने का आनंद।। किसका दर्शन,किसलिए,चला भीड़ के संग।चाह-राह बेमेल है,ये कैसा है ढंग।। मंदिर में घंटी बजे,मन के छिड़े न

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अमित की कुण्डलियाँ

हिंदी कविता

अमित की कुण्डलियाँ माता भव भयहारिणी, करिये हिय भयहीन।*जगजननी जगदंबिका, जीवन कृपा अधीन।जीवन कृपा अधीन, मातु सुत तुम्हीं सम्हारो।विनती बारंबार, व्यथा से हमें उबारो।कहे ‘अमित’ कविराज, आप ही सुख-दुख दाता।सुनिये करुण पुकार, आज ओ मेरी माता। भव्य भवानी भाविनी, भवपाली हैं आप।संकट विकट उबारिए, हरिए मन अभिताप।हरिए मन अभिताप, अगोचर अज अविनाशी।दें वैभव वरदान, सिद्धि

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jai durga maa

माँ दुर्गा पिरामिड कविता

हिंदी कविता

दुर्गा या आदिशक्ति हिन्दुओं की प्रमुख देवी मानी जाती हैं जिन्हें माता, देवी, शक्ति, आध्या शक्ति, भगवती, माता रानी, जगत जननी जग्दम्बा, परमेश्वरी, परम सनातनी देवी आदि नामों से भी जाना जाता हैं।शाक्त सम्प्रदाय की वह मुख्य देवी हैं। दुर्गा को आदि शक्ति, परम भगवती परब्रह्म बताया गया है। माँ दुर्गा पिरामिड कविता माँ!रूपामोहिनीवर दात्रीअरि मर्दनीसंकट हरणीजय जगजननी ।माँनेहउदधिआल्हादिनीसर्वव्यापिनीमंगल करणीसर्व  दुख हरणी ।माँसृष्टाब्रम्हाण्डअतुलितत्रिगुण

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चंद्रघंटा माता पर कविता

हिंदी कविता

दुर्गा या आदिशक्ति हिन्दुओं की प्रमुख देवी मानी जाती हैं जिन्हें माता, देवी, शक्ति, आध्या शक्ति, भगवती, माता रानी, जगत जननी जग्दम्बा, परमेश्वरी, परम सनातनी देवी आदि नामों से भी जाना जाता हैं शाक्त सम्प्रदाय की वह मुख्य देवी हैं। दुर्गा को आदि शक्ति, परम भगवती परब्रह्म बताया गया है। चंद्रघंटा माता पर कविता        चंद्रघंटा देवी माता       सौम्य

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सुनो राधिके- डा.नीलम

नारी जीवन और संवेदना

सुनो राधिके सुनो राधिकेहर बार तुम्ही प्रश्न चिह्न बनीसम्मुख मेरे खडी़ रहींहर बार ही मैंनेतुमको हल करने काप्रयत्न कियापर…….राधिके तूने कब कबमुझको समझाजब भी मैने रास कियाहर गोपी मेंतुझको ही देखाबांसुरी की हर साँस मेंतेरी ही धड़कन जानीकालिंदी कीअल्हड़ लहरेमुझको तेरी अंगडा़ई लगेकदंब तने सेजब जब लिपटातुझसे ही लिपटा जैसेहर पात पात मेंतुझको देखाहर स्वास में

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लाली लाली चुड़ी माँ के-प्रिया देवांगन “प्रियू”

हिंदी कविता

दुर्गा या आदिशक्ति हिन्दुओं की प्रमुख देवी मानी जाती हैं जिन्हें माता, देवी, शक्ति, आध्या शक्ति, भगवती, माता रानी, जगत जननी जग्दम्बा, परमेश्वरी, परम सनातनी देवी आदि नामों से भी जाना जाता हैं।शाक्त सम्प्रदाय की वह मुख्य देवी हैं। दुर्गा को आदि शक्ति, परम भगवती परब्रह्म बताया गया है। लाली लाली चुड़ी माँ के लाली लाली चूड़ी माँ के , लाली बिंदी लगाये

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