गांँधीजी का ज्ञान
हिंदी कविताराष्ट्रपिता महात्मा गाँधी जी का वर्णन कविता के माध्यम से किया गया है।
नमन आपको बापू नमन हैैं बारम्बार नमन आपको बापू, नमन हैैं बारम्बार।सविनय अवज्ञा आंदोलन चलाया, अत्याचार के आप प्रतिकार।। खादी को किया था आपने प्यार, स्वदेशी अपनाया।सत्य, अहिंसा के हथियार से गौरों को खूब छकाया।।आजादी के परवाने थे,सत्याग्रह के आप रहे प्रतीक।नमक छोडो आंदोलन की भी चले आप लीक।। साबरमती आश्रम में जीवन गुजारा,पोरबंदर के पूत ।सादा
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पाती एक लिखी है बापू के नाम पाती एक लिखी है, हमने प्यारे बापू के नाम।सभांल के रखना इस देश को अब हमारा काम। सत्य अहिंसा की ज्वाला जो दिल में जलाई है।बुझने न दी हमने लौ को, आंधी तो खूब आई है।भेदभाव कभी न रखेंगे, कभी न करेंगे क्रोध।तेरे आदर्शों पर चलेंगे, न करेंगे
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दोहा मुक्तक-बापू पर कविता सदी वही उन्नीसवीं, उनहत्तर वीं साल।जन्मे मोहन दास जी, कर्म चंद के लाल।बढ़े पले गुजरात में, पढ़ लिख हुए जवान।अरु पत्नी कस्तूरबा, जीवन संगी ढाल। भारत ने जब ली पहन, गुलामियत जंजीर।थी अंग्रेज़ी क्रूरता, मरे वतन के वीर।हाल हुए बेहाल जब, कुचले जन आक्रोश।देख दशा व्याकुल हुए, गाँधी जी मति धीर।
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देख रहे हो बापूजी देख रहे हो बापूजी,कैसा है आपके सपनों का भारत।निज स्वार्थ सिद्ध करने हेतु,जन-जन ने प्राप्त कर ली है महारत। देख रहे हो बापूजी,गांवों की हालत आपसे क्या कहें।इतना विकास हुआ ग्राम्य अंचल का,कि अब गांव, गांव ना रहे। देख रहे हो बापूजी,आपकी खादी कितना बदनाम हो गई।गांधीगिरी का दामन छोड़कर,अब नेतागिरी
भारत राष्ट्रपिता कहलाये धन्य सादा जीवन उच्च विचार अपनाये मानवतावादी।भारत राष्ट्रपिता कहलाये धन्य महात्मा गाँधी। २ अक्टुबर सन् १८६९ समय रहा सुखदाई।गुजरात के पोरबन्दर में जन्म आपने पाई।पिता कर्मचन्द्र गाँधी थे माता पुतली बाई।मोहनदास कर्मचन्द्रगाँधी पुरा नाम कहलाई। जीवन साथी डोर कस्तुरबा गाँधी के संग बांधी।भारत राष्ट्रपिता कहलाये धन्य महात्मा गाँधी। सत्यअहिंसा पाठ पढा़कर जन
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बापू जी का ज्ञान देश के लिए जिन्होंने दिए हैं,अमूल्य योगदान,इसलिए हिन्दुस्तान को मिला है,अलग पहचान।भारतीयों को सत्य-अहिंसा,का पाठ-पढ़ाए,हिन्दुस्तान का संपूर्ण,संसार में मान बढ़ाए।हिंद के लिए,अपना सर्वस्व कर दिए कुर्बान,हिन्दुस्तान की पहचान,गांधी जी का ज्ञान। महात्मागांधी जी दया,अहिंसा,प्रेम के थे समंदर,2 अक्टूबर1869 को जन्मे,स्थान था पोरबंदर।परिवार में सदाचार-व्यवहार का डोर बांधी,बापू जी के पिताजी थे,श्री
अहिंसा दिवस पर कविता: अंतर्राष्ट्रीय अंहिसा दिवस महात्मा गांधी के जन्मदिन पर 2 अक्टूबर को मनाया जाता है। इसे भारत में गांधी जयंती के रूप में मनाया जाता है। अहिंसा दिवस पर कविता साबरमती के संत तुझे लाख बार प्रणाम है साबरमती के संत तुझे, लाख बार प्रणाम हैअहिंसा के पुजारी तुझे,लाख बार प्रणाम हैस्वतन्त्रा की राह हो या, सत्यता की
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प्रस्तुत कविता महात्मा गांधी :स्वतंत्रता और स्वच्छता के जन नायक को आधार में रखकर लिखी गई है
महात्मा गांधी पर कविता – ज्योति अग्रवाला Read More »
महात्मा गांधी जी पर कविता निडरता थी शान उनकी, निडरता थी पहचान ।ब्रम्हचर्य का जीवन जीयो ,करना है सम्मान ।। सत्य बोलना ,चोरी न करना, यही है उनका मान। एकता ही है नाम उनका, एकता ही है पहचान ।। अहिंसा के पथ पर चलें, और लड़े अंग्रेजो से।देश की आजादी के लिए, न डरे किसी
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“बापू” ( राष्ट्रपिता महात्मा गाँधी पर कविता ) सत्य अहिंसा के तुम ही पहरेदार हो बापू,आजादी दिलाने वाले बड़े सरदार हो बापू। हर बच्चा तुम्हें दिन रात याद करता है,हर इंसा तुम्हारा ही गुणगान करता है।सच्ची श्रद्धा से ही मिलती है सफलता,हर इस कामयाबी का बखान करता है।आजादी दिलाने के सही हकदार हो बापू। देश
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बापूजी पर दोहे -बाबू लाल शर्मा भारत ने थी ली पहन, गुलामियत जंजीर।थी अंग्रेज़ी क्रूरता, मरे वतन के वीर।। काले पानी की सजा, फाँसी हाँसी खेल।गोली गाली साथ ही , भर देते थे जेल।। याद करे जब देश वह, जलियाँवाला बाग।कायर डायर क्रूर ने, खेला खूनी फाग।। मोहन, मोहन दास बन, मानो जन्मे देश।पढ़लिख बने
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