राज दरबारी पर कविता
हिंदी कविताराज दरबारी वो हैं बड़े लेखकनवाजा जाता है उन्हेंखिताबों सेदी जाती हैसरकार द्वारा सुविधाएंनाना प्रकार कीबदले मेंमिलाते हैं वे कदम-तालसरकार सेकर रहे हैं निर्वहनराज-दरबारियों कीपरम्परा काउनकी लेखनी नेमोड़ लिया मुंहआमजन की वेदना सेहो गए बेमुख संवेदना सेचंद राजकीयरियायतों के लिए -विनोद सिल्ला©
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