समय और जीवन दर्शन

मुक्त समय का मिथक

समय और जीवन दर्शन

मुक्त समय का मिथक जीवन कोखालीपन नहीं चाहिए,उद्देश्य चाहिए,आग चाहिए। समय को बरबाद करने कासबसे आसान तरीका है—छोटी-छोटी बातों मेंमन को उलझाए रखना,सोचना,घिसटना,और वहीं फँसे रहना। जीवन ही समय है।हर क्षणअमूल्य है। हम जन्म लेते हैंशारीरिक प्रवृत्तियों की बेड़ियों में,और बड़े होते-होतेसमाज सेऔर भी जंजीरें जमा कर लेते हैं। जीवन का अर्थ है—सीख को भी

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समय नहीं उड़ता, तुम बह जाते हो

समय और जीवन दर्शन, हिंदी कविता

समय नहीं उड़ता, तुम बह जाते हो समयकहीं भागता नहीं।वहतुम्हारे पीछे-पीछेचलता है। जैसा तुम मूल्य देते हो,वैसा हीसमय बँटता है। हर क्षणतुम स्वयं तय करते हो—ध्यान कहाँ जाएगा,ऊर्जा किसे मिलेगी,जीवन किस दिशा मेंढलेगा। भटकाव,कर्तव्य,इच्छाएँ—सबतुम्हारी प्राथमिकताओं केअनुवाद हैं। समयकोई रहस्य नहीं।वहएक दर्पण है—जो दिखाता हैकि तुम्हारे भीतरवास्तव मेंमहत्त्वपूर्ण क्या है। इसलिए जब तुम कहते हो—“पता ही

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एक दिन में अनंत समय है

समय और जीवन दर्शन, हिंदी कविता

एक दिन में अनंत समय है जो जानता हैकि घड़ी चल रही है,वहक्षण कोखाली लौटने नहीं देता। जीवन का सम्मानसमय के सम्मान सेशुरू होता है। तुम कहते हो—एक दिन मेंसिर्फ़ चौबीस घंटे होते हैं। पर यहसिर्फ़तुम्हारी परिभाषा है। ज़रा रुको।गिनती बदलो। एक दिन मेंकितने मिनट होते हैं?देखो—समयअचानकफैलने लगा। अबसेकंड गिनो।समयऔर फैल गया। और एक सेकंड?उसमेंअरबों

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“प्रेम आत्मा का प्रतिबिंब है”

समय और जीवन दर्शन, हिंदी कविता

“प्रेम आत्मा का प्रतिबिंब है” तुम कहते हो—मैं यह हूँ,मैं वह हूँ। पर हर वाक्य से पहलेएक शब्दखड़ा रहता है—मैं। नाम बदलते रहते हैं,पद बदलते रहते हैं,पर यह मैंवहीं रहता है। यहीस्वयं है। जीवन की गुणवत्ताघरों, रिश्तों,सुविधाओं से नहीं—इस मैं कीस्वच्छता से तय होती है। अगर स्वयं साफ़ है,तोसंबंध सहज होते हैं। अगर स्वयं उलझा

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कल्पना से परे प्रेम

समय और जीवन दर्शन, हिंदी कविता

कल्पना से परे प्रेम प्रेमकिसी को पकड़ने का नाम नहीं,प्रेम हैपकड़ने की जरूरत सेमुक्त हो जाना। जब सारी उम्मीदेंटूटकर गिर जाती हैं,जब यह साफ दिखने लगता हैकिअचेत मनुष्यों के बीचप्रेम संभव ही नहीं—तभीप्रेम की पहली संभावनाजन्म लेती है। यह समझ आना किजिसे हम प्रेम कहते रहे,वह प्रेम था ही नहीं—यहीजागरण की शुरुआत है। बहुत समय

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सच्चा प्रेम कभी संयोग नहीं होता

समय और जीवन दर्शन, हिंदी कविता

सच्चा प्रेम कभी संयोग नहीं होता संस्कारों में जकड़ामनप्रेम कोजान ही नहीं सकता। “मैं तुम्हेंहमेशा प्रेम करूँगा”—अक्सरइसका अर्थ होता है:जब तकतुम मुझेसुख देते रहो। जिसेहम प्रेम कहते हैं,वहअक्सरशर्तों कागठ्ठर होता है—औरवहउसी समय तकज़िंदा रहता हैजब तकपरिस्थितियाँअनुकूल रहती हैं। सुनकरचुभता है न? सदियों सेतारे गवाह रहे हैं—हाथों में हाथ,आँखों में सपने,आवाज़,शरीर,रंग,आकृति सेमोहितलोगों नेअनंतता कीकसम खाई। औरफिरइतना

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अरस्तू

अरस्तू : ज्ञान का आकाश – मनीभाई नवरत्न

समय और जीवन दर्शन

अरस्तू : ज्ञान का आकाश — एक प्रेरक, दीर्घ, मौलिक कविता स्टैगिरा की मिट्टी मेंएक बालक जन्मा—शांत-सा, जिज्ञासु-सा,पर दृष्टि में छिपी थीविचारों की बिजली। उसके पिताराजदरबार के वैद्य थे,इसलिए राजमहलों की छायाउसके बचपन पर पड़ी,पर उस बालक का मनवैभव में नहीं,विचारों की खोज में रम गया। अरस्तू—जिसका नामआज भी ज्ञान के आकाश परध्रुवतारे-सा स्थिर है।

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yogasan

हिंदू दर्शन के षड्दर्शन (छः दर्शन) में से एक है योग

समय और जीवन दर्शन

 योग, हिंदू दर्शन के षड्दर्शन (छः दर्शन) में से एक है। योग का शाब्दिक अर्थ है जोड़ना। शारीरिक व्यायाम ,मुद्रा (आसन) को ध्यान (मन) से जोड़ना है इस हेतु सांस लेने की तकनीक को सीखना होता है. शरीर को आत्मा से जोड़ना है और फिर परमात्मा या प्रकृति या ईश्वर से जुड़ना होता है . हिंदू

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समय की चाल – पद्म मुख पंडा

समय और जीवन दर्शन, हिंदी कविता

समय की चाल सहज नहीं, जीवन भी जीना, नित उत्साह जरूरी है।हार गया, जो मन से, मानव की यह आदत, बूरी है।आएंगे तूफ़ान किस घड़ी, किसको भला पता है,निर्भय होकर, रहो जूझते, मिले सफलता पूरी हैज्ञानार्जन है बहुत जरूरी, बिना ज्ञान क्या कर सकते?विद्वतजन के साथ रहें तो, ये जीवन की धूरी है!है परिवर्तन शील

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करवा चौथ पर कविता

करवाचौथ पर हिंदी कविता

समय और जीवन दर्शन

करवाचौथ पर हिंदी कविता- करवा चौथ हिन्दुओं का एक प्रमुख त्योहार है। यह भारत के जम्मू, हिमाचल प्रदेश, पंजाब, उत्तर प्रदेश, हरियाणा, मध्य प्रदेश और राजस्थान में मनाया जाने वाला पर्व है। यह कार्तिक मास की कृष्ण पक्ष की चतुर्थी को मनाया जाता है। यह पर्व सौभाग्यवती (सुहागिन) स्त्रियाँ मनाती हैं। यह व्रत सवेरे सूर्योदय से पहले लगभग 4 बजे से आरंभ होकर रात में चंद्रमा दर्शन के उपरांत संपूर्ण होता है।

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आज के समय की पुकार पर कविता

समय और जीवन दर्शन, हिंदी कविता

आज के समय की पुकार पर कविता आओ हम सब एक बनें छोड़ बुराई नेक बनें।जन-जनअपनाकरे सुधार आज समय की यही पुकार।दहेज दानव का नाम मिटायें जलती बहु बेटी बचायेंगे।जागरूक हो जतन करें निज डोली नहीं लुटेरे कहार। सब कोई सोचे समझे सुने भ्रष्ट नेता कदापि न चुने।भ्रष्ट नेताओं के कारण ही देश में बढता

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सुकमोती चौहान “रुचि” की 10 रचनाएँ

समय और जीवन दर्शन

सुकमोती चौहान “रुचि” की 10 रचनाएँ एक अंकुरित पौधा एक अंकुरित आम , पड़ा था सड़क किनारे ।आते जाते लोग , सभी थे उसे निहारे ।।खोज रहा अस्तित्व , उठा ले कोई सज्जन ।दे दे जड़ को भूमि , लगा दे लेकर उपवन ।।करता वह चीत्कार है , जीना चाहूँ मैं सुनो ।मुझे सहारा दो तनिक

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