समय और जीवन दर्शन

अरस्तू

अरस्तू : ज्ञान का आकाश – मनीभाई नवरत्न

समय और जीवन दर्शन

अरस्तू : ज्ञान का आकाश — एक प्रेरक, दीर्घ, मौलिक कविता स्टैगिरा की मिट्टी मेंएक बालक जन्मा—शांत-सा, जिज्ञासु-सा,पर दृष्टि में छिपी थीविचारों की बिजली। उसके पिताराजदरबार के वैद्य थे,इसलिए राजमहलों की छायाउसके बचपन पर पड़ी,पर उस बालक का मनवैभव में नहीं,विचारों की खोज में रम गया। अरस्तू—जिसका नामआज भी ज्ञान के आकाश परध्रुवतारे-सा स्थिर है। […]

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yogasan

हिंदू दर्शन के षड्दर्शन (छः दर्शन) में से एक है योग

समय और जीवन दर्शन

 योग, हिंदू दर्शन के षड्दर्शन (छः दर्शन) में से एक है। योग का शाब्दिक अर्थ है जोड़ना। शारीरिक व्यायाम ,मुद्रा (आसन) को ध्यान (मन) से जोड़ना है इस हेतु सांस लेने की तकनीक को सीखना होता है. शरीर को आत्मा से जोड़ना है और फिर परमात्मा या प्रकृति या ईश्वर से जुड़ना होता है . हिंदू

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समय की चाल – पद्म मुख पंडा

समय और जीवन दर्शन, हिंदी कविता

समय की चाल सहज नहीं, जीवन भी जीना, नित उत्साह जरूरी है।हार गया, जो मन से, मानव की यह आदत, बूरी है।आएंगे तूफ़ान किस घड़ी, किसको भला पता है,निर्भय होकर, रहो जूझते, मिले सफलता पूरी हैज्ञानार्जन है बहुत जरूरी, बिना ज्ञान क्या कर सकते?विद्वतजन के साथ रहें तो, ये जीवन की धूरी है!है परिवर्तन शील

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करवा चौथ पर कविता

करवाचौथ पर हिंदी कविता

समय और जीवन दर्शन

करवाचौथ पर हिंदी कविता- करवा चौथ हिन्दुओं का एक प्रमुख त्योहार है। यह भारत के जम्मू, हिमाचल प्रदेश, पंजाब, उत्तर प्रदेश, हरियाणा, मध्य प्रदेश और राजस्थान में मनाया जाने वाला पर्व है। यह कार्तिक मास की कृष्ण पक्ष की चतुर्थी को मनाया जाता है। यह पर्व सौभाग्यवती (सुहागिन) स्त्रियाँ मनाती हैं। यह व्रत सवेरे सूर्योदय से पहले लगभग 4 बजे से आरंभ होकर रात में चंद्रमा दर्शन के उपरांत संपूर्ण होता है।

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आज के समय की पुकार पर कविता

समय और जीवन दर्शन, हिंदी कविता

आज के समय की पुकार पर कविता आओ हम सब एक बनें छोड़ बुराई नेक बनें।जन-जनअपनाकरे सुधार आज समय की यही पुकार।दहेज दानव का नाम मिटायें जलती बहु बेटी बचायेंगे।जागरूक हो जतन करें निज डोली नहीं लुटेरे कहार। सब कोई सोचे समझे सुने भ्रष्ट नेता कदापि न चुने।भ्रष्ट नेताओं के कारण ही देश में बढता

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सुकमोती चौहान “रुचि” की 10 रचनाएँ

समय और जीवन दर्शन

सुकमोती चौहान “रुचि” की 10 रचनाएँ एक अंकुरित पौधा एक अंकुरित आम , पड़ा था सड़क किनारे ।आते जाते लोग , सभी थे उसे निहारे ।।खोज रहा अस्तित्व , उठा ले कोई सज्जन ।दे दे जड़ को भूमि , लगा दे लेकर उपवन ।।करता वह चीत्कार है , जीना चाहूँ मैं सुनो ।मुझे सहारा दो तनिक

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मुकुटधर पांडेय की लोकप्रिय कवितायेँ

समय और जीवन दर्शन

यहाँ पर मुकुटधर पांडेय की कुछ लोकप्रिय कवितायेँ प्रस्तुत की जा रही हैं जो भी आपको अच्छा लगे कमेट कर जरुर बताएँगे मेरा प्रकृति प्रेम / मुकुटधर पांडेय हरित पल्लवित नववृक्षों के दृश्य मनोहरहोते मुझको विश्व बीच हैं जैसे सुखकरसुखकर वैसे अन्य दृश्य होते न कभी हैंउनके आगे तुच्छ परम ने मुझे सभी हैं ।

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सूर्यकान्त त्रिपाठी ‘निराला’ की प्रसिद्ध कवितायेँ

समय और जीवन दर्शन

यहाँ पर सूर्यकान्त त्रिपाठी ‘निराला’ की प्रसिद्ध कवितायेँ के बारे में बताया गया है , आपको कौन सी अच्छी लगी कमेंट कर जरुर बताएं खँडहर के प्रति / सूर्यकांत त्रिपाठी “निराला” खँड़हर! खड़े हो तुम आज भी?अदभुत अज्ञात उस पुरातन के मलिन साज!विस्मृति की नींद से जगाते हो क्यों हमें–करुणाकर, करुणामय गीत सदा गाते हुए?

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माखनलाल चतुर्वेदी की १० सर्वश्रेष्ठ कवितायेँ

समय और जीवन दर्शन

दीप से दीप जले / माखनलाल चतुर्वेदी सुलग-सुलग री जोत दीप से दीप मिलेंकर-कंकण बज उठे, भूमि पर प्राण फलें। लक्ष्मी खेतों फली अटल वीराने मेंलक्ष्मी बँट-बँट बढ़ती आने-जाने मेंलक्ष्मी का आगमन अँधेरी रातों मेंलक्ष्मी श्रम के साथ घात-प्रतिघातों मेंलक्ष्मी सर्जन हुआकमल के फूलों मेंलक्ष्मी-पूजन सजे नवीन दुकूलों में।। गिरि, वन, नद-सागर, भू-नर्तन तेरा नित्य

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समय सतत चलता है साथी

समय और जीवन दर्शन, हिंदी कविता

समय सतत चलता है साथी गीत(१६,१६) कठिन काल करनी कविताई!कविता संगत प्रीत मिताई!! समय सतत चलता है साथी,समय कहे मन त्याग ढ़िठाई।वक्त सगा नहीं रहा किसी का,वन वन भटके थे रघुराई।फुरसत के क्षण ढूँढ करें हमकविता संगत प्रीत मिताई। समय चक्र है ईष्ट सत्यता,वक्त सिकंदर,वक्त कल्पना।वक्त धार संग बहना साथी,मत देखे मन झूठा सपना।कठिन कर्म,पर्वत

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struggle

आया समय जवानो जागो भारतभूमि पुकारती।

समय और जीवन दर्शन, हिंदी कविता

प्रेरणा दायक कविता यह लोगों कि कार्वाई, इच्छाओं और ज़रूरतों के लिए कारणों का प्रतिनिधित्व करता है। प्रेरणा भी व्यवहार करने की दिशा के रूप मे परिभाषित किया जा सकता है। एक मकसद एक निश्चित तरीके से कार्य करने के लिए व्यक्ति को संकेत देता है या कम से कम विशिष्ट व्यवहार के लिए एक

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महामारी से भी मिला उपहार-समय के सदुपयोग की कला और जीवन शैली में सुधार।

समय और जीवन दर्शन

महामारी से भी मिला उपहार-समय के सदुपयोग की कला और जीवन शैली में सुधार। कोरोना जैसी महामारी फैली,बदल गई, जीवन की शैली।।समय का इसने सदुपयोग सिखाया,जीने का नया ढंग समसाझा। आज मैं नौरा छतवाल,आई हूँ,इस मंच पर कुछ विचारों का आदान-प्रदान करने, इस वैषविक महामारी का कुछ बखान करनें। काफी कुछ इस महामारी ने हमसे

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