मुक्त समय का मिथक
समय और जीवन दर्शनमुक्त समय का मिथक जीवन कोखालीपन नहीं चाहिए,उद्देश्य चाहिए,आग चाहिए। समय को बरबाद करने कासबसे आसान तरीका है—छोटी-छोटी बातों मेंमन को उलझाए रखना,सोचना,घिसटना,और वहीं फँसे रहना। जीवन ही समय है।हर क्षणअमूल्य है। हम जन्म लेते हैंशारीरिक प्रवृत्तियों की बेड़ियों में,और बड़े होते-होतेसमाज सेऔर भी जंजीरें जमा कर लेते हैं। जीवन का अर्थ है—सीख को भी



