समय और जीवन दर्शन

स्कूल पर कविता

समय और जीवन दर्शन

स्कूल पर कविता चलो ऐसी शाला का निर्माण करेंजिसका प्रकाश सबको आलोकित करें।इस संस्था का सदस्य बन करहम स्वयं भी गौरवान्वित करें ।जहां गुरु शिष्य का नातापिता-पुत्र से आंका जाए ।जहां हरेक बालों मेंबहन का रूप झांका जाए ।पर सगुणों को अपनाकरस्वदुर्गुणों को विसर्जित करें।ऐसी शाला का निर्माण करेंजिसका प्रकाश सबको आलोकित करें ।नियमित शाला […]

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यह समय है सोच का-मधुसिंघी

समय और जीवन दर्शन

यह समय है सोच का भाग रहा मानव से मानव , डर समाया मौत का।कोरोना वायरस ले आया , एक साया खौफ का।।मनु पड़ गया उलझन में , कैसे बचूँ इस विपदा से।भीड़ में हुआ अकेला , विश्वास नहीं है और का।। प्रकृति पर हो गया हावी , सोचा यह तो मुट्ठी में।चाँद पर घूम

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समय पर कविता

समय और जीवन दर्शन, हिंदी कविता

समय पर कविता समय के पाससमय नहीं हैकि थोड़ी देर रुकेतुम्हारे लिए अच्छा होगाकि तुम भी न रूकोचलते रहोसमय के साथ रुकने वालों काकोई संवाद नहीं होताकोई कहानी नहीं होतीकोई इतिहास नहीं होता चलते रहने वालोंतुम चलते ही रहोतुम्हारे बारे मेंएक दिनसमय सबको बताएगा — नरेन्द्र कुमार कुलमित्र9755852479

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कुण्डलिया शतकवीर- बाबूलाल शर्मा

समय और जीवन दर्शन

कुण्डलिया शतकवीर – बाबूलाल शर्मा १. *वेणी* मिलती संगम में सरित, कहें त्रिवेणी धाम!तीन भाग कर गूँथ लें, कुंतल वेणी बाम!कुंतल वेणी बाम, सजाए नारि सयानी!नागिन सी लहराय, देख मन चले जवानी!कहे लाल कविराय, नारि इठलाती चलती!कटि पर वेणी साज, धरा पर सरिता मिलती! २. *कुमकुम* माता पूजित भारती , अपना हिन्दुस्तान!समर क्षेत्र पूजित सभी,

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बीते समय पर कविता

समय और जीवन दर्शन, हिंदी कविता

बीते समय पर कविता हम रहो के राही हैभटक जाए इतना आसान नहींइतना रहो में गुमार नहीहम से टकरा जाए इतना हकूमत में साहस नहीहो जाता हैचिर हरण जैसे जब अपने घर ही ताक नहीअपने बच्चे ही हाथ नहीदुनिया में खूब कमाई दौलतपर करता रहा में कोई राम राम नहीचलना आता हैपर करता है जमाना

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समय का चक्र डॉ. पुष्पा सिंह’प्रेरणा’ की कविता

समय और जीवन दर्शन, हिंदी कविता

समय का चक्र चिता की लकड़ियाँ,ठहाके लगा रही थीं,शक्तिशाली मानव को निःशब्द जला रही थीं! रोकती रही मैं मगर सताता रहाताकत पर अपनी इतराता रहा! भूल जाता बचपन में तुझे खिलौना बन रिझाती रही,थक जाता जब रो-रो करपलना बनकर झुलाती रही! बुढ़ापे में असमर्थ हुआ तोलाठी बनकर चलाती रही,जीवन के संसाधनों में तेरेहरदम काम आती

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समय -देवता

समय और जीवन दर्शन, हिंदी कविता

समय -देवता देव,दनुज,नाग,नर,यक्ष,सभीनित मेरी महिमा गाते हैं।सत्ता सबसे ऊपर मेरी,सब सादर सीस झुकाते हैं।।1 देव मैं महान शक्तिशाली,हूँ अजर,अमर,अविनाशी मैं।सर्वत्र मेरा ही शासन है,नित प्रवहमान एकदिशीय मैं।।2 मेरी प्रवाह के साथ-साथ,जो अपनी कदम बढ़ाते हैं।पुरुषार्थी,परिश्रमी जन ही,जीवन-फल लाभ उठाते हैं।।3 पूजते जन श्रद्धा-भक्ति से ,हरदम फल पाते मन सन्तोष।अति शीघ्र रीझ मैं जाता हूँ,जैसे देवों

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कौन समय को रख सकता है

समय और जीवन दर्शन, हिंदी कविता

कौन समय को रख सकता है कौन समय को रख सकता है, अपनी मुट्ठी में कर बंद।समय-धार नित बहती रहती, कभी न ये पड़ती है मंद।।साथ समय के चलना सीखें, मिला सभी से अपना हाथ।ढल जातें जो समय देख के, देता समय उन्हीं का साथ।।काल-चक्र बलवान बड़ा है, उस पर टिकी हुई ये सृष्टि।नियत समय

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