कविता बहार

कवि बैरागी की कविता: आशीषों का आँचल

प्रकृति और पर्यावरण

कवि बैरागी की कविता: आशीषों का आँचल कवि बैरागी की कविता: आशीषों का आँचल आशीषों का आँचल भरकर, प्यारे बच्चो लाई हूँ।युग जननी मैं भारत माता, द्वार तुम्हारे आई हूँ। तुम ही मेरे भावी रक्षक, तुम ही मेरी आशा हो।तुम ही मेरे भाग्यविधाता, तुम ही प्राण पिपासा हो। मर्यादा का, त्याग-शील का, पाठ मिला रघुराई […]

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हिंदी संग्रह कविता-हम कुछ करके दिखलाएँगे–कमलेश त्रिपाठी

हिंदी कविता

हम कुछ करके दिखलाएँगे है शौक यही, अरमान यही, हम कुछ करके दिखलाएँगे।मरने वाली दुनिया में हम, अमरों में नाम लिखाएँगे। जो लोग गरीब भिखारी हैं, जिन पर न किसी की छाया है।हम उनको गले लगायेंगे, हम उनको सुखी बनायेंगे। जो लोग अँधेरे घर में हैं, अपनी ही नहीं नज़र में हैं,हम उनके कोने-कोन में,

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mother their kids

मां एक ऐसा रिश्ता – हरनीत कौर नैय्यर

हिंदी कविता

मातृपितृ पूजा दिवस भारत देश त्योहारों का देश है भारत में गणेश उत्सव, होली, दिवाली, दशहरा, जन्माष्टमी, नवदुर्गा त्योहार मनाये जाते हैं। कुछ वर्षों पूर्व मातृ पितृ पूजा दिवस प्रकाश में आया। आज यह 14 फरवरी को देश विदेश में मनाया जाता है। छत्तीसगढ़ में रमन सरकार द्वारा प्रदेश भर में आधिकारिक रूप से मनाया जाता है। मां

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आया रे आया मेरे भोले का त्यौहार आया

हिंदी कविता

कविता बहार-कविता लेखन प्रतियोगिता
कविता लेखन प्रतियोगिता-2021
प्रतियोगिता अवसर-फाल्गुन कृष्ण 13 महाशिवरात्रि
प्रतियोगिता विशेषांक-शिवजी की महिमा

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गीतिका छंद पर सृजन -देवता

हिंदी कविता

गीतिका छंद 🌹
गीतिका छन्द एक मात्रिक छन्द है। इसके चार चरण होते है। प्रत्येक चरण में 14 और 12 यति से 26 मात्राएँ होती है। अन्त में क्रमशः लघु-गुरु होता है।
मापनी–
2122 2122 , 2122 212=26

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चिंता से चिता तक

हिंदी कविता

चिंता से चिता तक मां बाप को बच्चों के भविष्य की चिन्ता,महंगे से स्कूल में एडमिशन की चिन्ता।स्कूल के साथ कोचिंग, ट्यूशन की चिन्ता,शहर से बाहर हाॅस्टल में भर्ती की चिन्ता।। जेईई, नीट, रीट कम्पीटीशन की चिन्ता,सरकारी, विदेशी कं. में नौकरी की चिन्ता।राजशाही स्तर का विवाह करने की चिंता,विवाह पश्चात विदेश में बस जाने की

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शिव महिमा

हिंदी कविता

प्रस्तुत कविता शिव की महिमा भगवान शिव पर आधारित है। वह त्रिदेवों में एक देव हैं। इन्हें देवों के देव महादेव, भोलेनाथ, शंकर, महेश, रुद्र, नीलकंठ, गंगाधार आदि नामों से भी जाना जाता है।

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हिंदी संग्रह कविता-न यह समझो कि हिन्दुस्तान की तलवार सोई है

नारी जीवन और संवेदना

न यह समझो कि हिन्दुस्तान की तलवार सोई है न यह समझो कि हिन्दुस्तान की तलवार सोई है। जिसे सुनकर दहलती थी कभी छाती सिकंदर की,जिसे सुनकर कि कर से छूटती थी तेग बाबर की,जिसे सुन शत्रु की फौजें बिखरती थीं, सिहरती थीं,विसर्जन की शरण ले डूबती नावें उभरती थीं।हुई नीली कि जिसकी चोट से

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हिंदी संग्रह कविता-खून दिया है मगर नहीं दी कभी देश की माटी है

हिंदी कविता

खून दिया है मगर नहीं दी कभी देश की माटी है युगों-युगों से यही हमारी बनी हुई परिपाटी है,खून दिया है, मगर नहीं दी कभी देश की माटी है। इस धरती पर जन्म लिया है, यही पुनीता माता है,एक प्राण, दो देह सरीखा, इससे अपना नाता है।यह धरती है पार्वती माँ, यही राष्ट्र शिव शंकर

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हिंदी संग्रह कविता-दुश्मन के लोहू की प्यासी भारत की तलवार है

हिंदी कविता

दुश्मन के लोहू की प्यासी भारत की तलवार है अरे! तुम्हारे दरवाजे पर दुश्मन की ललकार हैभारत की रणमत्त जवानी, चल क्या सोच विचार है।राणा के वंशजो, शिवा के पूतो, माँ के लाड़लो।समर-भूमि में बढ़ो, शत्रु को रोको और पछाड़ लो,तुम्हें कसम है अपनी मां के पावन गाढ़े दूध की,चलो चीन से अपनी चौकी, चाँदी

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