कविता बहार

हिंदी कविता-ज्योति यह जले

हिंदी कविता

ज्योति यह जले सूत्र संगठन सँभाल, ज्योति यह जले।कोटि-कोटि दीप-माल ज्योति यह जले। राष्ट्र अंधकार के विनाश के लिए,चिर अतीत के धवल प्रकाश के लिए।बुद्धि के, विवेक के विकास के लिएवृद्धि के समृद्धि के प्रयास के लिए।त्याग की लिए मशाल, ज्योति यह जले। सूत्र संगठन… राष्ट्र की अखण्ड साधना अमर बने,प्राण-प्राण-कंठ की पुकार एक हो।राष्ट्र

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हिंदी कविता-जन्म चाहिए प्यारे हिन्दुस्तान में

हिंदी कविता

जन्म चाहिए प्यारे हिन्दुस्तान में एक हमारी छोटी विनती, भगवन ! रखना ध्यान में,हमें हमेशा पैदा करना, प्यारे हिन्दुस्तान में ॥ सिर पर है हिम मुकुट सलोना, कंठहार गंगा-यमुना,हरियाली की चादर मनहर, फूल – फलों का है गहना।चन्दन भरी हवा लहराती, प्यारे हिन्दुस्तान में ॥ एक हमारी राम-कृष्ण की जन्मभूमि यह, वीर भगत की यह

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रिश्ते नाते (कुण्डलिया )- माधुरी डडसेना

हिंदी कविता

रिश्ते नाते (कुण्डलिया )- माधुरी डडसेना नाते गढ़ने के लिए , रचने पड़ते स्वांग ।बार बार हैं जाँचते , कहता क्या पंचांग ।।कहता क्या पंचाग , बनी उत्सुकता भारी ।करते तिकड़म सर्व , कठिन करते तैयारी ।।मुदिता भर मुस्कान , शून्य फल लेकर आते ।कभी कहीं बन मीत , निभाते अपने नाते ।। नाते देखे

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बहार शब्द पर दोहा

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बहार शब्द पर दोहा रंग बिरंगे फूल से ,            छाए बाग बहार ।भौरें भी मदमस्त हो ,           झूमे मगन अपार ।। रखें भरोसा ईश पर ,             जीवन हो उजियार ।सदा प्रतिष्ठा मान से ,             छाए हर्ष बहार ।। घर में खुशी बहार है ,               अपने भी हैं साथ । करे दिखावा प्रेम का ,               पकड़ रखे

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माँ कामाख्या की कथा

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माँ कामाख्या की कथा =================माँ कामाख्या की कथा, बता रहा है दीन। जिसकी सम्पति लुट चुकी, तन-मन भी है क्षीन।। यही दीन ऋण बोझ से , था संतप्त मलीन। सूदखोर प्रति दिन कहे , सूद पटा दे दीन।। था गरीब पर आन थी, उसकी भी कुछ शेष। माँ कामाख्या की करे, पूजा नित्य विशेष।। साहूकार

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हाइकु

पेड़ बुलाते मेघ -हाइकु संग्रह की समीक्षा , हाइकुकार-रमेश कुमार सोनी एवं समीक्षक-डॉ.पूर्वा शर्मा-वड़ोदरा

समाज और यथार्थ

हाइकु एक जापानी विधा की लेखन शैली है जिसमें कविता का होना अनिवार्य होता है.यह मेरा दूसरा हाइकु संग्रह है.इसकी भूमिका वरिष्ठतम हाइकुकार डॉ.सुधा गुप्ता जी -मेरठ ने लिखी है.

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हाइकु

झूला झूले फुलवा- ताँका संग्रह की समीक्षा

नारी जीवन और संवेदना

मेरी यह पुस्तक -‘ झूला झूले फुलवा ‘ – हिंदी ताँका की विश्व मे पहली इ पुस्तक है। इसकी समीक्षा ज्योत्सना प्रदीप -विख्यात साहित्यकार ने की है।
ताँका एक जापानी शैली की रचना विधा है ।

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हिंदी संग्रह कविता-इतनी शक्ति हमें देना

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इतनी शक्ति हमें देना इतनी शक्ति हमें देना दाता,मन का विश्वास कमजोर हो ना।हम चलें नेक रास्ते पे हमसे,भूल कर भी कोई भूल हो ना।दूर अज्ञान के हों अँधेरे,तू हमें ज्ञान की रोशनी दे।हर बुराई से बचते रहें हम,जितनी भी दे भली जिंदगी दे।बैर हो ना किसी का किसी से,भावना मन में बदले की हो

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