कविता बहार

हिंदी संग्रह कविता-खून दिया है मगर नहीं दी कभी देश की माटी है

हिंदी कविता

खून दिया है मगर नहीं दी कभी देश की माटी है युगों-युगों से यही हमारी बनी हुई परिपाटी है,खून दिया है, मगर नहीं दी कभी देश की माटी है। इस धरती पर जन्म लिया है, यही पुनीता माता है,एक प्राण, दो देह सरीखा, इससे अपना नाता है।यह धरती है पार्वती माँ, यही राष्ट्र शिव शंकर

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हिंदी संग्रह कविता-दुश्मन के लोहू की प्यासी भारत की तलवार है

हिंदी कविता

दुश्मन के लोहू की प्यासी भारत की तलवार है अरे! तुम्हारे दरवाजे पर दुश्मन की ललकार हैभारत की रणमत्त जवानी, चल क्या सोच विचार है।राणा के वंशजो, शिवा के पूतो, माँ के लाड़लो।समर-भूमि में बढ़ो, शत्रु को रोको और पछाड़ लो,तुम्हें कसम है अपनी मां के पावन गाढ़े दूध की,चलो चीन से अपनी चौकी, चाँदी

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हिंदी संग्रह कविता-खड़ा हिमालय बता रहा है

हिंदी कविता

खड़ा हिमालय बता रहा है खड़ा हिमालय बता रहा है, डरो न आँधी पानी में।खड़े रहो अपने ही पथ पर, कठिनाई – तूफानों में।डिगो न अपने पथ से तो फिर, सब कुछ पा सकते प्यारे।तुम भी ऊँचे हो सकते हो, छू सकते नभ के तारे।अचल रहा जो अपने पथ पर, लाख मुसीबत आने में।मिली सफलता

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डगमग इंसान चले

हिंदी कविता

सारस छंद विधान – इसके प्रत्येक चरण में 24 मात्राएँ होती हैं , 12,12 मात्रा पर यति होती है ; आदि में विषम कल होता है और 3,4,9,10,15,16,21,22 वीं मात्राएँ अनिवार्यतः लघु 1 होती हैं ।
मापनी:–2112 2112 , 2112 2112

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हिंदी संग्रह कविता-हम अर्चना करेंगे

हिंदी कविता

हम अर्चना करेंगे हे जन्म-भूमि भारत, हे कर्मभूमि भारत,हे वन्दनीय भारत, अभिनन्दनीय भारत,जीवन सुमन चढ़ाकर, आराधना करेंगे,तेरी जनम-जनम भर, हम वन्दना करेंगे। हम अर्चना करेंगे…. महिमा महान् तू है, गौरव निधान तू है,तू प्राण है, हमारी जननी समान तू है,तेरे लिए जिएँगे, तेरे लिए मरेंगे,तेरे लिए जनम भर, हम साधना करेंगे। हम अर्चना करेंगे… जिसका

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हिंदी संग्रह कविता-वह जीवन भी क्या जीवन है

समाज और यथार्थ

वह जीवन भी क्या जीवन है वह जीवन भी क्या जीवन है, जो काम देश के आ न सका।वह चन्दन भी क्या चन्दन है, जो अपना वन महका न सका। जिसकी धरती पर जन्म लिया, जिसके समीर से श्वास चलीजिसके अमृत से प्यास बुझी, जिसकी माटी से देह पली। वह क्या सपूत जो जन्मभूमि के,

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हिंदी संग्रह कविता-हमारे प्यारे हिन्दुस्तान

हिंदी कविता

हमारे प्यारे हिन्दुस्तान हमारे प्यारे हिन्दुस्थान, हमारे भारतवर्ष महान ॥जननी तू जन्मभूमि है, तू जीवन तू प्राण ।तू सर्वस्व शूरवीरों का, जगती का अभिमान ॥ हमारे प्यारे उष्ण रक्त अगणित अरियों का, बार-बार कर पान।चमकी है कितने युद्धों में, तेरी तीक्ष्ण कृपाण ॥ हमारे प्यारे जौहर की ज्वाला में जिनकी, थी अक्षय मुस्कान।धन्य वीर बालाएँ

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हिंदी संग्रह कविता-हम सब भारतवासी हैं

हिंदी कविता

हम सब भारतवासी हैं हम पंजाबी, हम गुजराती, बंगाली, मद्रासी हैं,लेकिन हम इन सबसे पहले केवल भारतवासी हैं।हम सब भारतवासी हैं। हमें प्यार आपस में करना पुरखों ने सिखलाया है,हमें देश-हित, जीना-मरना, पुरखों ने सिखलाया है!हम उनके बतलाये पथ पर, चलने के अभ्यासी हैं!हम सब भारतवासी हैं! हम बच्चे अपने हाथों से, अपना भाग्य बनाते

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हिंदी संग्रह कविता-हम करें राष्ट्र-आराधन

हिंदी कविता

हम करें राष्ट्र-आराधन हम करें राष्ट्र-आराधन, तन से, मन से, धन से।तन, मन, धन, जीवन से, हम करें राष्ट्र-आराधन॥ अंतर से, मुख से, कृति से, निश्चल हो निर्मल मति से।श्रद्धा से, मस्तक -नत से, हम करें राष्ट्र-अभिवादन ।। अपने हँसते शैशव से, अपने खिलते यौवन से।प्रौढ़तापूर्ण जीवन से, हम करें राष्ट्र का अर्चन ।। अपने

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हिंदी संग्रह कविता- सुना रहा हूँ तुम्हें भैरवी

हिंदी कविता

सुना रहा हूँ तुम्हें भैरवी सुना रहा हूँ तुम्हें भैरवी जागो मेरे सोने वाले!जब सारी दुनिया सोती थी तब तुमने ही उसे जगायादिव्य गान के दीप जलाकर तुमने ही तम दूर भगाया,तुम्हीं सो रहे, दुनिया जगती यह कैसा मद है मतवाले। गंगा-यमुना के कूलों पर, सप्त सौध थे खड़े तुम्हारे,सिंहासन था, स्वर्ण छत्र था, कौन

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हिंदी संग्रह कविता- वही देश है मेरा

हिंदी कविता

वही देश है मेरा वही देश है मेरा,वही देश है मेरा। द-ऋचाओं में गूंजा है,जिसका अम्बर नीला।जहाँ राम घनश्याम कर गए,युग-युग अद्भुत लीला।जहाँ बांसुरी बजी ज्ञान की, जागा स्वर्ण सवेरा।वही देश है मेरा.. जहां बुद्ध ने सत्य-अहिंसाका था अलख जगाया।गुरु नानक ने विश्वप्रेम काराग जहाँ सरसाया।मेरे-तेरे भेद-भाव का मन से मिटा अँधेरा।वही देश है मेरा..

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