कविता बहार

लाचार शिक्षण- रमेश शर्मा

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लाचार शिक्षण शिक्षण में कोरोना बैठा,ऐसा भय दिखलाते हैं।बिना मास्क रैली धरनों को,रोक नहीं ये पातें हैं।। बिना परीक्षा पास न होंगे,ये आदेश सुनाया है।पढ़ना और पढ़ाना केवल,आनलाईन ही आया है।।बिना पढ़े गृह कार्य कराना,नासमझी की बातें हैं।।शिक्षण में कोरोना वैठा,ऐसा भय दिखलाते है।। छुपकर शिक्षक लगे पढ़ाने,घर अभ्यास बहाना है।गुरू शिष्य ऐसे मिलते हैं,जैसे

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भारतीय नौ सेना- मधु गुप्ता “महक”

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भारतीय नौ सेना प्रखर ओजस्वी नौजवानों,सुरक्षित है तुमसे वतन।विजयी तिरंगा फहराने वाले,जल सेना तुमको है नमन।विजय तिरंगा…………. प्रहरी सामुद्रिक सीमा के,देश की रक्षा तुमसे है।तोड़ के सारे कुचक्रों को,हर घर की खुशियाँ तुमसे है।जल के वीर जवानों सुन लो,मुस्काता है देश रूपी चमनविजयी तिरंगा…………… सरहद पर रहने वाले वीर,जब जब देश में युद्ध छीड़ी।सागर के

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7 दिसंबर झंडा दिवस पर विशेष लेख

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7 दिसंबर सशस्त्र सेना झंडा दिवस-
सशस्त्र सेना झंडा दिवस या झंडा दिवस भारतीय सशस्त्र बलों के कर्मियों के कल्याण हेतु भारत की जनता से धन-संग्रह के प्रति समर्पित एक दिन है। यह 1949 से 7 दिसम्बर को भारत में प्रतिवर्ष मनाया जाता है।

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हूँ तन से दिव्यांग मन से नहीं-(विश्व दिव्यांग दिवस विशेष)

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एक दिव्यांग अपनी दिव्यांगता को कमजोरी नहीं बल्कि आत्म बल साहस बना सबको एक नई दिशा देता है और नित आगे बढ़ता है

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नानक पर कविता -अलामा मुहम्मद इकबाल

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 नानक पर कविता-अलामा मुहम्मद इकबाल कौम ने पैग़ामे गौतम की ज़रा परवाह न कीकदर पहचानी न अपने गौहरे यक दाना की आह ! बदकिसमत रहे आवाज़े हक से बेख़बरग़ाफ़िल अपने फल की शीरीनी से होता है शजर आशकार उसने कीया जो ज़िन्दगी का राज़ थाहिन्द को लेकिन ख़याली फ़लसफ़े पर नाज़ था शमएं-हक से जो

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गुरू नानक शाह-नज़ीर अकबराबादी

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 गुरू नानक शाह-नज़ीर अकबराबादी हैं कहते नानक शाह जिन्हें वह पूरे हैं आगाह गुरू ।वह कामिल रहबर जग में हैं यूँ रौशन जैसे माह गुरू ।मक़्सूद मुराद, उम्मीद सभी, बर लाते हैं दिलख़्वाह गुरू ।नित लुत्फ़ो करम से करते हैं हम लोगों का निरबाह गुरु ।इस बख़्शिश के इस अज़मत के हैं बाबा नानक शाह

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गुरु नानक-मैथिलीशरण गुप्त

समाज और यथार्थ

गुरु नानक-मैथिलीशरण गुप्त मिल सकता है किसी जाति कोआत्मबोध से ही चैतन्य ;नानक-सा उद्बोधक पाकरहुआ पंचनद पुनरपि धन्य ।साधे सिख गुरुओं ने अपनेदोनों लोक सहज-सज्ञान;वर्त्तमान के साथ सुधी जनकरते हैं भावी का ध्यान ।हुआ उचित ही वेदीकुल मेंप्रथम प्रतिष्टित गुरु का वंश;निश्चय नानक में विशेष थाउसी अकाल पुरुष का अंश;सार्थक था ‘कल्याण’ जनक वह,हुआ तभी

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जपु जी साहिब : गुरु नानक देव जी

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गुरु नानक देव जी (१५ अप्रैल १४६९–२२ सितम्बर १५३९) सिख धर्म के संस्थापक थे । उनका जन्म राय भोइ की तलवंडी (ननकाना साहब) में हुआ, जो कि पाकिस्तान के शेखूपुरे जिले में है । उन के पिता मेहता कल्याण दास बेदी (मेहता कालू) और माता तृप्ता जी थे । उनकी बड़ी बहन बीबी नानकी जी थे । उनका विवाह माता सुलक्खनी जी के साथ हुआ । उनके दो पुत्र बाबा श्री चंद जी और बाबा लखमी दास जी थे । १५०४ में वह बीबी नानकी जी के साथ सुलतान पुर लोधी चले गए, जहाँ उन्होंने कुछ देर नवाब दौलत खान लोधी के मोदीखाने में नौकरी की । उन्होंने भारत समेत दुनिया के कई देशों की चार लम्बी यात्राएं (उदासियाँ) भी कीं । उन्होंने कुल ९४७ शब्दों की रचना की । उन की प्रमुख रचनायें जपु(जी साहब), सिध गोसटि, आसा दी वार, दखनी ओअंकार आदि हैं।

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जय जय गुरु नानक प्यारे

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जय जय गुरु नानक प्यारे जय जय गुरु नानक प्यारे ।जय जय गुरु नानक प्यारे ॥तुम प्रगटे तो हुआ उजालादूर हुए अँधियारे ॥जय जय गुरु नानक प्यारे ॥ जगत झूठ है सच है ईश्वरतुमने ही बतलाया ।वेद पुरान कुरान सभी कासार हमें समझाया ।पावन ‘गुरुवाणी’ से हरतेसब अज्ञान हमारे ॥जय जय गुरु नानक प्यारे ॥

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स्वच्छ भारत

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स्वच्छ भारत➖➖➖➖➖रचनाकार- महदीप जंघेलविधा- गीत (स्वच्छता गीत) स्वच्छता की ज्योति जलाना है।भारत को स्वच्छ बनाना है।।सब लोगो को समझाना है।भारत को स्वच्छ बनाना है।। शौच खुले में न जाओ ,गन्दगी कहीं न फैलाओ।जो भी खुले में जाता है,कई बीमारियों को बुलाता है।।पर्यावरण स्वच्छ बनाना है,शौचालय में ही जाना है।।स्वच्छता की ज्योति………. कूड़ा कचरा न फैलाना,बीमारियों

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मैं हूं धरती

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तुम हो आकाश,मैं हूं धरती नज़र उठा कर सभी ने देखा तुम्हेऔर हमेशा सेसभी ने रौंदा मुझे मिलना चाहा जब-जब तुमनेमिले तुम तब-तब मुझसे कभी बारिश बन करकभी आंधी बन करकभी चांदनीतो कभी धूप बन करमगर मैं रही वहीँ हमेशा ही जब हुए तुम खफातो वो भी दिखला दियाकभी बिजली बन कर गरजेकभी ढा दिया

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