कविता बहार

पेड़ धरा की शान है परमेश्वर साहू अंचल

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पेड़ धरा की शान है परमेश्वर साहू अंचल पेड़ धरा की शान है, नेक सफ़ल अभियान।आओ रोपें मिलकर, तजें तुच्छ अभिमान।। हवा शुद्ध करता यही, खास नेक पहचान।जड़ी बूटी है काम की, पूर्ण करें अरमान।। ताप उमस हरदम हरे, रक्षा करता धूप।शीतल छाया में सदा, निखरे हड़पल रूप।। डंठल पत्तल काम की, आते सारे काम।इससे […]

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कर्ज पर कविता – मनोरमा चन्द्रा

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कर्ज पर कविता – मनोरमा चन्द्रा कर्ज तले जो दब गए, होते हैं गमगीन।उसकी निंदा छोड़ तू, समझ उसे मत दीन।। कर्ज लिया जो आज है, उसे नहीं तू भूल।जो तुमने धोखा दिया, लूँगा कर्ज वसूल।। सेठ कर्ज जितना दिया , सूद संग की चाह।हो वसूल सब राशियाँ , पूरे होते माह।। कर्ज दिया जिसने

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सतत् क्रिया है खोज- मनोरमा चन्द्रा

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सतत् क्रिया है खोज- मनोरमा चन्द्रा सबकी अपनी दृष्टि है, एक अलग ही खोज।जो मन को अच्छा लगे, वही करत जन रोज।। जीव खोजता ईश को, लेकिन है अंजान।ईश्वर हृदय विराजते, सार बात यह मान।। चले निरंतर खोज जब, आते हैं परिणाम।त्याग लगन प्रिय साधना, होता जग में नाम।। मेरी आँखें खोजती, नटवर नागर श्याम।कृपा

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मदिरा मंंदिर एक सा- रामनाथ साहू ” ननकी “

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मदिरा मंंदिर एक सा मदिरा का पर्याय है , माधव मोहन प्यार ।कभी कहीं उतरे नहीं , छके भरे रससार ।।छके भरे रससार , प्रेमरस पीले पगले ।क्या जाने कल वक्त , मिले या आगे अगले ।।कह ननकी कवि तुच्छ , पिया था जिसे कबिरा ।मदिरालय मन मस्त , पिये जा माधव मदिरा ।। मदिरा

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मेरे भारत देश है श्रेष्ठ गुणों की खान -मनोरमा चन्द्रा “रमा”

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मेरे भारत देश है श्रेष्ठ गुणों की खान -मनोरमा चन्द्रा “रमा” मन में अभिलाषा भरी, सभी बने विद्वान। मेरे भारत देश है, श्रेष्ठ गुणों की खान।। शांति नाद गूँजे सदा, सबका हो अरमान। सत्य, अहिंसा मार्ग चल, वही श्रेष्ठतम जान।। रंग भेद को तज चलें, रखें मनुज समभाव। श्रेष्ठ कर्म नित कर चलो, रिश्ते लगे

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द्वादश ज्योतिर्लिंग

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प्रस्तुत कविता शिव द्वादश ज्योतिर्लिंग पर आधारित है। वह त्रिदेवों में एक देव हैं। इन्हें देवों के देव महादेव, भोलेनाथ, शंकर, महेश, रुद्र, नीलकंठ, गंगाधार आदि नामों से भी जाना जाता है।

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हरियाली अमावस्या आज

प्रकृति और पर्यावरण

श्रावण कृष्ण पक्ष अमावस्या को हरियाली अमावस्या के नाम से जाना जाता है। देश के कई भागों विशेषकर उत्तर भारत में इसे एक धार्मिक पर्व के साथ ही पर्यावरण संरक्षण के रूप में मनाया जाता है।

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किसान (कुण्डलिया)-मदन सिंह शेखावत

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किसान (कुण्डलिया) खेती खुशियो की करे, बोए प्रेम प्रतीत।निपजाता मोती बहुत, सुन्दर आज अतीत।सुन्दर आज अतीत,पेट कब वह भर पाता।हालत बहुत खराब, दीन है अन्न प्रदाता।कहे मदन करजोर, ध्यान कृषकों का देती।होता वह सम्पन्न, करे खुशियो की खेती।। मदन सिंह शेखावत ढोढसर

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लाचार शिक्षण- रमेश शर्मा

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लाचार शिक्षण शिक्षण में कोरोना बैठा,ऐसा भय दिखलाते हैं।बिना मास्क रैली धरनों को,रोक नहीं ये पातें हैं।। बिना परीक्षा पास न होंगे,ये आदेश सुनाया है।पढ़ना और पढ़ाना केवल,आनलाईन ही आया है।।बिना पढ़े गृह कार्य कराना,नासमझी की बातें हैं।।शिक्षण में कोरोना वैठा,ऐसा भय दिखलाते है।। छुपकर शिक्षक लगे पढ़ाने,घर अभ्यास बहाना है।गुरू शिष्य ऐसे मिलते हैं,जैसे

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भारतीय नौ सेना- मधु गुप्ता “महक”

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भारतीय नौ सेना प्रखर ओजस्वी नौजवानों,सुरक्षित है तुमसे वतन।विजयी तिरंगा फहराने वाले,जल सेना तुमको है नमन।विजय तिरंगा…………. प्रहरी सामुद्रिक सीमा के,देश की रक्षा तुमसे है।तोड़ के सारे कुचक्रों को,हर घर की खुशियाँ तुमसे है।जल के वीर जवानों सुन लो,मुस्काता है देश रूपी चमनविजयी तिरंगा…………… सरहद पर रहने वाले वीर,जब जब देश में युद्ध छीड़ी।सागर के

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