कविता बहार

कैसे कहदूँ प्यार नहीं है ?

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कैसे कहदूँ प्यार नहीं है ? कैसे कहदूँ प्यार नहीं है ?वह मेरी झंकार नहीं है ? बिन बाती क्या दीप जला है ?कहीं रेत बिन बीज फला है ?कैसा सागर नदी नहीं तोजलद कहाँ जो धार नहीं है ? कैसे कहदूँ ……………… देखा विधु को बिना जुन्हाई ?प्रीत बिना खिलती तरुणाई ?शुष्क मरुस्थल-सा है […]

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जाने कैसी बात चली है

हिंदी कविता

जाने कैसी बात चली है जाने कैसी बात चली है।सहमी-सहमी बाग़ कली है।। जिन्दा होती तो आ जातीशायद बुलबुल आग जली है। दुख का सूरज पीड़ा तोड़ेसुख की मीठी रात ढली है।। नींद कहाँ बसती आँखों मेंजब से घर बुनियाद हिली है।। महक उठा आँगन खुशियों सेजब-जब माँ की बात चली है ।। अशोक दीप

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जय जवान जय किसान

हे मेहनतकशों इन्हें पहचान /राजकुमार मसखरे

हिंदी कविता

हे मेहनतकशों इन्हें पहचान /राजकुमार मसखरे कितने राजनेताओं के सुपुत्रसरहद में जाने बना जवान !कितने नेता हैं करते किसानीये सुन तुम न होना हैरान !बस फेकने, हाँकने में माहिरजनता को भिड़ाने में महान ! भाषण में राशन देने वालेयही तो है असली शैतान !किसान के ही अधिकतर बेटेसुरक्षा में लगे हैं बंदूक तान !और खेतों

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सपना हुआ न अपना

हिंदी कविता

सपना हुआ न अपना बचपन में जो सपने देखे, हो न सके वो पूरे,मन को समझाया, देखा कि, सबके रहे अधूरे!उडूं गगन में पंछी बनकर, चहकूं वन कानन में,गीत सुरीले गा गा   कर, आनन्द मनाऊं मन में!मां ने कहा, सुनो, बेटा, तुम, चाहो अगर पनपनानहीं, व्यर्थ के सपने देखो, सपना हुआ न अपना सुना पिताजी

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प्रेम में पागल हो गया

हिंदी कविता

प्रेम में पागल हो गया रूप देख मन हुआ प्रभावित,हृदय घायल हो गया।सुंदरी क्या कहूं मैं,तेरे प्रेम में पागल हो गया। भूल गया स्वयं को,नयनों में बसी छवि तेरी।हृदयाकांक्षा एक रह गई,बाहों में तू हो मेरी। नर शरीर मैंने त्याग दिया,जीवन की आशा है तू ही तू।तेरे प्रेम की कविता,तेरे प्रेम की ग़ज़ल लिखूं। कवि

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संस्कार नही मिलता दुकानों में-परमानंद निषाद “प्रिय”

समाज और यथार्थ

संस्कार नही मिलता दुकानों में – परमानंद निषाद “प्रिय” माता-पिता से मिले उपहार।हिंद देश का है यह संस्कार।बुजुर्गो का दर्द समझते नहींनहीं जानते संस्कृति- संस्कार। संस्कार दिये नहीं जाते है।समाज के भ्रष्टाचारों से।संस्कार हमको मिलता है।माता-पिता,घर-परिवार से। बुजुर्गो का सम्मान धर्म हमारा।उनकी सेवा करना कर्म हमारा।संस्कार नही मिलता दुकानों मेंयह मिलता अच्छे संस्कारों में। बुजुर्गो

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अंकुर-रामनाथ साहू ” ननकी “

प्रकृति और पर्यावरण

अंकुर अंकुर आया बीज में , लेता नव आकार ।एक वृक्ष की पूर्णता , देखे सब संसार ।।देखे सब संसार , समाहित ऊर्जा भारी ।अर्ध खुले हैं नैन , प्रकृति अनुकूलन सारी ।।कह ननकी कवि तुच्छ , प्रगट होने को आतुर ।नई सृष्टि आभास , बीज को देता अंकुर । अंकुर होते हैं खुशी ,

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कोरोना कइसे भागही – महदीप जंघेल

हिंदी कविता

कोरोना कइसे भागही – महदीप जंघेल दारू भट्ठी में भीड़ ल देखके,मोला लगथे अकबकासी।कोरोना बेरा मा अइसन हालत ले,लगथे अब्बड़ कलबलासी। बिहनिया ले कतार म ठाढ़ होके,घाम पियास म अइंठत हे,सियनहीन गाय सरी ठाढ़े-ठाढ़े ,हफरत लाहकत हे। धरे पइसा,लपेटे मुहूँ मा गमछा,अगोरा मा खड़े हवय।कोरोना ल भुलागे,एक ठन काबर,दू ठन बर धरे हवय। नशाखोरी के

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एक अकेले मदन मोहन

समाज और यथार्थ,

एक अकेले मदन मोहन कुछ  लोग होते हैं, जो महान होते हैं, महात्मा कहलाते हैं, कुछ लोग होते हैं, जो पवित्र होते हैं, शुद्धात्मा कहलाते हैं  कुछ लोग होते हैं देवतुल्य, जो देवात्मा कहलाते हैं  पर महामना हैं केवल एक, जहां अनेक में एक पुण्यात्मा हम पाते हैं  न पहले ना बाद में किसी का,

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वन्दे मातरम् – बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय

हिंदी कविता

यह गीत बंकिम चंद्र जी के उपन्यास आनंदमठ (1882) का हिस्सा है। उपन्यास में इसे सन्यासी क्रान्तिकारी गाते हैं। इस गीत में संस्कृत और बांग्ला भाषाओं का मिश्र-प्रयोग हुआ है। इसके पहले दो पैराग्राफ़ को भारत के राष्ट्रीय गीत के रूप में मान्यता प्राप्त है।

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ऊर्जा संरक्षण पर कविता-महदीप जंघेल

हिंदी कविता,

ऊर्जा संरक्षण पर कविता – महदीप जंघेल आओ मिलकर ऊर्जा दिवस मनाएँ।ऊर्जा की बचत का महत्व समझाएँ।। टीवी,पंखा,कूलर,बल्ब में ऊर्जा बचाएँ।आवश्यकता हो तभी, इसे उपयोग में लाएँ।। कच्चे तेल,कोयला,गैस की ,मांग निरन्तर बढ़ रही है।अंधाधुंध उपभोग से ,प्राकृतिक संसाधन घट रही है। ऊर्जा उपयोग कम करने का,लाभ जन-जन को बतलाएँ।भविष्य में उपयोग कैसे हो,महत्व इसका

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शिव स्तुति – केंवरा यदु मीरा

हिंदी कविता

प्रस्तुत कविता शिव स्तुति भगवान शिव पर आधारित है। वह त्रिदेवों में एक देव हैं। इन्हें देवों के देव महादेव, भोलेनाथ, शंकर, महेश, रुद्र, नीलकंठ, गंगाधार आदि नामों से भी जाना जाता है।

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