कविता बहार

परिश्रम का बीज

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परिश्रम का बीज मेहनत हर ईमान कीयूँ ऐसे रंग लाएगी।व्यर्थ में सूखे बीज सेभी हरितक्रांति आएगी। सोच-खोज कब कौन चलानियमित पथ हर रोज ढ़ला।जिंदा आग जला के देखमरके तो हर मुर्दा जला। धुंआ बन जब नीर उड़ेप्यास तभी बुझ पाएगी।व्यर्थ में सूखे बीज सेभी हरितक्रांति आएगी। है धूप उजाला साया कासच संगत की काया का।तू

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7 दिसंबर अंतर्राष्ट्रीय नागर विमानन दिवस पर लेख

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7 दिसंबर अंतर्राष्ट्रीय नागर विमानन दिवस पर लेख अंतर्राष्ट्रीय नागर विमानन दिवस अंतर्राष्ट्रीय नागरिक उड्डयन के महत्व के बारे में जागरूकता को बढ़ाता है । यह खास दिन विश्व भर में सामाजिक और आर्थिक विकास के नागरिक उड्डयन के महत्व के प्रति लोगों को जागरूक करने के लिए मनाया जाता है । इसका उद्देश्य वायु

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केंवरा यदु मीरा: मन से तृष्णा त्याग

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केंवरा यदु मीरा: मन से तृष्णा त्याग मन से तृष्णा त्याग कर,जपे राम का नाम ।हो तृष्णा का जब शमन,मिले मोक्ष का धाम ।। तृष्णा मन से मारिये ,बन जाता है काल।कौरव को ही देख लो, कितना किया बवाल ।। जीने की है चाह बहु,रब चाहे वह होय।तड़प तड़प कर क्या जियें, काहे मनवा रोय।।

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एक बात है जो भूलती नहीं

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एक बात है जो भूलती नहीं उम्र बढ़ रही है अक्ल नहीं अंकों के फेर में ।फिर भी इन्सान मशगूल है अपनी अंदरुनी उलटफेर में ।वास्तविकता से रूबरू होने का नाम नहीं होता।एक दूसरे को चोट पहुंचाए बिना काम नहीं होता।क्या थे तुम क्या हो गए नए थे तुम पुराने हो गए।होश कब संभलेगा जब

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ऑनलाइन पढ़ाई

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ऑनलाइन पढ़ाई आ गई बोर्ड परीक्षा,फिर होगी रिजल्ट की समीक्षापढ़ाई ने सब को कर दिया handsup,सबकी पसंद है व्हाट्सएप।साल भर कोरोना में मस्त थे ,अब परीक्षा आने वाली है तो त्रस्त है।शिक्षकों ने खूब समझाया पढ़ो लो बेटा ,ऑनलाइन आ जाओबेटा।पर बेटा कहां समझता जी गुरुजी जी गुरुजी कहते कहते साल निकाल दिया।ऑनलाइन पढ़ाई के

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और शाम हो जाती है

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और शाम हो जाती है हर सुबह जिंदगी को बुनने चलता हूं उठता हूं,गिरता हूं,संभालता हूं और शाम हो जाती है।अपने को खोजता हूं, सपने नए संजोता हूं पूरा करने तक शाम हो जाती है।जिंदगी तुझे समझने में, दिल तुझे समझाने की कश्मकश में शाम हो जाती है।सुखों को समेटता दुखों को लाधता कुछ समझ

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स्वामी विवेकानंद

युवाओं के प्रेरणास्रोत- स्वामी विवेकानंद

प्रकृति और पर्यावरण

युवाओं के प्रेरणास्रोत दिव्य सोच साधना से अपनी,पावन ज्ञान का दीप जलाया।सोए लोगों की आत्मा को,स्वामी जी ने पहली बार जगाया।भगवा हिंदुत्व का संदेश सुनाकर,भारत को विश्वगुरु बनाया।तंद्रा में सोई दुनिया के लोगों को,विश्वश्रेष्ठ विवेकपुंज ने जगाया। 11 सितंबर1893 को शिकागो में हिंदुत्व का ध्वज फहराया।संभव की सीमा से परे,असंभव को भी कर दिखलाया।समता,ममता से

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फ़र्रूख़ाबाद हमारा है

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फ़र्रूख़ाबाद हमारा है ऐतिहासिक भूमि है,हमें प्राणों प्यारा है।वीरों को जन्म देने वाला,फ़र्रूख़ाबाद हमारा है। साहित्य के क्षेत्र में,यहां की महादेवी जी सितारा हैं।छायावाद का सहयोगी,फ़र्रूख़ाबाद हमारा है। चीन, आस्ट्रेलिया और श्रीलंका ने,यह जनपद निहारा है।बौद्ध धर्म का तीर्थस्थल,फ़र्रूख़ाबाद हमारा है। फ़र्रूख़ाबाद को मिला,तीन नदियों का सहारा है।महाभारत कालीन,फ़र्रूख़ाबाद हमारा है ‌। कवि विशाल श्रीवास्तवजलालपुर

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अगर करो तुम वादा मुझसे

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अगर करो तुम वादा मुझसे मरुधर में भी फूल खिलादूँपर्वत को भी धूल बनादूँअगर करो तुम वादा मुझसेप्राण ! मेरे संग चलने का । हँस-हँसकर शूल चुनूँ पथ केपलकों की नाजुक उँगली सेबणीठणी-सा चित्र उकेरूंमग पर करुणा कजली से डगर-डगर की प्यास बुझादूँराहों की भी आह मिटादूँअगर करो तुम वादा मुझसेजलद ! मेरे संग गलने

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जिंदगी का आखिरी सफर….

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जिंदगी का आखिरी सफर…. जिंदगी का आखिरी सफर बड़ा सुहाना होगाजो कभी मिलते भी नही थे उनका भी मेरे पास आना होगाजिंदगी का आखिरी सफर बड़ा सुहाना होगा । जो कठोर रहते थे, अपनी बात पे अड़े रहते थेजिनको कुछ भी मेरे से लेना – देना नही थाउनके पास भी आज रोने का एक बहाना

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जीवन का ये सत्य है , मिलन बिदाई संग

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जीवन का ये सत्य है , मिलन बिदाई संग शब्द बिदाई सुन लगे , होता कोई दूर ।अपने हमसे छूटते , होकर अति मजबूर ।। मात पिता का नेह ले , सृजन साधना शान ।करें बिदाई मंजरी , अद्भुत ले पहचान ।। बिलख रहे है मात पितु , चली सुता ससुराल ।किये बिदाई आज वह

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फिर कहते हो ये खराब थी

समाज और यथार्थ

फिर कहते हो ये खराब थी मोबाइल दिया, आया बनाया, खाना खिलाया होटल में; इंटरनेट पर पहली पीढ़ी सवार थी, फिर कहते हो पीढ़ी खराब थी। बाहें चढ़ाई, दुपहिया दौड़ाया, दुर्घटना घटी बीच बाजार में; पी रखी शराब थी फिर कहते हो सड़क खराब थी। बातें बनाई, दिन बिताया, बेरोजगार हुआ इंतजार में; नशे चिटे

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