कविता बहार

नारी चेतना पर कविता

नारी जीवन और संवेदना, हिंदी कविता

नारी चेतना पर कविता ऐ! नारीतू करती है अराधनाउन अराध्यों कीजो हैं तेरे दोषीकिया शोषण सदैवजिन्होंने तेरा समझा तुझेश्रंगार-रस कीविषय-वस्तुनहीं दिया हकसमानता काकिया सदैव भेदभाव गवाह हैं इस सबकेअनेक धर्म-ग्रंथजो चीख-चीख करकरते हैं ब्यानतेरे शोषण की कहानी -विनोद सिल्ला©

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मीन सिंधु में दहक रही

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मीन सिंधु में दहक रही बड़वानल की लपटों में घिरमीन सिंधु में दहक रही।आग हृदय की कौन बुझाएनदियाँ झीलें धधक रही।। मौन हुई बागों में बुल बुलधुँआ घुली है पुरवाईसन्नाटों के ढोल बजे हैंशोक मनाए शहनाई अमराई में बौर झरे सबबया रुदन मय चहक रही।बड़वानल……………….।। सृष्टा का वरदान बताकरशोषण किया धरोहर काभँवरे ने भी खून

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कोरोना की मार पर कविता

हिंदी कविता

कोरोना की मार पर कविता गाँव गली सुनसान पड़े हैं।शहर भी तो वीरान पड़े हैं।कोरोना का कहर,आदमी को नाच नचा रहा।हाहाकार मची है दुनिया में,इटली,फ्रांस,ईरान बता रहा।हमारी स्थिति भी कहीं कभी,इटली ईरान सी न हो जाये।पूरी दुनिया हाँ पूरी दुनिया को,ये एकमात्र डर सता रहा।उनकी तुलना में हम भारतकहीं नहीं टिकते हैं।तो अपने लिए हाँ

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नाम पर कविता

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नाम पर कविता अक़्सर मुझेमेरे कानों मेंसुनाई दे जाती हैमेरे नाम से पुकारती हुईमेरी दिवंगत माँ की आवाज़और घर के दूसरे कमरे में सो रहेबाबूजी की पुकार माँ की पुकार सुनमहज़ अपना वहम समझकरमौन संतुष्ट हो जाता हूँ पर जब जब बाबूजी केपुकारने की आवाज़ आती हैमेरे कानों में,हड़बड़ाकर चला जाता हूँउनके कमरे मेंऔर पूछता

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महागौरी पर कविता (कुंडलियाँ)

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महागौरी पर कविता : हिन्दुओं के शक्ति साम्प्रदाय में भगवती दुर्गा को ही दुनिया की पराशक्ति और सर्वोच्च देवता माना जाता है (शाक्त साम्प्रदाय ईश्वर को देवी के रूप में मानता है)। वेदों में तो दुर्गा का व्यापाक उल्लेख है, किन्तु उपनिषद में देवी “उमा हैमवती” (उमा, हिमालय की पुत्री) का वर्णन है। माँ दुर्गा

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पढ़ा-लिखा मूर्ख पर कविता

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पढ़ा-लिखा मूर्ख पर कविता मोहम्मद तुगलकतू हर बाररात के अंधेरे मेंकरता है जारीतुगलकी फरमानजो लागू होते हैंरात के अंधेरे में हीतू उजालों से डरता तो नहींअपने फरमान सुनाने से पूर्वकर लिया कर कुछ विचार विगत में भीजारी किए फरमानगलत नहीं थेसोने की जगहतांबे की मुद्रा चलानाउचित निर्णय थाराजधानी बदलना भीउचित निर्णय थाउपयुक्त तैयारी का अभावरहा

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माँ कालरात्रि पर कविता

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माँ कालरात्रि पर कविता मात भवानी सिद्धिदा , दूर करे त्रय ताप।कालरात्रि माँ पुण्यदा , हरे सभी के पाप।।हरे सभी के पाप , माँ भव सागर तारिणी।हे शूलपाणि मात , चण्डमुण्ड संहारिणी।।कहता कवि करजोरि ,भद्रकाली वरदानी।कर दो भय से मुक्त, हे कृष्णा माँ भवानी।।????मात हेशक्तिशालिनी, हम पर कर उपकार।रक्तबीज संहारिणी , कर आपद संहार।।कर आपद

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शीतऋतु के भोर पर कविता

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शीतऋतु के भोर पर कविता भोर कुहासा शीत ऋतुतैर रहे घन मेह।बगिया समझे आपदावन तरु समझे नेह।।.तृषित पपीहा जेठ मेंकरे मेह हित शोरपावस समझे आपदाकोयल कामी चोर करे फूल से नेह वहमन भँवराँ नर देह।भोर……………..।।.ऋतु बासंती आपदासावन सिमटे नैनविरहा तन मन कोकिलाखोये मानस चैन पंथ निहारे गेह कायाद करे हिय गेह।भोर…………….।। याद सिंधु को कर

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korona

कोरोना महामारी पर कविता

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कोरोना महामारी पर कविता उथल -पुथल हो चला भूमंडलधरणी पे मची है हाहाकारहै काल के भय से जगत मौनहर ओर मनुज का चीख -पुकारजागो संभलो अब हे मानवदो अपने राजा का साथविश्व का कल्याण करने कोकरो कहीं एकांत निवास ।। शत्रु का वेग है बहुत प्रबलहै उसका रूप बहुत विकरालबंद हो जाओ मौन गुफा मेंओ

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गरीबों पर कविता

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गरीबों पर कविता दौड़ने वाले पहिए थम गए,चलने वाले कदम रुक गए।लाए हैं उन अमीरों ने इसको,गरीबों की आँखें नम कर गए। ये कैसी गुलामी में फंद गए,बड़े-बड़े योद्धा भी इसे डर गए।थका बुझा सहमा सा मजदूर,जिसका जीवन पूरा बिखर गए। घायल पंछी की तरह पंख टूट गए,जीवन जीना दूभर हो गए ।हालात से उनको

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कात्यायनी माँ पर कविता

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कात्यायनी माँ पर कविता माता दानव घातिनी , हरो सभी के पाप।होय दूर माँ जगत के , रोग शोक संताप।।रोग शोक सन्ताप , माता हे कात्यायनी।कालहारिणी अम्ब , आदि शक्ति वरदायनी।।कहताकवि करजोरि,मात के गुण जो गाता।करती संकट दूर , हे भवतारिणी माता।।????अम्बे हे कात्यायनी , करती है भव पार।मात भवानी चण्डिका , देवी सिंह सवार।।देवी

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गीत-सूनी सूनी संध्या भोर पर कविता

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संध्या भोर पर कविता काली काली लगे चाँदनीचातक करता नवल प्रयोग।बदले बदले मानस लगतेरिश्तों का रीता उपयोग।। हवा चुभे कंटक पथ चलतेनीड़ों मे दम घुटता आजकाँप रहा पीला रथ रवि कासिंहासन देता आवाजझोंपड़ियाँ हैं गीली गीलीइमारतों में सिमटे लोग।बदले…………………।। गगन पथों को भूले नभचर,सागर में स्थिर है जलयानरेलों की सीटी सुनने कोवृद्ध जनों के तरसे

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