कविता बहार

प्रभु ने ऐसी दुनिया बनाई है-माधवी गणवीर

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प्रभु ने ऐसी दुनिया बनाई है- प्रभु ने ऐसी दुनिया बनाई  है,कही धूप तो कही गम की परछाई है। रात का राजा देता है पहरा,चांदनी छिटककर मन में समाई है। निशा ने हर रूप है बदले,धरा पर जुगनुओं की बारात आई है। सारी फिजाओ को समेटे आगोश में,अंजुमन में आने को जैसे मुस्काई हैं। समीर […]

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पेरा ल काबर लेसत हो

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पेरा ल काबर लेसत हो तरसेल होथे पाती – पाती बर, येला काबरा नइ सोचत हो!ये गाय गरुवा के चारा हरे जी , पेरा ल काबरा लेसत हो !! मनखे खाये के किसम-किसम के, गरुवा बर केठन हावे जी !पेरा भुसा कांदी चुनी झोड़ के, गरुवा अउ काय खावे जी !!धान लुआ गे धनहा खेत

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तांका की महक- पद्म मुख पंडा स्वार्थी

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तांका की महक बेटी चाहतीमाता पिता की खुशीबहू के लिएसास ससुर बोझतनातनी है रोज बेटी हमारीससुराल क्या गईसास ससुरमांगते हैं दहेजचाहिए कार नई मच्छरों को क्यापाप पुण्य से कामचूसेंगे खूनसभी लोगों का यूं हीजीना करें हराम लापरवाहीहोती खतरनाकसतर्क रहेंध्यान रखें सबकानहीं कोई मजाक पद्म मुख पंडाकविता बहार से जुड़ने के लिये धन्यवाद

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वर्षा जैन “प्रखर- एक नया ख्वाब सजायें

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एक नया ख्वाब सजायें सपने कभी सुनहले कभी धुंधले सेआँखों के रुपहले पर्दे पर चमकते सेबुन कर उम्मीदों के ताने बानेहम सजाते जाते हैं सपने सुहाने कनकनी होती है तासीर इनकीमुक्कमल नहीं होती हर तस्वीर जिनकीसपनों को नही मिल पाता आकारमन के गर्त में रहते हैं वो निराकार टूटते सपनों की तो बात ही छोड़िये

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Jai Sri Ram kavitabahar

रामराज्य पर कविता / बाँके बिहारी बरबीगहीया

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रामराज्य पर कविता / बाँके बिहारी बरबीगहीया सप्तपुरी में  प्रथम  अयोध्या जहाँ रघुवर   अवतार  लिए।हनुमत, केवट,  गुह  , शबरीसुग्रीव को हरि जी तार दिए।गौतम की भार्या  अहिल्या कोचरण लगा उद्धार  किए ।मारीच, खर- दूषण , बालीऔर रावन का संहार किए ।आज अवधपुरी में  रघुवरराजा बन कर फिर से आयो।अवधपुरी में  बाजी बधाई रामराज्य   फिर  से  आयो ।।

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कवयित्री वर्षा जैन “प्रखर” प्रदूषण पर आधारित कविता

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प्रदूषण पर आधारित कविता यत्र प्रदूषण तत्र प्रदूषण सर्वत्र प्रदूषण फैला हैखानपान भी दूषित हैवातावरण प्रदूषित है जनसंख्या विस्फोट भी एक समस्या भारी हैजिसके कारण भी होतीप्रदूषण की भरमारी है जल, वायु, आकाश प्रदूषितनभ, धरती, पाताल प्रदूषितमिल कर जिम्मेदारी लेंइस समस्या को दूर भगा लें शतायु होती थी पहलेअब पचास में सिमटी हैये आयु भी अब

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mosquito

मच्छर -अजस्र(दुर्गेश मेघवाल)

विज्ञान, तकनीक और भविष्य

मच्छर -अजस्र(दुर्गेश मेघवाल)  एक हादसा कल रात हो गया,                         हो बीमार मैं पस्त पड़ा।मच्छर एक ललकारते हुए,                     तान के सीना समक्ष खड़ा।मच्छर हूँ मैं ,मुझसे तुम सब,                 

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radha shyam sri krishna

राधा की पुकार गीत/ केवरा यदु “मीरा “

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राधा की पुकार गीत / केवरा यदु “मीरा “ राधा पुकारे  तोहे  श्याम  हाथ जोड़  कर।आ जाओ  मोहन  प्यारे  मथुरा  को छोड़  कर।।आ जाओ  मोहन  प्यारे मथुरा को छोड़ कर । रूठ गई निंदिया  श्याम  , चैनों  करार भी।प्रीत  जगाके  काहे  मुझको  बिसार दी।भूल  नहीं  जाना कान्हा  दिल से नाता  जोड़ कर।। आ जाओ  मोहन 

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पुरानी यादो पर ग़ज़ल

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पुरानी यादो पर ग़ज़ल भुला बैठे थे हम जिनको वो अक्सर याद आते हैंबहारों के हसीं सारे वो मंज़र याद आते हैं रहे कुछ बेरहम से हादसे मेरी कहानी केझटक कर ले गए सबकुछ जो महशर याद आते है दिलों में खींच डाली हैं अजब सी सरहदें सबनेहुए रिश्ते मुहब्बत के जो बेघर याद आते

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नोटबंदी पर कविता

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नोटबंदी पर कविता सरकार जी आपने की थी नोटबंदीआठ नवंबरसन् दो हजार सोलह कोनहीं थकेआपके चाहने वालेनोटबंदी केफायदे बताते-बतातेनहीं थकेआपके आलोचकआलोचना करते-करतेलेकिन हुआ क्या?पहाड़ खोदने कीखट-खट सुनकरबिल छोड़कर सुदूरचूहा भी भाग निकलाआज है वर्षगांठनोटबंदी कीफायदे बताने वालेनहीं कर रहेनोटबंदी की याद मेंकोई समारोहमात्र आलोचक हैंक्रियाशीलसोशल मिडिया पर।  -विनोद सिल्ला© कविता बहार से जुड़ने के लिये धन्यवाद

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छत्तीसगढ़ मैया पर कविता -श्रीमती शशिकला कठोलिया,

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छत्तीसगढ़ मैया पर कविता जय हो जय हो छत्तीसगढ़ मैया,सुन लोग हो जाते स्तंभित,राष्ट्रगान सा स्वर है गुजँता,छत्तीसगढ़ का यह राज गीत,नरेंद्र देव वर्मा की अमर रचना,है उसकी आत्मा की संगीत,छत्तीसगढ़िया को बांधे रखता ,यह पावन सुंदर सा गीत ,धरती का शुभ भावों से सिंगार कर,छत्तीसगढ़ माटी का बढ़ाया गौरव,गीत में साकार हो उठता ,समूचे

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इश्क पर कविता-माधवी गणवीर, छत्तीसगढ़

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इश्क पर कविता यू इस तरह न मुंह मोड़ कर चला करो,है इश्क तो जुबां से भी कहा करो। क्यों हाथ मिलाने पर रहते हो आमादा हर वक्त,अजनबी लोगों से थोड़ा फासले से मिला करो। भूल सकते नहीं तेरे अहसास कभी हम,हर राह पर, हर मोड़ पर तुम ही तुम दिखा करो। हर वक्त यूं

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