कविता बहार

लक्ष्य पर ग़ज़ल – सुशी सक्सेना

हिंदी कविता

कांटों भरा हो या फूलों भरा, जारी ये सफ़र रखना,कदम जमीं पर हो, मगर आसमां पर नजर रखना। मुश्किलों भरीं हैं, ये राहें जिंदगी की, ऐ साहिबचैन न मिले तो उलझनों में ही हंसी बसर रखना। खोने न देना होश, कामयाबियां जब कदम चूमेगमों में दिल के टुकड़ों को अपने सभांल कर रखना यूं तो

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लगी आग सरहद पर,कैसे राग बसंती गाऊँ मैं

हिंदी कविता

सीमा रक्षा करते,उनको झुककर शीश नवाऊँ। लगी आग सरहद पर,कैसे राग बसंती गाऊँ। जान हथेली पर रख, सैनिक सीमा पर डटे हुए। मातृ भूमि रक्षा में,वो सब अपनों से दूर हुए।। मेरी भी इच्छा है,दुश्मन से मैं भी लड़ जाऊँ। लगी आग सरहद पर,कैसे राग बसंती गाऊँ।। फड़के आज भुजाए, नहीं बसंती रंग सुहाता। मां

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मन की व्यथा – आशीष कुमार

हिंदी कविता

मन की व्यथा इस निर्मोही दुनिया मेंकूट-कूट कर भरा कपटकहाँ फरियाद लेकर जाऊँ मैंकिसके पास लिखाऊँ रपट जिसे भी देखो इस जहाँ मेंभगा देता है मुझे डपटशांति नहीं अब इस जीवन मेंकहाँ बुझाऊँ मन की लपट जो भी था मेरे पास मेंसबने लिया मुझसे झपटरिश्तों की जमा पूँजी में भीसबने लगाई मुझे चपत कमाई मेरे

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वागेश्वरी वंदना

विज्ञान, तकनीक और भविष्य

वागेश्वरी वंदना माँ वीणावादिनी , मां बुद्धिदायिनी तव महिमा है अपरंपार कर माते तू लोकाद्धार तव ममता से जग आलोकित ज्योतिर्मय जग जगमग शोभित गाता नवगीत संसार………! वागेश्वरी , माँ ज्ञानदायिनि , सबको देती बुद्धि, ज्ञान , तव दृग जग का कल्पना द्वार……! दृष्टि से सृष्टि आलोकित तेज से जगजीवन है शोभित तव कृपावश ज्ञान

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संविधान का मान तिरंगा है

हिंदी कविता

संविधान का मान तिरंगा है तीन रंग से बना हुआ ये संविधान का मान तिरंगा है। पूरे जग में सबसे न्यारा आन बान अरु शान तिरंगा है।। जाति पांति के भेद मिटाता ये हम सबकी करता रखवाली। तीन रंग इसके अंदर है लहराता ये तब बजती ताली।। लोकतंत्र का है प्रतीक ये न्याय दिलाता जान

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मन की व्यथा

हिंदी कविता

मन की व्यथा इस निर्मोही दुनिया में कूट-कूट कर भरा कपट कहाँ फरियाद लेकर जाऊँ मैं किसके पास लिखाऊँ रपट जिसे भी देखो इस जहाँ में भगा देता है मुझे डपट शांति नहीं अब इस जीवन में कहाँ बुझाऊँ मन की लपट जो भी था मेरे पास में सबने लिया मुझसे झपट रिश्तों की जमा

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सेनानी बन जाएं हम

हिंदी कविता

चलो गुलामी आज़ादी का, मिलकर खेल बनाएं हम। तुम व्यापारी अंग्रेज बनो, और सेनानी बन जाएं हम।। तुम हम पर कर लगाओ, तो तड़प तड़प जाएं हम। भूख प्यास बर्दाश्त ना हो, और सेनानी बन जाएं हम।। सत्ताधारी भ्रष्टाचारियों के, जंजाल में फंस जाएं हम। नासूर लाइलाज बनो तुम, और सेनानी बन जाएं हम।। बेरोज़गारी

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बसंत पंचमी पर गीत – सुशी सक्सेना

हिंदी कविता

मेरे मन का बसंत बसंत ऋतु का, यहां हर कोई दिवाना है।क्या करें कि ये मौसम ही बड़ा सुहाना है।हर जुबां पर होती है, बसंत ऋतु की कहानी।सुबह भी खिली खिली, शाम भी लगती दिवानी। चिड़ियों ने चहक कर, सबको बता दिया।बसंत ऋतु के आगमन का पता सुना दिया।पतझड़ बीत गया, बन गया बसंती बादल।पीली

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देश भक्ति गीत – सुशी सक्सेना

आध्यात्म और भक्ति, हिंदी कविता

इश्क ऐ वतन इश्क ओ उल्फत कुछ हमें भी है इस वतन से।कुछ कर गुजेरेंगे, इक रोज़ हम भी तन मन से। गुलशन अपने वतन का जार जार न होने देंगे।इसकी किसी भी कली को बेजार न होने देंगे। अमर शहीदों की अमानत को संभाल कर रखेंगे।प्यारे वतन को हर मुश्किल से निकाल कर रखेंगे।

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एक पड़ोसन पीछे लागी – उपमेंद्र सक्सेना

हिंदी कविता

एक पड़ोसन पीछे लागी आज लला की महतारी कौ, अपुने मन की बात बतइहौं एक पड़ोसन पीछे लागी, बाकौ अपुने घरि लै अइहौं। बाके मारे पियन लगो मैं, नाय पियौं तौ रहो न जाबै चैन मिलैगो जबहिं हमैं तौ, सौतन जब सबहई कौ भाबै बाके एक लली है ताको, बाप हमहिं कौ आज बताबैकेतो अच्छो

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सुभाष चंद्र बोस जयंती – उपमेंद्र सक्सेना

नारी जीवन और संवेदना

सुभाष चंद्र बोस जयंती – उपमेंद्र सक्सेना थे सुभाष जी मन के सच्चे, सबने उनको इतना माना।नेता जी के रूप में उन्हें, सारी दुनिया ने पहचाना। सन् अट्ठारह सौ सतानवे, में तेईस जनवरी आयीतब चौबीस परगने के कौदिलिया ने पहचान बनायीथा सुभाष ने जन्म लिया, माताजी प्रभावती कहलायींपिता जानकी नाथ बोस ने, थीं ढेरों बधाइयाँ

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तुकांत क्या है ?

हिंदी कविता

तुकान्त क्या है ?     काव्य पंक्तियों के अंतिम भाग में पायी जाने वाली वर्णों की समानता को तुकान्त कहते हैं।      कविता के शिल्प में तुकान्त का विशेष महत्व है, इसलिए काव्य-साधना के लिए तुकान्त-विधान समझना आवश्यक है। आइए हम तुकान्त को समझने का प्रयास करें ।       इसे समझने

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