कविता बहार

लोक गीत -उपमेंद्र सक्सेना

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लोक गीत -उपमेंद्र सक्सेना जाकी लाठी भैंस बाइकी, बाकौ कौन नाय अबु जनि हैकमजोरन की लुगाइनन कौ,दइयर तौ भौजाई मनि है। ब्याहु पड़ौसी को होबन कौ, बाके घरि आए गौंतरियापपुआ ने तौ उनमैं देखी, गौंतर खाउत एक बहुरियाबाके पीछे बौ दीबानो, औरन कौ बौ नाहीं गिनि हैकमजोरन की लुगाइनन कौ, दइयर तौ भौजाई मनि है।

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बाल कविता – भ्रमण

हिंदी कविता

बाल कविता – भ्रमण सुबह भ्रमण को हम जाएं ।ठंडी – ठंडी हवा में नहाएं ।। वो देखो-देखो कौन आए ।बन्दरों की फौज शोर मचाए।। नाच रहे ठुमक-ठुमक कर मोर ।भ्रमण-पथ पर ये दृश्य मन भाए।। नन्हीं चिड़ियों के मधुर तराने ।मैना-तीतर मिल सुर मिलाए ।। पेड़ पौधे मिलकर गाना गाये।ठंडी हवाएं मन को बहुत

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लोकन बुढ़िया-नरेंद्र कुमार कुलमित्र

हिंदी कविता

लोकन बुढ़िया स्कूल कैंपस के ठीक सामनेबरगद के नीचेनीचट मैली सूती साड़ी पहनीमुर्रा ज्वार जोंधरी के लाड़ूऔर मौसमी फल इमली बिही बेर बेचतीवह लोकन बुढ़ियाआज भी याद है मुझे उस अकेली बुढ़िया कोस्कूल के हम सब बच्चे जानते थेमगर आश्चर्य तो यह हैउस बुढ़िया की धुंधली आंखेंहम सबको पहचानती थीहम सबका नाम जानती थी उसकी

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शाश्वत अनुष्टुप्छन्द में कविता

हिंदी कविता

मैं दिलवर दीवाना हर जनम का प्रिये ।भाये तेरे बिना कोई कभी हो सकता नहीं ।। दीवाने सब हैं मस्त धन दौलत लिए हुए ।अपनी तो फकीरी से यारी है निभा रहे ।। पद लोलुपता तेरी मौलिकता उड़ा गई ।पतनोन्मुख इंसान अंदर से मरा हुआ ।। दीवानेपन की बात यूँ कहते नहीं बने ।है अजीब

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दूध पर कविता

हिंदी कविता

मेरे स्कूल का दूध (एक घटना) दुःख ही जीवन की कथा रही यह सदा कष्ट की व्यथा रही। कब तक कोई लड़ सकता है! कब तक कष्टें सह सकता है हो सहनशक्ति जब पीर परे है कौन धीर धर सकता है? मन डोल उठा यह देख दृश्य उस बच्ची का जीवन भविष्य जो आयी थी

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ग़ज़ल -विनोद सिल्ला

हिंदी कविता

ग़ज़ल -विनोद सिल्ला कैसी-कैसी हसरत पाले बैठे हैं।गिद्ध नजर जो हम पर डाले बैठे हैं।। इधर कमाने वाले खप-खप मरते हैं,पैसे वाले देखो ठाले बैठे हैं।। खून-पसीना खूब बहाते देखे जो,उनसे देखो छीन निवाले बैठे हैं।। नफरत करने वाले दोनों और रहे,कुछ मस्जिद तो बाकि शिवाले बैठे हैं।। खेत कमाते मिट्टी में मिट्टी होकर,सेठ बही

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वसंत ऋतु पर छोटी सी कविता (short poem on spring)

समाज और यथार्थ

वसंत भारतीय वसंत को दर्शाता है, और ऋतु का मौसम है। वसंत ऋतु के मुख्य त्योहारों में से एक वसंत पंचमी (संस्कृत: वसन्त पञ्चमी) को मनाया जाता है, जो भारतीय समाज में एक सांस्कृतिक और धार्मिक त्योहार है, जिसे वसंत के पहले दिन, हिंदू महीने के पांचवें दिन (पंचमी) को मनाया जाता है। माघ (जनवरी-फरवरी)। बसंत ऋतू

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महाशिवरात्रि पर कविता – उपमेंद्र सक्सेना

हिंदी कविता

महाशिवरात्रि पर कविता – उपमेंद्र सक्सेना बने आप भोले जहर पी लिया सब, लगें आप हमको सब से ही न्यारेनिवेदन करें हम महादेव प्यारे, न डूबें कभी भी हमारे सितारे। बजे हर तरफ आपका खूब डंका, न होती किसी को कहीं आज शंकाभवानी की चाहत हो क्यों न पूरी, बनी थी तभी तो सोने की

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कबाड़ पर कविता -उपमेंद्र सक्सेना

हिंदी कविता

कबाड़ पर कविता -उपमेंद्र सक्सेना सब हुआ कबाड़ था,भाग्य में पछाड़ थारास्ता उजाड़ था, सामने पहाड़ था। छल- कपट हुआ यहाँ, सो गए सभी सपनकर दिया गया दहन, मिल सका नहीं कफ़नपास के बबूल ने ,दी जिसे बहुत चुभनबेबसी दिखा रही, है यहाँ विचित्र फनस्वार्थ के कगार पर, त्याग जब गया मचललोभ- लालसा बढ़ी, लोग

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बनारस पर कविता – आशीष कुमार

हिंदी कविता

बनारस पर कविता – आशीष कुमार जब आँख खुले तो हो सुबह बनारसजहाँ नजर पड़े वो हो जगह बनारसरंग जाता हूँ खुशी खुशी इसके रंग में मैंझूम कर दिल कहता मेरा अहा बनारस सबके सपने देता है सजा बनारसदिल को भी कर देता है जवाँ बनारसइसकी गलियों से जब होकर गुजरूँ मैंपुलकित मन फिर कहता

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इश्क पर कविता -सुशी सक्सेना

प्रकृति और पर्यावरण

इश्क पर कविता -सुशी सक्सेना इश्क के आगे कलियों की तरूणाई फीकी है।इश्क में तो हर इक शय जी लेती है।इश्क से आसमां की ऊंचाई झुक जाती है।इश्क में नदियों की लहराई भी रुक जाती है।इश्क से सागर भी कम गहरा लगता है।इश्क में सारी दुनिया का पहरा लगता है।इश्क में पत्थर भी पिघल जाता

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प्रेम पर कविता – विनोद सिल्ला

हिंदी कविता

प्रेम पर कविता -विनोद सिल्ला गहरा सागर प्रेम का, लाओ गोते खूब।तैरोगे तो भी सही, निश्चित जाना डूब।। भीनी खुशबू प्रेम की, महकाए संसार। पैर जमीं पर कब लगें, करे प्रेम लाचार।। पावन धारा प्रेम की, बहे हृदय के बीच।मन निर्मल करके नहा,व्यर्थ करोमत कीच।। साज बजे जब प्रीत का, झंकृत मन के तार।रोम-रोम में

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