कविता बहार

स्वाभिमान पर कविता

हिंदी कविता

स्वाभिमान पर कविता जब शब्द अधरों से परे हुए और कोरे कागज काले कर जायें तो जब अंधेरा ही अंधेरा हो और एक चिंगारी जल जाए तो जब हार गए और टूट गए बिखरे फिर भी रूके नहीं स्वाभिमान फिर भी मरा नहीं गिरे मगर झुके नहीं।। तूफानों का मंजर था सामने दुश्मन लिए खंजर […]

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माँ शारदे की कृपा

हिंदी कविता

माँ शारदे की कृपा अज्ञानता का नाश हो ज्ञान का दीप जले माँ शारदे की कृपा हो जाए सफलता तब गले मिले। निकाल लाता ज्ञान के मोती उच्च हो जाती ज्ञान की ज्योति माँ शारदे की कृपा जो होती अब तक अज्ञानता में पले। ज्ञान का कमल खिलता अज्ञानता के सरोबर में मेहनत से कर

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मन की अभिलाषा

हिंदी कविता

मन की अभिलाषा वेदना का हो अंत फिर आए जीवन में बसंत मन की प्रसन्नता हो अनंत दुःख का पूर्णविराम हो मन में न कोहराम हो। आस का पंक्षी सहन पाए उड़ने को पूरा गगन पाए दुविधा में न क्षण लुटाए मन का मधूर सुर तान हो मन में न कोहराम हो। संघर्ष का मार्ग

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नवोदय क्रांति परिवार प्रेरणा गीत

प्रेरणा और सकारात्मकता, हिंदी कविता

जन जन को जगाएंगे।नवोदय क्रांति लाएंगे।आओ शिक्षक, प्यारे शिक्षक,हम सब मिलकर शिक्षा में नई क्रांति लाएंगे।जन जन को जगाएंगे।नवोदय क्रांति लाएंगे। पालक,अभिभावक,जनप्रतिनिधि मिलकर शालाको रंगीन बनाएंगे।जन जन को जगाएंगे।नवोदय क्रांति लाएंगे। राष्ट्रिय शिक्षक संचेतना लाएंगे।कश्मीर से कन्याकुमारी तकशिक्षा का अलख जगाएंगे।हर शाला को डिजिटल बनाएंगे।जन जन को जगाएंगे।नवोदय क्रांति लाएंगे। हम हैं शिक्षक, शिक्षा की

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जब विपदा आ जाए सम्मुख – उपमेंद्र सक्सेना

हिंदी कविता

जब विपदा आ जाए सम्मुख जिसका साथ निभातीं परियाँ, मनचाहा सुख पाता हैजब विपदा आ जाए सम्मुख, कोई नहीं बचाता है। क्या है उचित और क्या अनुचित, बनी न इसकी परिभाषादुविधा में जो फँसा कभी भी, टूटी उसकी अभिलाषाजिसका मन हो लगा गधी में, वह उसको अपनाता हैजब विपदा आ जाए सम्मुख, कोई नहीं बचाता

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नया अब साल है आया – उपमेंद्र सक्सेना

हिंदी कविता

नया अब साल है आया नया अब साल है आया, रहे इंसानियत कायममुहब्बत के चिरागाँ इसलिए हमने जलाए हैं। सुकूने बेकराँ मिलती, अगर पुरशिस यहाँ पे होन हो वारफ़्तगी कोई, दिले मुज्तर कहीं क्यों होनवीदे सरबुलंदी से, जुड़ें सब ये तमन्ना हैसरे आज़ार के पिन्दार को कुदरत यहाँ दे धो अमीरों के घरों में खूब

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पीर दिलों की मिटायें

हिंदी कविता

पीर दिलों की मिटायें पीर दिलों की मिटायें, चलो एक ऐसा नया जहां बसायेंपीर दिलों की मिटायें, चलो एक ऐसा नया जहां बसायें lपलती हों जहां खुशियाँ, चलो एक ऐसा आशियाँ सजाएँ ll हर एक चहरे पर हो मुस्कान, ना हो ग़मों का कोई निशान lफेहरे जहां संस्कृति, संस्कारों का परचम, चलो एक ऐसा उपवन

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रंग इन्द्रधनुष

हिंदी कविता

रंग इन्द्रधनुष ….. धरती का हरापन सदा से बुलाते रहे मुझेमैं उसके आँचल में दूब बनकर पसर गया ,नीला विस्तृत आकाश हुर्र बुलाता रहा मुझेमैं उसमें घुसकर नीलकंठ हो गया ,मैं उनकी गली के गुलाबी रंग बीचप्रेम प्याला पीकर महक गया ;युवा बसंत को सजाते हुए कभीकाँपे नहीं मेरे हाथ लेकिनअपनी बेटी को विदा करते

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सादगी पर सायरी

हिंदी कविता

सादगी पर सायरी सादगी की सुरत सुहानी बनावट की बातों का काम नहीं है। सादगी की खुबसूरत जवानी बेतहासा सजावट का काम नहीं है। सादगी की जरूरत जिसने जानी अधिक जरूरत का कोई काम नहीं है। सादगी की है सफल कहानी सफर में थकावट का काम नहीं है। राजीव कुमार बोकारो स्टील सिटी झारखण्ड 8797905224

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मन पर कविता

हिंदी कविता

मन पर कविता मन सरिता बहाती कलकल स्वछन्द वेग से तेरी स्मृतियों का जल। मन सरिता की गहराई अथाह तेरी स्मृतियों का ही रखरखाव। मन सरिता की लहरें अशांत कभी न चाहे तेरी स्मृतियों का अंत। मन सरिता का जहाँ भी मोड़ तेरी स्मृति का ही एक छोर। मन सरिता की अतृप्त प्यास तेरी स्मृति

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लातन को जो भूत हियन पै – उपेन्द्र सक्सेना

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लातन को जो भूत हियन पै पर कविता जिसके मन मै ऐंठ भरै बौ, अपने आगे किसकौ गिनिहैलातन को जो भूत हियन पै,बातन से बौ नाहीं मनिहै। अंधो बाँटै आज रिबड़ियाँ, अपनिन -अपनिन कौ बौ देबैनंगे- भूखे लाचारन की, नइया कौन भलो अब खेबैआँगनबाड़ी मै आओ थो, इततो सारो माल बटन कौबच्चन कौ कछु नाय

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नवनिर्माण पर कविता – विनोद सिल्ला

हिंदी कविता

नवनिर्माण पर कविता पत्थरों और ईंटों मेंहुआ मुकाबलामची होड़एक-दूसरे कोमुंहतोड़ जवाब देने की पत्थर से ईंटईंट से पत्थर खूब टकराएटूटी ईंटेंक्षतिग्रस्त हुए पत्थर हो जाता मुकाबलादोनों मेंकौन करेगासुंदर नवनिर्माण तब मुकाबले के साथ-साथ हो जाती राह प्रशस्त नवनिर्माण की बन जाते भवननहर, पुल, सड़कव अन्य जीवनोपयोगी संसाधन। –विनोद सिल्ला

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