प्रेरणा क्यों विफल होती है
प्रेरणा और सकारात्मकता, हिंदी कवितातुम्हें प्रेरणा नहीं चाहिए,तुम्हें बोध चाहिए।धक्का नहीं,खींच नहीं—भीतर की वह चाबीजो पहले से तुम्हारे पास है। प्रेरणाहमेशा बाहर से आती है—कोई भाषण देता है,मन गरम हो जाता है।कोई फ़िल्म देखी,सीना भर आया।किताब बंद हुई,जोश भी बंद। यह तुम्हारी ऊर्जा नहीं थी,यह उधार थी।और उधार की आगज्यादा देर नहीं जलती। बाहरी शक्तितुम पर काम करती है,तुम
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