लातन को जो भूत हियन पै – उपेन्द्र सक्सेना
हिंदी कवितालातन को जो भूत हियन पै पर कविता जिसके मन मै ऐंठ भरै बौ, अपने आगे किसकौ गिनिहैलातन को जो भूत हियन पै,बातन से बौ नाहीं मनिहै। अंधो बाँटै आज रिबड़ियाँ, अपनिन -अपनिन कौ बौ देबैनंगे- भूखे लाचारन की, नइया कौन भलो अब खेबैआँगनबाड़ी मै आओ थो, इततो सारो माल बटन कौबच्चन कौ कछु नाय
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