लालसा पर कविता – पूनम दुबे
हिंदी कवितालालसा पर कविता जो कभी खत्म ना हो,रोज एक के बाद एक,नई इच्छाओं का जन्म होना,पाने की धुन बनी रहती है, लालसा सबको खुश रखने तक,सपनों को पूरा करने तक,कब चैन की सांस लेंगे,अंधेरों से उजालों तक,कभी तो चैन मिलेगा ,पर ये लालसा बढ़ती रहती है, तुमसे कुछ कहूं कब सुनोगे मेरी बात,कुछ तुम्हें बताना
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