हिंदी कविता

बस एक पेड़ ही तो काटा है -नदीम सिद्दीकी

प्रकृति और पर्यावरण

बस एक पेड़ ही तो काटा है बस एक पेड़ ही तो उखाड़ा है साहब!अगर ऐसा न हो तो बस्तियां कैसे बसेगी?प्रगति,तरक्की,ख़ुशयाली कैसे आएगी? हमें आगे चलना है,पीछे नहीं रहना है,दुनिया के साथ चलकर आगे बढ़ना है।आगे बढ़ने की रफ्तार सही नहीं जाती,तुमसे इंसान की तरक्की देखी नहीं जाती।ये कैसी तरक्की है साहब? तुमने कभी […]

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झुमका : प्यार के प्यार की निशानी

हिंदी कविता

झुमका : प्यार के प्यार की निशानी आज मैंने अपने तोहफे का बॉक्स निकाला,जिसे बड़े सलीके से मैंने संभाल के रखा था,आदत कहूं या तोहफे के प्रति मेरा लगावमैंने अपना हर एक तोहफा संभाल के रखा है बड़े प्यार सेऔर जब ये तोहफा आपके प्यार का दिया होतो उसके प्रति प्यार और बढ़ जाता है,

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गुरु पूर्णिमा

गुरु पूर्णिमा पर दोहे

हिंदी कविता

महर्षि वेद व्यासजी का जन्म आषाढ़ शुक्ल पूर्णिमा को ही हुआ था, इसलिए भारत के सब लोग इस पूर्णिमा को गुरु पूर्णिमा के रूप में मनाते हैं। जैसे ज्ञान सागर के रचयिता व्यास जी जैसे विद्वान् और ज्ञानी कहाँ मिलते हैं। व्यास जी ने उस युग में इन पवित्र वेदों की रचना की जब शिक्षा

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प्रकृति संरक्षण मंत्र-अमिता गुप्ता

प्रकृति और पर्यावरण, हिंदी कविता

प्रकृति संरक्षण मंत्र-अमिता गुप्ता प्रकृति हमारा पोषण करती,देकर सुंदर सानिध्य,जीवन पथ सुगम बनाती है,जीव-जंतु जगत की रक्षा को,निज सर्वस्व लुटाती है। आधुनिकीकरण के दौर में,अंधाधुंध कटाई कर,जंगलों का दोहन क्षरण किया,खग, विहंग, पशु कीटों का,घर-आंगन आश्रय छीन लिया। प्रदूषण स्तर हुआ अनियंत्रित,प्लास्टिक,पॉलिथिन का उपयोग बढ़ा,पोखर,तड़ाग,नद, झीलों का,मृदु नीर मानव ने अशुद्ध किया। रफ्ता-रफ्ता हरियाली क्षीण

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हमें जमीं से मत उखाड़ो-अदित्य मिश्रा

हिंदी कविता

हमें जमीं से मत उखाड़ो रो-रोकर पुकार रहा हूं हमें जमीं से मत उखाड़ो।रक्तस्राव से भीग गया हूं मैं कुल्हाड़ी अब मत मारो। आसमां के बादल से पूछो मुझको कैसे पाला है।हर मौसम में सींचा हमको मिट्टी-करकट झाड़ा है। उन मंद हवाओं से पूछो जो झूला हमें झुलाया है।पल-पल मेरा ख्याल रखा है अंकुर तभी

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hasdev jangal

मत करो प्रकृति से खिलवाड़-दीप्ता नीमा

प्रकृति और पर्यावरण, हिंदी कविता

मत करो प्रकृति से खिलवाड़ मत काटो तुम ये पहाड़,मत बनाओ धरती को बीहाड़।मत करो प्रकृति से खिलवाड़,मत करो नियति से बिगाड़।।1।। जब अपने पर ये आएगी,त्राहि-त्राहि मच जाएगी।कुछ सूझ समझ न आएगी,ऐसी विपदाएं आएंगी ।।2।। भूस्खलन और बाढ़ का कहर,भटकोगे तुम शहर-शहर।उठे रोम-रोम भय से सिहर,तुम जागोगे दिन-रात पहर।।3।। प्रकृति में बांटो तुम प्यार,और

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पर्यावरण संकट

प्रकृति से खिलवाड़ पर्यावरण असंतुलन-तबरेज़ अहमद

प्रकृति और पर्यावरण, हिंदी कविता

प्रकृति से खिलवाड़ पर्यावरण असंतुलन शज़र के शाखो पर परिंदा डरा डरा सा लगता है।ऐसी भी क्या तरक्की हुई है मेरे मुल्क में।कई शज़र के शाखाओं को काटकर और कई शज़र को उजाड़ कर शहर का शहर बसा लगता है।इन पर्यावरण को उजाड़ कर शहर बसा लगता है।फिर भी कहा दिल लगता है।कभी प्रकृति की

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सर्वधर्म सार तत्व (दोहे)

हिंदी कविता

सर्वधर्म सार तत्व (दोहे) बाइबिल नीतिवचननीतिवचन से सीख लें, मोल महत्तम माप।बुद्धि स्वर्ण से उच्च है, सच पतरस की नाप।। बुद्धिबुद्धि क्षेत्र परिमाप को, दें इतना विस्तार।चाँदा घूमें नापने, जोड़ करें साकार।। यहोवाजन्म यहोवा को दिया, मरियम तारनहार।येरुशलम भूभाग पर, चरणी में अवतार।।कुरान आयतेंअरज आयतें मानिए, कहता कर्म कुरान।मानवता का पाठ है, नियत रखें ईमान।।

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भोर वंदन- नवनिर्माण करें

हिंदी कविता

भोर वंदन-नवनिर्माण करें ====लावणी छन्दगीत 16,14 पदांत 2==== सत्य सर्वदा अपनाएँ हम, न्योछावर निज प्राण करें।…राम राज्य आधार शिला ले,आओ नवनिर्माण करें।।… सत्य विकल तो हो सकता है, नहीं पराजय अंत मिले।झूठी चादर ओढ़े कलयुग, जयचंदों सह संत मिले।।कुपित मौलवी और पादरी, भ्रष्टाचारी पंत मिले।विषमय रक्त प्रवाहित होता, दंश मनुज के दंत मिले।। उदाहरण हम

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