हिंदी कविता

मां शारदे नमन लिखा दे

हिंदी कविता

मां शारदे नमन लिखा दे नमन् लिखा दे. १६,१४वीणा पाणी, ज्ञान प्रदायिनी,ब्रह्म तनया माँ शारदे।सतपथ जन प्रिय सत्साहित,हितकलम मेरी माँ तार दे। मात शारदे नमन् लिखादे,धरती, फिर नभ मानों को।जीवनदाता प्राण विधाता,मात पिता भगवानों को। मात शारदे नमन लिखा दे,सैनिक और किसानों को।तेरे वरद पुत्र,माँ शारद,गुरु, कविजन, विद्वानों को। मात शारदे नमन लिखा दे,भू पर

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atal bihari bajpei

अटल बिहारी वाजपेई के लिए कविता

हिंदी कविता

अटल बिहारी वाजपेई के लिए कविता हरिगीतिका छंद. (मापनी मुक्त १६,१२). अटल – सपूत श्री अटल भारत भू मनुज,हीशान सत अरमान है।जन जन हृदय सम्राट बन कवि,ध्रुव बने असमान है।नहीं भूल इनको पाएगा,देश का अभिमान है।नव जन्म भारत वतन धारण,या हुआ अवसान है।.हर भारत का भरत नयन भर,अटल की कविता गात है।हार न मानूं रार

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सखी के लिए कविता -डॉ0 दिलीप गुप्ता

हिंदी कविता

सखी के लिए कविता – डॉ0 दिलीप गुप्ता रिमझिम बरसे.मन है हरसेप्रणय को ब्याकुल हिरदय होवे,सात समंदर पार है सजनीबिरह में बदरा-मेघा रोवे…..तप्त हृदय की अगन बुझाने—–आओ न सखी.. आओ न सखी।।–।।00नीला अम्बर,हरी-भरी धरतीनाचत मोर रिझावत सजनी,उपवन डार-पात लदे फूलनमहकी रातरानी यहां रजनी,सुने आंगन को महकाने—-आओ न सखी…आओ न सखी।।–।।00धरती भीगी मन मोरा लथपथप्रेम का

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NATURE

प्रकृति है जीवन का उपहार

प्रकृति और पर्यावरण, हिंदी कविता

प्रकृति है जीवन का उपहार प्रकृति है जीवन का उपहार,इसे हम कब संभालेंगे।धरा की पावन आसन पर , इसे हम कब पौढ़ायेंगे।बचा ले अपने जीवन में , स्वास के दाताओं को अब , नहीं तो श्वास और उच्छवास को हम भूल जाएंगे।बेखट कट रहे हैं पेड़, हमारी ही इच्छाओं से , उजड़े बाग उपवन वन

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धरती स्वर्ग दिखाई दे

प्रकृति और पर्यावरण

पर्यावरण संरक्षण के लिए एक बार फिर से पहले की तरह अपनी वसुंधरा पर हरियाली और प्राण वायु के लिए प्रदूषण रोकना होगा ।
आओ मिलकर कसम खाते है कि वृक्षारोपण जरूर करना है।

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पेड़ हमारे मित्र पर कविता"

प्रकृति से खिलवाड़ पर्यावरण असंतुलन – शशांक गर्ग

प्रकृति और पर्यावरण, हिंदी कविता

प्रकृति से खिलवाड़ पर्यावरण असंतुलन पर गद्य लेख

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ओजोन परत

आक्सीजन के लिए जंग- शिवेन्द्र यादव

प्रकृति और पर्यावरण,

आक्सीजन के लिए जंग कोरोना महामारी के चलते देश में अधिकतर मौतें आक्सीजन ना मिलने के कारण हुई हैं।लेकिन मनुष्य जिस गति से अपने निजी स्वार्थ के लिए निरंतर वृक्षो का दोहन कर रहा है ऐसा ना हो कि आने वाले वर्षों में हर व्यक्ति को आक्सीजन के लिए जंग लड़नी पड़े। वन नीति के

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बस एक पेड़ ही तो काटा है -नदीम सिद्दीकी

प्रकृति और पर्यावरण

बस एक पेड़ ही तो काटा है बस एक पेड़ ही तो उखाड़ा है साहब!अगर ऐसा न हो तो बस्तियां कैसे बसेगी?प्रगति,तरक्की,ख़ुशयाली कैसे आएगी? हमें आगे चलना है,पीछे नहीं रहना है,दुनिया के साथ चलकर आगे बढ़ना है।आगे बढ़ने की रफ्तार सही नहीं जाती,तुमसे इंसान की तरक्की देखी नहीं जाती।ये कैसी तरक्की है साहब? तुमने कभी

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झुमका : प्यार के प्यार की निशानी

हिंदी कविता

झुमका : प्यार के प्यार की निशानी आज मैंने अपने तोहफे का बॉक्स निकाला,जिसे बड़े सलीके से मैंने संभाल के रखा था,आदत कहूं या तोहफे के प्रति मेरा लगावमैंने अपना हर एक तोहफा संभाल के रखा है बड़े प्यार सेऔर जब ये तोहफा आपके प्यार का दिया होतो उसके प्रति प्यार और बढ़ जाता है,

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