मत करो प्रकृति से खिलवाड़-एकता गुप्ता
प्रकृति और पर्यावरण, हिंदी कविताइस कविता में प्रकृति संरक्षण की बात कही गई है।
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इस कविता में प्रकृति संरक्षण की बात कही गई है।
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खुद के तलाश पर कविता tabrez Ahmed
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इस कविता के माध्यम से कवि , देश पर मर मिटने वाले जाबाजों के द्वारा दिए गए वतनपरस्ती के ज़ज्बे और सीख को सलाम कर रहा है |
इस रचना के माध्यम से कवि नवीन रचनाकारों को भी साहित्य जगत में सम्मानजनक स्थान दिलाने का प्रयास कर रहा है |
हिंदी साहित्य जगत में अनेक सितारे हैं Read More »
विश्व ही परिवार है- आर आर साहू ————— परिवार ————-ऐक्य अपनापन सुलभ सहकार है,इस धरा पर स्वर्ग वह परिवार है। मातृ,भगिनी, पितृ,भ्राता,रुप में,शक्ति-शिव आवास सा घर-द्वार है। बाँटते सुख-दुःख हिलमिल निष्कपट,है प्रथम कर्तव्य फिर अधिकार है। है तितिक्षा,त्याग,का आदर्श भी,प्रेम, मर्यादा सुदृढ़ आधार है। दृष्टि जितना और जैसा देखती,उस तरह,उतना, उसे संसार है। नीर,पावक,वायु ये
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विधाता छंद मय मुक्तक- फूल रखूँ किस पृष्ठ के अंदर,अमानत प्यार की सँभले।भरी है डायरी पूरी,सहे जज्बात के हमले।गुलाबी फूल सा दिल है,तुम्हारे प्यार में पागल।सहे ना फूल भी दिल भी,हकीकत हैं, नहीं जुमले।.सुखों की खोज में मैने,लिखे हैं गीत अफसाने।रचे हैं छंद भी सुंदर,भरोसे वक्त बहकाने।मिला इक फूल जीवन में,तुम्हारे हाथ से केवल।रखूँगा डायरी
विधाता छंद मय मुक्तक- फूल Read More »
कोरोना महामारी पर आधारित रचना – कैसी ये महामारी
कैसी ये महामारी – संस्कार अग्रवाल Read More »
प्रकृति से प्रेम – रीता प्रधान प्रकृति की सुंदरता पर आधारित रचना
प्रकृति से प्रेम पर कविता Read More »
मोहब्बत के रास्ते में इम्तिहानो का सिलसिला दर्शाती ये कविता
मोहब्बत की कविता-कोई मेरी ओर नहीं है Read More »
प्रकृति से खिलवाड़ और अनावश्यक विनाश करने का गंभीर परिणाम हमे भुगतना पड़ेगा। जिसके जिम्मेदार हम स्वयं होंगे।
समय रहते संभल जाएं। प्रकृति बिना मांगे हमे सब कुछ देती है।उनका आदर और सम्मान करें। संरक्षण करें।
प्रकृति से खिलवाड़ का फल – महदीप जंघेल Read More »
भौतिकता की होड़ में मानव ने प्रकृति के साथ बहुत छेड़छाड़ की है। अपने विकास की मद में खोया मानव पर्यावरण संतुलन को भूल गया है। इस प्रकार के कृत्यों से ही आज कोरोना जैसी महामारी से मानव जीवन के अस्तित्व खतरे में दिख रहा है।
प्रकृति से खिलवाड़/बिगड़ता संतुलन-अशोक शर्मा Read More »