हिंदी कविता

चहचहाती गौरैया

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चहचहाती गौरैया चहचहाती गौरैयामुंडेर में बैठअपनी घोसला बनाती है,चार दाना खाती हैचु चु की आवाज करती है,घोसले में बैठेनन्ही चिड़िया के लिएचोंच में दबाकरदाना लाती है,रंगीन दुनिया मेंअपनी परवाज लेकररंग बिखरेती है,स्वछंद आकाश मेंअपनी उड़ान भरती है,न कोई सीमान कोई बंधनसभी मुल्क के लाड़लीउड़ान से बन जाती है,पक्षी तो हैगौरैया की उड़ानसब को भाँति है,घर

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जल संकट पर कविता

नारी जीवन और संवेदना,

विश्व जल दिवस 22 मार्च को मनाया जाता है। इसका उद्देश्य विश्व के सभी देशों में स्वच्छ एवं सुरक्षित जल की उपलब्धता सुनिश्चित करवाना है साथ ही जल संरक्षण के महत्व पर भी ध्यान केंद्रित करना है। जल संकट पर कविता पानी मत बर्बाद कर ,          बूँद – बूँद अनमोल |प्यासे ही जो मर गये

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नास्तिकता पर कविता

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नास्तिकता पर कविता हमें पता नहींपर बढ़ रहे हैंधीरे धीरेनास्तिकता की ओरत्याग रहे हैंसंस्कारों को,आडम्बरों कोसमझ रहे हैंहकीकतअच्छा है।परजताने कोबताते हैंमैं हूँ आस्तिक।फिर भीछोंड रहे हैंहम ताबीजमजहबी टोपीनामकरण रस्मझालर उतरवानाबहुत कुछ।बढ़ रहे हैंधीरे धीरेनास्तिकता की ओरक्योंकिनास्तिकता हीवैज्ञानिकता है। राजकिशोर धिरहीकविता बहार से जुड़ने के लिये धन्यवाद

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तीन कविताएं

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तीन कविताएं                         1बाहें फैलायेमांग रही दुआएँ,भूल गया क्यामेरी वफ़ाएँ!ओ निर्मोही मेघ!इतना ना तरसा,तप रही तेरी वसुधाअब तो जल बरसा!                        2बूंद-बूंद को अवनी तरसे,अम्बर फिरभी ना बरसे!प्यासा पथिक,पनघट प्यासाप्यासा फिरा, प्यासे डगर से!प्यासी अँखिया पता पूछे,पानी का प्यासे अधर से!बूंद-बूंद को अवनी तरसेअम्बर फिरभी ना बरसे!                      3प्रदूषण से कराहती,शांत हो गई है!कहते हैं

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कश्मीरी पत्थरबाजों पर दोहे

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कश्मीरी पत्थरबाजों पर दोहे धरती का जो स्वर्ग था, बना नर्क वह आज।गलियों में कश्मीर की, अब दहशत का राज।।भटक गये सब नव युवक, फैलाते आतंक।सड़कों पर तांडव करें, होकर के निःशंक।।उग्रवाद की शह मिली, भटक गये कुछ छात्र।ज्ञानार्जन की उम्र में, बने घृणा के पात्र।।पत्थरबाजी खुल करें, अल्प नहीं डर व्याप्त।सेना का भी भय

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चंदन के ग़ज़ल (chandan ke gazal)

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यहाँ पर चंद्रभान पटेल चंदन के ग़ज़ल (Chandan Ke Gazal) के बारे में पढेंगे यदि आपको अच्छी लगी हो तो शेयर जरुर करें मैं दरिया के बीच कहीं डूबा पत्थर मैं दरिया के बीच कहीं डूबा पत्थर ,तू गहनों में जड़ा हुआ महँगा पत्थर।। तुझ को देख के नदी का पानी ठहर गया,तुझ को छू

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रामनाथ की कुण्डलिया

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रामनाथ की कुण्डलिया (1)  प्रातः  जागो भोर में ,                    लेके  हरि  का   नाम ।       मातृभूमि वंदन करो ,                    फिर पीछे सब काम ।।       फिर पीछे सब काम ,                   करो तुम दुनियादारी ।       अपनाओ    आहार ,                   शुद्ध ताजे  तरकारी ।।       कह ननकी कविराज ,                 मांस ये मदिरा त्यागो ।       देर  रात  मत जाग ,                  हमेशा   प्रातः 

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मिल मस्त हो कर फाग में

हिंदी कविता

मिल मस्त हो कर फाग में सब झूम लो रस राग में।मिल मस्त हो कर फाग में।।खुशियों भरा यह पर्व है।इसपे हमें अति गर्व है।।यह मास फागुन चाव का।ऋतुराज के मधु भाव का।।हर और दृश्य सुहावने।सब कूँज वृक्ष लुभावने ।।मन से मिटा हर क्लेश को।उर में रखो मत द्वेष को।।क्षण आज है न विलाप का।यह

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holika-dahan

होलिका दहन पर हिंदी कविता / पंकज प्रियम

नारी जीवन और संवेदना

होलिका दहन पर हिंदी कविता / पंकज प्रियम बुराई खत्म करने का प्रण करेंआओ फिर होलिका दहन करें।औरत की इज्जत का प्रण करें,आओ फिर होलिका दहन करें। यहां तो हर रोज जलती है नारीदहेज कभी दुष्कर्म की है मारीरोज कोई रावण अपहरण करेपहले इनका मिलकर दमन करेआओ फिर….. हर घर प्रह्लाद सा कुंठित जीवनमां बाप

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Radha kishna holi

होली के दोहे – बासुदेव अग्रवाल

नारी जीवन और संवेदना

होली वसंत ऋतु में मनाया जाने वाला एक महत्वपूर्ण भारतीय और नेपाली लोगों का त्यौहार है। यह पर्व हिंदू पंचांग के अनुसार फाल्गुन मास की पूर्णिमा को मनाया जाता है। होली रंगों का तथा हँसी-खुशी का त्योहार है। यह भारत का एक प्रमुख और प्रसिद्ध त्योहार है, जो आज विश्वभर में मनाया जाने लगा है। विकिपीडिया

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ऋतु बसंत आ गया

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ऋतु बसंत आ गया           बिखरी है छटा फूलों की,          शोभा इंद्रधनुषी रंगों की,          कोयल की कूक कर रही पुकार,          ऋतु बसंत आ गया,          आओ मंगल-गान करें।महुए के फूलों की मदमाती बयार,आम्र मंजरी की बहकाती मनुहार,सुरमई हुए जीवन के तार,ऋतु बसंत आ गया,आओ मंगल-गान करें।             महकी सी लगती है हर गली,             कुसुमित हर्षित है हर

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दिल की बात बताकर देखो

हिंदी कविता

दिल की बात बताकर देखो दिल की बात बताकर देखोमन में दीप जलाकर देखो।कौन किसी को रोक सका हैनाता खास निभाकर देखो।आँखों की बतिया समझो तोलब पर मौन सजाकर देखो।इश्क़ सफ़ीना सबका यक साथोड़ा पार लगाकर देखो।लोग जगत सब मैला यारोंमन का वहम मिटाकर देखो।रब का एक नज़रिया सब परऐसा भाव जगाकर देखो। राजेश पाण्डेय

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