अनिता मंदिलवार सपना की कविता
समाज और यथार्थअनिता मंदिलवार सपना की कविता समझदार बनो कहते हैं बड़े बुजुर्गसमझदार बनोजब बेटियाँ चहकती हैंघर के बाहरखिलखिलाती हैंउड़ना चाहती हैंपंख कतर दिये जाते हैंकहा जाता हैतहजीब सीखोसमझदार बनो !जब वह बराबरीकरती दिखती भाई कीउसे एहसासदिलाया जाता है कितुम लड़की होतुम्हें उड़ने का हक नहीं हैबस बंद रहना हैविचारों के कटघरे मेंतुलना न करो तुमअपने हद
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