सद्गुरु-महिमा न्यारी जग का भेद खोल दे
हिंदी कवितासद्गुरु-महिमा न्यारी सद्गुरु-महिमा न्यारी, जग का भेद खोल दे।वाणी है इतनी प्यारी, कानों में रस घोल दे।।गुरु से प्राप्त की शिक्षा, संशय दूर भागते।पाये जो गुरु से दीक्षा, उसके भाग्य जागते।।गुरु-चरण को धोके, करो रोज उपासना।ध्यान में उनके खोकेेे, त्यागो समस्त वासना।।गुरु-द्रोही नहीं होना, गुरु आज्ञा न टालना।गुरु-विश्वास का खोना, जग-सन्ताप पालना।।गुरु की गरिमा भारी,
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