होली पर दोहे – हरिओम शर्मा

Holi par kavita

होली पर दोहे – होली वसंत ऋतु में मनाया जाने वाला एक महत्वपूर्ण भारतीय और नेपाली लोगों का त्यौहार है। यह पर्व हिंदू पंचांग के अनुसार फाल्गुन मास की पूर्णिमा को मनाया जाता है। होली रंगों का तथा हँसी-खुशी का त्योहार है। यह भारत का एक प्रमुख और प्रसिद्ध त्योहार है, जो आज विश्वभर में मनाया जाने लगा है। विकिपीडिया

होली पर दोहे – हरिओम शर्मा

holi
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मंगलमय हो आपको, होली का त्यौहार।
द्वेष, बैर को छोड़कर , ख़ूब लुटाओ प्यार।।

रंग अबीर गुलाल हैँ, गुजियाओं के संग ।
पिचकारी है प्रेम की, ये फागुन के रंग ।।

भल्ले टिक्की पापड़ी काजी है अनमोल ।
ठंडाई मैं प्यार का ,रंग दिया है घोल ।।

हिस्से पापड़ कुरकुरे, और वेसन के सेव ।
ठंडाई है भांग की ,खुश होंगे महादेव।।

व्हाट्स एप पर कर दिया, हमने तो ऐलान।
कितना भी रंग डाल लो ,फ़ोटो है श्रीमान।।

द्वेषभाव कटुता जलन ,ऊंच नीच को भूल ।
प्रेम सहित स्वीकार लो ,ये फागुन के फूल।।

नशा कीजिये प्यार का ,मिट जाये सब बैर ।
सबको अपना कीजिये, रहे न कोई गैर ।।

इंतजार मैं हम खड़े ,लेकर गुज़िया,रंग ।
कृष्ण कन्हैया आइये, राधा जी के संग ।।

ढोल नगाड़े बज रहे ,गाते रसिया फाग ,
शर्वत गुजिया सज रहे,उमड़ रहा अनुराग ,

सरसों सेमल ढाक के ,रंग बिरंगे फूल ,
मस्त धूप हल्की हवा , मौसम है अनुकूल ,

आम लदे है बौर से ,फ़ैली मस्त सुगंध ,
प्रेमांकुर फूटन लगे ,टूटन लागे बंध,

सजनी साजन खेलते, उड़े अबीर गुलाल ,
हुआ हरा तन और मन ,गाल गुलाबी लाल ,

द्वेष ईर्स्या,कपट छल ,जले होलिका संग ,
सराबोर मन प्यार से ,ऐसा वरसे रंग ,

हरिओम शर्मा

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